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फर्नीचर घोटाले में 10 आरोपी, 20,000 पन्नों का चालान पेश:ACB ने 10 साल बाद पूरी की जांच, विशेष न्यायालय अंबिकापुर में होगी सुनवाई




राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर ने सरगुजा में वर्ष 2016 में हुए फर्नीचर घोटाले में 20 हजार पन्नो का चालान पेश कर दिया है। फर्नीचर घोटाले में तत्कालीन डीएमसी सहित 10 को आरोपी बनाया गया है। ACB द्वारा विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), अम्बिकापुर में आज चालान प्रस्तुत किया है। चालान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(2) तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120-बी, 409 और 420 के अंतर्गत पेश किया गया है। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2010-11 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के लिए ₹2.70 करोड़ का आवंटन प्राप्त हुआ था। जिला कार्यालय, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अम्बिकापुर ने तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक के अनुमोदन से सीएसआईडीसी की दरों पर 10 फर्मों को क्रय आदेश दिया था। जांच में गड़बड़ी का हुआ था खुलासा फर्नीचर के सप्लायरों को ₹2,68,18,838 के चेक 28 मार्च 2011 को जिला मिशन संचालक और जिला परियोजना समन्वयक के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी किए गए। क्रय आदेशों में 20 दिनों के भीतर आपूर्ति की शर्त थी। फर्नीचर खरीदी में घोटाले की खबर पर तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर के आदेश पर तीन सदस्यीय समिति ने जांच की और प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। समिति ने पाया कि कलेक्टर ने भौतिक सत्यापन के बाद ही चेक देने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक एस.पी. पाण्डेय ने लेखापाल प्रवीण सिन्हा से चेक लेकर फर्नीचर की आपूर्ति से पहले ही सप्लायरों को चेक बांट दिया। फर्मों ने देयकों के साथ स्कूलवार आपूर्ति की सूची और प्रधान पाठकों की हस्ताक्षरयुक्त पावतियां नहीं दी थीं। भुगतान के बाद भी पावतियां प्राप्त नहीं हुईं। गुणवत्ता की जांच, क्रय समिति से भौतिक सत्यापन और फर्मों से अनुबंध नहीं कराए गए। राशि निकालने के बाद भी नहीं की सप्लाई विवेचना में सामने आया कि एस.पी. पाण्डेय ने 18 फरवरी 2011 को दर्शन फेब्रिकेटर, रायपुर के संचालक सुरेश कटारिया के नाम जारी क्रय आदेश उन्हें देने के बजाय आकृति प्रिंटिंग प्रेस,अम्बिकापुर के संचालक संजय पटेल को दिया। संजय पटेल ने ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, अम्बिकापुर में इसी नाम से खाता खोला और दो चेक से 6 लाख 25 हजार 255 रुपये और 22 लाख 91 हजार 909 जमा कर राशि आहरित की। आरोप है कि आदेशित फर्म के स्थान पर इस कथित फर्जी फर्म को भुगतान किया गया। पूछताछ में संजय पटेल ने बताया कि उसने ₹7 लाख कमीशन के रूप में एस.पी. पाण्डेय को दिए और शेष राशि से उसे फर्नीचर की आपूर्ति करने को कहा गया था। इसके बावजूद उसने किसी स्कूल में आपूर्ति नहीं की। इसी प्रकार, महारानी स्टील एण्ड अप्लायंस, रायपुर के संचालक प्रेमचन्द जैन को 11 लाख 44 हजार 349 का चेक दिया गया था। राशि आहरण के बाद भी फर्म ने फर्नीचर सप्लाई नहीं की। शेष आठ फर्मों ने आदेशित मात्रा से कम आपूर्ति की। अधिकारी सहित 10 को बनाया गया आरोपी जांच में कुल ₹67 लाख 48 हजार रुपये का गबन प्रमाणित हुआ है। एसीबी ने चालान में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय, दर्शन फेब्रिकेशन के संचालक संजय पटेल, अम्बिका अलमीरा एण्ड स्टील फेब्रिकेटर्स के संचालक अजय कुमार अग्रवाल, सेलेनो स्टील की संचालिका ममता अग्रवाल, महामाया फेब्रिकेटर्स के संचालक बिधी सिंह कटलारिया, सूर्या स्टील एण्ड वुडन इंडस्ट्रीज के संचालक राजकुमार बंसल, श्री सांई इंडस्ट्रीज के संचालक संदीप तिवारी, श्याम मेटल प्रोडक्ट्स के संचालक हितेश कुमार अग्रवाल, श्री श्याम इंडस्ट्रीज के संचालक रितेश कुमार अग्रवाल और पंकज फर्नीचर मार्ट के संचालक संजीव गुप्ता को आरोपी बनाया है। मामले में ACB ने 19 अगस्त को सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल को गिरफ्तार किया था।



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