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Air India Flight AI237 Pilot Drug Test; Investigation Report


4 अगस्त को थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रहा एअर इंडिया का फ्लाइट अचानक हवा में 300 फीट नीचे गिर गया। 137 पैसेंजर और 8 क्रू मेंबर्स में से 24 लोग घायल हो गए। शुरुआत में एअर इंडिया ने कहा- ‘टर्बुलेंस’ की वजह से ऐसा हुआ है। अब ड्रग टेस्ट से खुलासा हुआ ह

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क्या पायलट गांजा पीकर प्लेन उड़ा रहा था और क्या इसी के चलते हादसा हुआ; गांजे से शरीर पर क्या असर होता है, आज के एक्सप्लेनर में जानेंगे….

सवाल-1: एअर इंडिया की फ्लाइट 300 फीट नीचे गिरने का पूरा मामला क्या है?

जवाब: 4 अगस्त को एअर इंडिया की फ्लाइट AI237 ने थाईलैंड के फुकेट से सुबह करीब 8 बजकर 41 मिनट पर दिल्ली के लिए उड़ान भरी। इसके बाद का पूरा घटनाक्रम कुछ इस तरह है…

  • टेक ऑफ के करीब 2 घंटे बाद विमान ओडिशा के ऊपर 36,000 फीट की ऊंचाई पर था। इसी दौरान विमान अचानक तेजी से 300 फीट नीचे गिर गया।
  • एक यात्री ने दावा किया कि उड़ान भरने के करीब डेढ़ घंटे बाद तेज झटके लगने लगे थे। सुबह का समय था और नाश्ता बांटा जा चुका था, ज्यादातर लोग आराम कर रहे थे। अचानक प्लेन जोर से हिलने लगा और 2-3 मिनट तक पलटी खाता रहा।
  • क्रू मेंबर्स सहित कई लोग अपनी सीट से हवा में उछलकर इधर-उधर गिर गए। कई बच्चों और बुजुर्गों को रीढ़ और गर्दन में चोटें आईं। प्लेन के अंदर कई हिस्से डैमेज हो गए। कुल 24 लोग घायल हुए। 17 लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा।
  • हालांकि, पायलट ने स्थिति संभाली और फ्लाइट को दिल्ली एयरपोर्ट पर सुबह 11:07 बजे सुरक्षित उतार लिया।
  • 4 अगस्त को ही एअर इंडिया ने अपने बयान में कहा कि ये ‘संक्षिप्त घटना’ टर्बुलेंस के चलते हुई, जिससे थोड़ी देर के लिए प्लेन का एल्टीट्यूड, यानी ऊंचाई कम हो गई।
  • सिविल एविएशन मिनिस्टर के. राम मोहन नायडू ने भी बयान दिया, ‘टर्बुलेंस करीब 4 से 5 मिनट चला। प्लेन की एक घंटे की फ्लाइट बाकी थी। क्रू मेंबर्स ने घायल होने के बावजूद पैसेंजर्स की मदद की। वे अपनी ड्यूटी करते रहे, जब तक प्लेन सुरक्षित तरीके से लैंड नहीं हो गया। उन्होंने बहुत हिम्मत दिखाई।’
  • एविएशन मिनिस्ट्री ने इसे ‘गंभीर घटना’ की कैटेगरी में रखा और जांच एयरक्रॉफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो, यानी AAIB को सौंप दी। डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर को आगे की जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया।
दावा किया गया था कि प्लेन 3 मिनट तक पलटी खाता रहा, जिससे प्लेनर की छत में दरारें पड़ गईं।

दावा किया गया था कि प्लेन 3 मिनट तक पलटी खाता रहा, जिससे प्लेनर की छत में दरारें पड़ गईं।

सवाल-2: ये कैसे पता चला कि पायलट गांजे के नशे में थे?

