राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 के घोषित परिणामों में जबलपुर के आर्यमन सोलंकी ने मध्य प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। उन्होंने 692 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 46 हासिल की है। इस उपलब्धि के साथ आर्यमन ने प्रदेश और शहर क
.
इस वर्ष नीट-यूजी परीक्षा में करीब 20 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 11.21 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं सफल हुए हैं। ऐसे कड़े मुकाबले में आर्यमन की ऑल इंडिया 46वीं रैंक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
पढ़ाई को कभी बोझ नहीं समझा
अपनी सफलता का श्रेय आर्यमन ने विषयों के प्रति रुचि और नियमित अध्ययन को दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पढ़ाई को कभी तनाव या बोझ नहीं माना।
आर्यमन ने कहा,
मैंने हमेशा उन्हीं विषयों और टॉपिक्स पर ज्यादा ध्यान दिया, जिन्हें पढ़ने में आनंद आता था। मैं रोजाना 4 से 5 घंटे सेल्फ स्टडी करता था और बाकी समय दोस्तों के साथ क्रिकेट व अन्य खेल भी खेलता था।

उन्होंने कहा कि जब रुचि के साथ पढ़ाई की जाती है तो कठिन से कठिन विषय भी आसान लगने लगते हैं। उनका मानना है कि पढ़ाई और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाए रखना भी सफलता का अहम मंत्र है।
परिवार से मिली मेडिकल क्षेत्र की प्रेरणा
आर्यमन का परिवार लंबे समय से चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उनके पिता डॉ. फरिंद्र सिंह सोलंकी शहर के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट हैं और जबलपुर के पहले अंगदान अभियान के मेडिकल दल का हिस्सा रह चुके हैं। उनकी मां डॉ. अनुपमा सोलंकी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायनाकोलॉजिस्ट) हैं, जबकि उनकी बहन भी मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं।
घर में बचपन से मिले चिकित्सकीय माहौल ने आर्यमन को भी डॉक्टर बनने और मरीजों की सेवा करने के लिए प्रेरित किया।
री-एग्जाम की चिंता से निकाला बाहर
आर्यमन के पिता डॉ. फरिंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि परीक्षा के दौरान री-एग्जाम को लेकर बेटा कुछ समय के लिए तनाव में आ गया था।
उन्होंने कहा,
मैंने उसे समझाया कि यदि री-एग्जाम होगा तो वह सभी छात्रों के लिए होगा। इसके बाद उसकी चिंता दूर हुई और उसने पूरी एकाग्रता के साथ अपनी तैयारी जारी रखी।

उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि आर्यमन अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़े, सफल हो और एक खुशहाल जीवन जिए।
