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पानीपत में पेंशन खाते से चेक के माध्यम से 1.31 लाख रुपए निकले गए और खाताधारक को इसकी भनक तक नहीं लगी। खाताधाराक कहना था कि जिस चेक से रकम निकाली गई, वह उनके पास था और दूसरा चेक तो खाली था। मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा, लेकिन आयोग ने एसबीआई की पानीपत शाखा की सेवा में कोई कमी नहीं मानी और शिकायत खारिज कर दी। आयोग के अनुसार महिला यह साबित नहीं कर सकी कि दोनों चेक उसने किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं दिए थे। साथ ही, जिन दिल्ली की एसबीआई शाखाओं में चेक भुनाए गए और रकम प्राप्त करने वाले व्यक्ति को भी केस में पक्षकार नहीं बनाया गया। वहीं मामले की शिकायत भी देरी से की गई। ये फैसला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने सुनाया। देर से शिकायत करना भी पड़ा भारी
आयोग के आदेश के मुताबिक बैंक के रिकॉर्ड में रकम निकलने के बाद मोबाइल पर संदेश भेजे गए थे। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि बैंक के नियमों के अनुसार ऐसी धोखाधड़ी की शिकायत एक महीने के भीतर की जानी चाहिए, जबकि इस मामले में शिकायत काफी देर बाद की गई। 12 हजार निकालने पहुंची, तब सामने आया 1.31 लाख का मामला
गांव बिंझौल निवासी भतेरी का एसबीआई में बचत/वेतन/पेंशन खाता है। 5 मार्च 2024 को उन्हें 12 हजार रुपए की जरूरत थी। वह बैंक पहुंचीं और अपने लिए 12 हजार रुपए निकालने के लिए चेक नंबर 217448 दिया। बैंक अधिकारियों ने चेक का रिकॉर्ड देखा तो भुगतान से इनकार कर दिया। बताया गया कि चेक नंबर 217448 और 217449 पहले ही इस्तेमाल हो चुके हैं। 21 जनवरी 2023 को दो चेकों से दो बार में निकले रुपए
बैंक रिकॉर्ड के अनुसार 21 जनवरी 2023 को चेक नंबर 217448 से 66 हजार रुपए और चेक नंबर 217449 से 65 हजार रुपए ट्रांसफर हुए। यानी खाते से कुल 1.31 लाख रुपए निकल गए। महिला का दावा था कि उसने ये चेक किसी को जारी नहीं किए। उसका कहना था कि दोनों चेक उसके पास ही थे और 217449 खाली था। बैंक को शिकायत, रकम वापसी की मांग
रकम निकलने का पता चलने के बाद भतेरी ने बैंक शाखा प्रबंधक को शिकायत दी। इसके बाद दिल्ली स्थित एसबीआई कार्यालय में भी शिकायत भेजी। उपभोक्ता आयोग में दायर केस में उसने 1.31 लाख रुपए वापस दिलाने के साथ 21 जनवरी 2023 से 18% ब्याज, 50 हजार रुपए मुआवजा और 22 हजार रुपए मुकदमा खर्च की मांग की। बैंक का तर्क- रकम निकलते ही मोबाइल पर भेजा था मैसेज
एसबीआई ने जवाब में कहा कि 21 जनवरी 2023 को दोनों चेकों से रकम निकलने के तुरंत बाद खाताधारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर कंप्यूटर जनरेटेड मैसेज भेजे गए थे। बैंक के अनुसार महिला ने उस समय कोई शिकायत नहीं की और करीब एक साल दो महीने बाद मामला उठाया। पानीपत में नहीं, दिल्ली की दो शाखाओं में हुए थे चेक कैश
बैंक ने आयोग को बताया कि दोनों चेक एसबीआई की दिल्ली स्थित डिफेंस कॉलोनी और ग्रीन पार्क एक्सटेंशन शाखाओं में इस्तेमाल हुए थे। बैंक ने आपत्ति उठाई कि इन शाखाओं और जिस खाते में रकम गई, उसके मालिक को केस में पक्षकार ही नहीं बनाया गया। आयोग बोला- जिस पर रकम लेने का आरोप, उसे ही केस में नहीं बनाया
आयोग ने दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि महिला यह साबित नहीं कर सकी कि चेक उसके द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिए गए थे। आयोग ने यह भी माना कि दोनों चेक दिल्ली की दूसरी एसबीआई शाखाओं में भुनाए गए थे। उन शाखाओं और कथित रकम निकालने वाले व्यक्ति को पक्षकार नहीं बनाया गया।
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चेक महिला के पास और खातों से निकल गई रकम:चेक महिला के पास और खातों से निकल गई रकम
