Headlines

जहां कभी हिलोरे मारता था पानी, वहां अब पथराई मिट्टी:सूखे तालाब के बीच मवेशियों को बचाने की जंग, ग्रामीण कर्ज लेकर खरीद रहे पानी




भीषण अकाल में जिले के ग्रामीण इलाकों में पानी को लेकर हालात विकट बने हुए हैं। इस बार जितनी जरूरत थी, उसकी आधी भी बारिश नहीं हुई। ऐसे में गांवों में जहां तालाब, नाड़ी और बांधों में पानी आता था, वहां लोग 4-5 महीने तक पशुधन से लेकर खुद तक पानी पीते थे। वे स्रोत इस बार सूखे पड़े हैं। इस स्थिति में हालात विकट हो रहे हैं। अकाल के इस सीजन में आज कहानी शिव के पूर्व विधायक अमीन खां के गांव देताणी की है। देताणी में 100 साल पुराना तालाब हर साल इन दिनों पानी से लबालब रहता था। इस बार अकाल की वजह से बारिश नहीं हुई। तालाब सूखा पड़ा है। मवेशियों को जिंदा रखने के लिए किसान 1000 रुपए में पानी के टैंकर खरीद रहे हैं। आने वाले दिनों में हालात ओर अधिक विकट होने की संभावना है। ऐसे में ग्रामीणों की परेशानी बढ़ने की संकेत मिल रहे हैं। 100 गांवों की जीवनरेखा था यह तालाब, अब सन्नाटा करीब 2500 की आबादी वाले देताणी गांव की पहचान इस विशाल तालाब से रही है। सितंबर से लेकर झुलसा देने वाली मई-जून की गर्मियों तक यह तालाब न केवल देताणी, बल्कि आसपास के 10-15 किलोमीटर के दायरे में फैले करीब 100 छोटे-बड़े गांवों के हलक तर करता था। किसान ऊंट-गाड़ों, बैलगाड़ियों और बर्तनों में पानी भरकर ले जाते थे। इस बार अकाल के थपेड़ों ने पूरे इलाके की जीवनरेखा काट दी है। जिस तालाब के तलवे पर कभी अथाह पानी हिलोरे मारता था, वहां आज सिर्फ पथराई मिट्टी नजर आ रही है। जंग: 1000 का एक टैंकर, कर्ज में डूबते किसान देताणी और आसपास के ग्रामीणों की पूरी आजीविका केवल दो चीजों पर टिकी है। बारानी खेती। पशुपालन। गांव के अमूमन हर घर में 5 से 7 गोवंश हैं। 50 से 100 भेड़-बकरियां हैं। बारिश नहीं होने से खेतों में चारे (कुतर) का तिनका तक नहीं उगा। ऊपर से पीने के पानी का टोटा है। मवेशियों को तड़प-तड़पकर मरने से बचाने के लिए ट्यूबवेलों से 1000 से 1200 रुपये प्रति टैंकर पानी मंगवाया जा रहा है। औसतन एक बड़े रेवड़, यानी भेड़-बकरियों और मवेशियों के लिए, हर 4-5 दिन में एक टैंकर की जरूरत पड़ रही है। बुजुर्ग बोले: इंसान नहीं, लेकिन मवेशी मर जाएंगे भीषण से भीषण सूखे के दौर में भी इस तालाब के एक हिस्से में इतना पानी जरूर ठहरता था कि पशुओं का गला तर हो सके। इस बार बादल ऐसे रूठे कि तालाब सूखा पड़ा है। मवेशियों के लिए भी पानी 1000 रुपये में टैंकर से खरीदना पड़ रहा है। इंसान जैसे-तैसे टैंकर खरीदकर प्यास बुझा रहा है। – हाजी गुलाम, बुजुर्ग किसान, देताणी। गांव में 2500 से ज्यादा गोवंश है। 20 हजार से ज्यादा भेड़-बकरियां हैं। ये सब पशुधन इसी तालाब पर जिंदा रहते थे। जल जीवन मिशन में टंकी तो बनी। कुछ घरों को छोड़कर कहीं भी पानी नहीं आ रहा है। किसान अकाल से चारे-पानी का संकट झेल रहे हैं। -हेबत खां, किसान, देताणी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *