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अगर मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो कोई भी चुनौती सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। इस बात को सच कर दिखाया है बलिया जिले के सीयर ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बांसपार बहोरवां निवासी 28 वर्षीय अस्मिता चौरसिया ने। बीसीए (BCA) और सीसीसी (CCC) की पढ़ाई करने के बाद अस्मिता ने नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। आज वह नोटबुक यानी कॉपी बनाने का काम कर रही हैं और अपने साथ चार अन्य लोगों को भी रोजगार देकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। पढ़ाई के बाद चुनी उद्यमिता की राह अस्मिता चौरसिया की शुरुआत से ही आत्मनिर्भर बनने और अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा थी। इसी सोच के साथ उन्होंने करीब दो वर्ष पहले कॉपी बनाने का काम शुरू किया। उनका मानना है कि खुद का व्यवसाय खड़ा करके न केवल अपनी आजीविका चलाई जा सकती है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। खुद संभालती हैं कारोबार की जिम्मेदारी अस्मिता अपने व्यवसाय के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। कॉपी बनाने के साथ-साथ वह खुद फील्ड में जाकर ऑर्डर लाने, ग्राहकों से संपर्क करने और भुगतान वसूलने जैसे काम भी संभालती हैं। कारोबार की हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी निभाकर वह अपनी मेहनत, लगन और उद्यमशीलता का परिचय दे रही हैं। खुद के साथ चार लोगों को भी दिया रोजगार अस्मिता की सफलता केवल अपना व्यवसाय खड़ा करने तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने कारोबार के जरिए चार अन्य लोगों को भी रोजगार दिया है। इससे उन लोगों को आजीविका चलाने में मदद मिल रही है। उनका यह प्रयास आत्मनिर्भरता के साथ रोजगार सृजन की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल है। दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा अस्मिता का कहना है कि उनके काम से प्रेरित होकर आसपास की अन्य महिलाएं भी जागरूक हो रही हैं। कुछ महिलाओं ने अपना व्यवसाय शुरू करने की दिशा में कदम भी बढ़ाए हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखना चाहिए। अवसर मिलने का इंतजार करने के बजाय उन्हें खुद अवसर पैदा करने की कोशिश करनी चाहिए। भविष्य में कुछ नया करने का सपना अस्मिता अपने इस सफर को अभी शुरुआत मानती हैं। भविष्य में वह नए व्यवसाय शुरू करने और अपने मौजूदा कारोबार का विस्तार करने की योजना बना रही हैं। उनका उद्देश्य केवल खुद सफल होना नहीं, बल्कि दूसरे लोगों को भी आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। अस्मिता चौरसिया की कहानी उन युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। उनकी सोच स्पष्ट है कि मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर खुद का कारोबार खड़ा किया जा सकता है। इससे न केवल आत्मनिर्भर बना जा सकता है, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के रास्ते खोले जा सकते हैं।
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बलिया की अस्मिता ने नोटबुक से खड़ा किया कारोबार:BCA कर नौकरी करने की बजाए खुद शुरू किया काम, 4 लोगों को भी दिया रोजगार
