10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी का प्रोटेस्ट होना था। 9 अक्टूबर से ही सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को छावनी बना दिया। दिल्ली आने वाली ट्रेनें, मेट्रो स्टेशन और बॉर्डर के सड़क रूट बंद किए।
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10 अक्टूबर को सुबह होते ही प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाने लगा। 11 बजे तक कॉकरोच पार्टी की पूरी लीडरशिप- फाउंडर अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को हवाई जहाज से ही हिरासत में ले लिया गया।
आखिर इतनी सख्ती के पीछे वजह क्या है, सरकार इस बार प्रोटेस्ट क्यों नहीं होने देना चाहती, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: CJP प्रोटेस्ट के मद्देनजर कैसे छावनी बनी दिल्ली? जवाबः

9 अक्टूबर को मेट्रो और ट्रेनें बंद करने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘सावधानी बरतना गलत नहीं है, लेकिन ये तय करें कि इससे सबकुछ ठप न हो जाए। पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।’
CJI ने आगे कहा, ‘आपको कुछ चीजों को रोकना होगा, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करें।’
सवाल-2: आखिर ‘मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल’ क्यों कर रही सरकार? जवाबः जानकार इसकी 3 वजहें बताते हैं…
1. पिछली गलती नहीं दोहराना चाहती सरकार
- पॉलिटिकल एनालिस्ट रशीद किदवई कहते हैं, ‘सरकार 4 महीने पुरानी गलती नहीं दोहराना चाहती। एक बार प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे और प्रोटेस्ट शुरू हुआ, तो ये किसी भी करवट बैठ सकता है।’
- ‘इस बार राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष पहले से ही ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना और मार्च कर रहा है। इसलिए सरकार सजग है।’
- दरअसल, 20 जून को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट शुरू किया, तो भीड़ नहीं जुटी। फिर 28 जून से सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे। 10 जुलाई को उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, तो सोशल मीडिया से लेकर जंतर-मंतर तक उनके समर्थन में लोग जुटने लगे।
- 18 जुलाई को पुलिस ने सोनम को जबरन प्रोटेस्ट साइट से उठाया। इसके बाद प्रोटेस्ट सरकार के कंट्रोल से बाहर जाने लगा।
- फिर 20 जुलाई को CJP के संसद मार्च के दौरान ‘पुलिस एक्शन’ से सरकार पर और दबाव बढ़ता गया और आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद फ्लाइट में ही हिरासत में ले लिया गया।
2. इस बार प्रोटेस्ट की मांग ऐसी, जिसे सरकार नहीं मान सकती
- ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा होना बड़ी और गंभीर मांगों का पैंडोरा बॉक्स खुलने जैसा है। CJP इसके अलावा आने वाले सभी चुनावों को रोकने और SIR से पहले जनवरी 2025 वाली वोटर लिस्ट लागू करने जैसी मांगें भी कर रही है।
- VoteVibe के फाउंडर और इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी कहते हैं, ‘अगर ज्ञानेश कुमार दबाव में इस्तीफा देते हैं, तो SIR की पूरी प्रक्रिया और उसके बाद हुए सभी चुनावों पर सवाल उठने लगेंगे।’दरअसल, SIR के बाद अब तक 5 राज्य- बिहार, असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में चुनाव हो चुका है।
- इनके अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात, गोवा में SIR पूरा हो चुका है। पंजाब में काम लगभग पूरा हो गया है। उत्तराखंड और मणिपुर में SIR जारी है। इन सभी राज्यों में अगले साल चुनाव होने हैं।
- SIR के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड नहीं किया जा सकता, चुनाव आयोग का काम कैसे चलेगा। ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक है। इस दौरान 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं।

जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश करते करीब 1000 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पकड़कर हिरासत में भेजा है।
3. सरकार को दबाव में लाने के लिए प्रोटेस्ट का ट्रेंड शुरू हो सकता है
- सवाल है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बाद क्या होगा। विपक्ष सहित कॉकरोच पार्टी जैसे प्रेशर ग्रुप किसी मुद्दे पर सरकार हटाने के लिए आंदोलन शुरू कर दें, तो क्या होगा।
- राहुल गांधी के बयान भी इस आशंका को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा है, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार जाएंगे और मोदी सरकार भी जाएगी। इसके बाद लोकतंत्र को सुधारने का काम शुरू होगा।
- 6 अक्टूबर को भी राहुल ने कहा था- ‘मैं सोच समझ के कहता हूं। इनमें से एक भी बच कर नहीं जाएगा। चाहे वो नरेंद्र मोदी हों, अमित शाह हों, ज्ञानेश कुमार हों, मोहन भागवत हों… कोई बच कर नहीं जाएगा।’
- पॉलिटिकल एनालिस्ट आशुतोष कहते हैं, ‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से सरकार की इमेज को डेंट पहुंचा था, इसके पहले तक माना जाता था कि बीजेपी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते। पीएम मोदी की राजनीति में इस छवि पर भी असर पड़ा कि उनको किसी तरह से दबाव में नहीं लाया जा सकता।
- पॉलिटिकल एक्सपर्ट आदेश रावल बताते हैं, ‘राहुल का टारगेट स्ट्रैटेजी पीएम मोदी की छवि कमजोर करना है। वो ये संदेश देना चाहते हैं कि बीजेपी को चुनाव आयोग की वजह से वोट मिलते हैं, न कि नरेंद्र मोदी की वजह से।’

