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Puri Rath Yatra Update | Odisha Govt Statement on Devotee Deaths


पुरी58 मिनट पहले

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रथयात्रा के दौरान भीड़ में दम घुटने से कई लोग बेहोश होकर गिर गए। - Dainik Bhaskar

रथयात्रा के दौरान भीड़ में दम घुटने से कई लोग बेहोश होकर गिर गए।

ओडिशा के पुरी में गुरुवार को लगातार बारिश के बीच भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा हुई। सरकार ने रथयात्रा के दौरान हुई दो श्रद्धालुओं की मौत पर कहा कि दोनों मौतें भगदड़ या भीड़ प्रबंधन में किसी कमी की वजह से नहीं हुईं।

CMO के मुताबिक, रथयात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर 7 श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया था। इनमें 60 साल के एक श्रद्धालु की मौत हुई, जिसकी वजह का अभी पता लगाया जा रहा है। वहीं, 35 वर्ष से ज्यादा उम्र के दूसरे श्रद्धालु की हार्ट अटैक से मौत हुई।

राज्य सरकार के मुताबिक, रथयात्रा में करीब 10 लाख श्रद्धालु शामिल हुए। देर शाम तक महाप्रभु जगन्नाथ का रथ 200 मीटर, भगवान बलभद्र का रथ 500 मीटर और देवी सुभद्रा का रथ 700 मीटर बढ़कर रुक गया। अब शुक्रवार सुबह 9:30 बजे पूजा-भोग के बाद रथ यात्रा फिर शुरू होगी।

पुरी रथयात्रा की 3 तस्वीरें…

पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन और रथ खींचने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन और रथ खींचने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

मंदिर के सेवायत भगवान जगन्नाथ को कंधों पर उठाकर गर्भगृह से रथ तक ले गए।

मंदिर के सेवायत भगवान जगन्नाथ को कंधों पर उठाकर गर्भगृह से रथ तक ले गए।

पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने रथयात्रा निकलने से पहले सोने की झाड़ू से सफाई की।

पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने रथयात्रा निकलने से पहले सोने की झाड़ू से सफाई की।

सुबह से बारिश थी, ​थमते ही धक्का-मुक्की से श्रद्धालुओं का दम घुटने लगा

पुरी में गुरुवार सुबह से बारिश हो रही थी। कई अनुष्ठान भी पानी के बीच हुए। शाम 5 बजे रथ आगे बढ़े। एक घंटा ही बीता था कि बारिश रुक गई। जो श्रद्धालु लॉज या होटल में रुके थे, वे भी इकट्‌ठा होने लगे। इसके चलते रथों के आसपास भीड़ बढ़ी और धक्का-मुक्की होने लगी।

दरअसल, मौसम विभाग ने रथ यात्रा के दौरान भारी बारिश का अंदेशा जताया था। तमाम तैयारियों के बावजूद पुलिस-प्रशासन का अनुमान था कि बारिश के चलते श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल होने से बचेंगे। लेकिन, बारिश थमते ही भीड़ बेकाबू हो गई। रथ यात्रा मार्ग पर हालात ये थे कि श्रद्धालु एक-दूसरे पर गिर रहे थे।

रथयात्रा के दौरान बेहोश हुई महिला को राहतकर्मी स्ट्रेचर पर अस्पताल ले जाते हुए।

रथयात्रा के दौरान बेहोश हुई महिला को राहतकर्मी स्ट्रेचर पर अस्पताल ले जाते हुए।

रथयात्रा के दौरान 4 चूक हुई जिससे भगदड़ जैसे हालात हुए

  • मंदिर के सिंहद्वार से रथों के पास भीड़ बढ़ती रही, पुलिस ने नहीं रोका।
  • पुलिस ने भीड़ बढ़ने पर प्रवेश बंद करने या मोड़ने की व्यवस्था नहीं की।
  • लोग अलग-अलग दिशाओं में बढ़ते रहे। आने-जाने के स्पष्ट रास्ते नहीं थे।
  • बैरिकेडिंग भीड़ को काबू करने के बजाय चोक पॉइट बन गई। क्राॅस मूवमेंट रोकने वाले बैरिकेड काम न आए।

गुंडिचा मंदिर क्यों जाते हैं जगन्नाथ?

  • मान्यता है कि गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर है। साल में सिर्फ एक बार रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा यहां आते हैं। तीनों देवता यहां 7 दिन तक विराजमान रहते हैं।इसके बाद आठवें दिन बहुड़ा यात्रा के जरिए वापस जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं।
  • मान्यता है कि राजा इंद्रद्युम्न ने ही जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था। इसलिए मंदिर का नाम राजा इंद्रद्युम्न की पत्नी रानी गुंडिचा के नाम पर पड़ा। साल में सिर्फ रथयात्रा के दौरान 7 दिन तक भगवान जगन्नाथ यहां विराजमान होते हैं।
  • बाकी समय मंदिर खाली रहता है। रथयात्रा के बाद लाखों श्रद्धालु यहीं भगवान के दर्शन करते हैं। रथयात्रा से एक दिन पहले पूरे मंदिर की सफाई की जाती है। इसे गुंडिचा मार्जन कहते हैं। रथयात्रा के आठवें दिन वापसी (बहुड़ा यात्रा) के दौरान भगवान मौसी मां मंदिर में रुकते हैं। यहां उन्हें ओडिशा का पारंपरिक ‘पोडा पीठा’ भोग लगाया जाता है।

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ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पहले ही शहर के सभी होटल और लॉज फुल हो गए थे। जिला प्रशासन के मुताबिक, इस साल फरवरी से ही बुकिंग शुरू हो गई थी। मांग बढ़ने के कारण पिछले साल के मुकाबले होटल और लॉज का किराया 10 गुना तक बढ़ गया। जिन लॉज का सामान्य किराया 1500 से 2000 रुपए था, वे रथयात्रा के दौरान तीन दिन के लिए 50 हजार रुपए तक में बुक हुए। पूरी खबर पढ़ें…

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