4. CJP पर ज्यादा फोकस से कांग्रेस का महत्व कम करने की कोशिश
- जून-जुलाई 2026 में NEET के मुद्दे पर सरकार ने राहुल गांधी या विपक्षी नेताओं से कोई बातचीत नहीं की थी। उसने CJP के नेताओं के साथ डील करके उनकी मांगें मान लीं, जबकि 20 जुलाई के ‘पुलिस एक्शन’ के बाद राहुल भी एक्टिव हो गए थे। अचानक पीएम आवास के बाहर धरने पर भी बैठे।
- इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी कहते हैं, ‘सरकार ने विपक्ष को महत्व नहीं दिया, ताकि विपक्ष इसे अपनी जीत की तरह न दिखा सके।
- वहीं SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर राहुल दो साल से एक्टिव हैं। इस मुद्दे पर 4 प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। इंडियन एक्सप्रेस अखबार की रिपोर्ट आने के बाद भी उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस करके सरकार पर तमाम आरोप लगाए। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर 26 नवंबर तक कई कार्यक्रम तय किए हैं।’
- रशीद किदवई भी कहते हैं, ‘फिलहाल ज्ञानेश कुमार को लेकर सरकार के खिलाफ देश में दो विपक्ष बन गए हैं- कांग्रेस सहित बाकी विपक्षी दल और कॉकरोच पार्टी के बैनर तले छात्र और आम लोग।’
- ‘हालांकि सरकार के लिए चुनौती कांग्रेस और राहुल गांधी बन सकते हैं, न कि कॉकरोच जनता पार्टी। ऐसा कहा जा सकता है कि CJP को महत्त्व देकर सरकार विपक्ष की राजनीतिक चुनौती को कम करना चाहती है।’
- हालांकि आदेश रावल उदाहरण देते हुए कहते हैं कि 2010 के अन्ना आंदोलन के समय बीजेपी विपक्ष में थी, और उसे आंदोलन से फायदा हुआ। इसी तरह इस बार कांग्रेस विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए उसे फायदा होगा।’

राहुल गांधी ने वीडियो जारी करके कहा है, ‘चाहे जितनी पुलिस बुला लें, गिरफ्तारियां कर लें, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।’
सवाल-3: CJP की पूरी लीडरशिप हिरासत में, क्या प्रदर्शन दब जाएगा? जवाब: दिल्ली पुलिस की सख्ती की वजह से शाम 5 बजे तक CJP के प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाए। CJP की लीडरशिप और सैकड़ों समर्थकों को हिरासत में लिए गए। आंदोलन में शामिल होने जा रहे तीन पूर्व सीएम- ममता बनर्जी, माणिक सरकार, पी. विजयन भी हिरासत में हैं।
रशीद किदवई कहते हैं कि पिछले आंदोलन और इसमें अंतर है। NEET का मुद्दा सीधे छात्रों से जुड़ा था, जबकि SIR राजनीतिक मुद्दा है। भले ही ये आम लोगों से जुड़ा है, लेकिन ये देखना होगा कि क्या आम लोग इससे जुड़ेंगे या नहीं। त्योहारों का भी माहौल है। आम लोग जुड़े, तो आंदोलन को दबाना मुश्किल हो सकता है। ये भी नहीं कहा जा सकता कि CJP के लीडर्स को हिरासत में लेने से प्रोटेस्ट खत्म हो जाएगा, क्योंकि सरकार प्रदर्शनकारियों को अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में नहीं रख सकती।’ CJP का कहना है कि अभिजीत दिपके की हिरासत के बाद आंदोलन को अजिंक्य शिंदे लीड करेंगे।
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दिल्ली पुलिस की सख्ती की वजह से शाम 5 बजे तक कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाए। पुलिस ने सीजेपी की लीडरशिप अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को सुबह ही एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया। पूरी खबर पढ़ें…