जवाब: लैंडिंग के पहले और बाद में सामान्य तौर पर पायलट्स और क्रू के ब्रेथ एनालाइजर और एल्कोहल टेस्ट होते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लैंडिंग के बाद क्रू ने एअर इंडिया को घटना की रिपोर्ट दी। इसमें को-पायलट ने ग्राउंड कंट्रोल को कैप्टन के व्यवहार के बारे में बताया। इसीलिए लैंडिंग के बाद ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट के बजाय दोनों पायलट्स का ‘साइकोएक्टिव सब्सटेंस’ यानी ड्रग टेस्ट किया गया।

9 अगस्त को एविएशन मिनिस्ट्री ने कहा कि इस टेस्ट में प्लेन के कैप्टन का रिजल्ट ‘नॉन-नेगेटिव’ आया था, यानी उनके सैम्पल में ड्रग्स पाया गया। कई बार कुछ दवाओं वगैरह के चलते भी शुरुआती टेस्ट पॉजिटिव आ सकता है। इसलिए ड्रग्स की पुष्टि के लिए सैम्पल को दूसरे टेस्ट के लिए लैबोरेट्री भेज दिया गया।

11 अगस्त को आए इस टेस्ट के नतीजों में मरिजुआना, यानी गांजे की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों पायलट्स को ड्यूटी से हटा दिया गया।

11 अगस्त को एअर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री और DGCA के अधिकारियों से मीटिंग की थी।

11 अगस्त को एअर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री और DGCA के अधिकारियों से मीटिंग की थी।

सवाल-3: तो क्या वाकई पायलट के गांजा पीने के चलते हुआ हादसा?

जवाब: अभी साफ तौर पर ऐसा नहीं कहा जा सकता। हालांकि ये दावा किया जा रहा है कि कैप्टन नशे के चलते अपने कंट्रोल में नहीं थे…

  • टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया, ‘कैप्टन फ्लाइट के दौरान कई बार प्लेन के फ्लोर पर बैठ रहे थे और स्मोकिंग की कोशिश कर रहे थे। प्लेन से निकलने के दौरान भी वह अपने कंट्रोल में नहीं थे और ठीक से चल नहीं पा रहे थे।
  • ‘हादसे के समय कप्तान, अपनी सीट पर के बजाय को-पायलट की सीट के पीछे झुके हुए खड़े थे।’
  • फ्लाइट के एक यात्री ने बाद बताया कि वो और उनका भाई फ्लाइट में कैप्टन के साथ ही सबसे आखिर में चढ़े। यात्री के मुताबिक, ‘मैंने उनसे पूछा कि क्या हम लोग लेट हैं। उन्होंने बहुत देर में जवाब दिया। उनकी आंखें लाल थीं, वो नशे में लग रहे थे।’
  • यात्री ने आरोप लगाया, ‘घटना के समय वो कॉकपिट से बाहर आए और लोगों से रिकॉर्डिंग न करने को कहा। बोले- ‘बात का बतंगड़ बन जाएगा। उनको लोगों की चिंता नहीं थी। उनका मकसद दिल्ली में लैंड करना था, ताकि सवाल-जवाब न हों। उन्होंने कहा- हम लखनऊ के पास में हैं, लेकिन यहां अच्छी मेडिकल फैसिलिटी नहीं हैं, इसलिए हम दिल्ली ही लैंड करेंगे।’

हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि प्लेन में कुछ तकनीकी दिक्कतें आ गई थीं…

  • न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, प्लेन का हाइड्रोलिक सिस्टम 3 बार फेल हुआ। ऑटो पायलट मोड डिस्कनेक्ट हो गया था। को-पायलट ने मैनुअल तरीके से कंट्रोल संभाला। टर्बुलेंस के दौरान प्लेन के कुछ इंडिकेटर स्विच थोड़ी देर के लिए बंद हो गए थे।
  • एयरलाइन पायलट एसोसिएशन ऑफ इंडिया, ALPA के चीफ कैप्टन सैम थॉमस ने कहा, ‘कैप्टन ने प्लेन में तकनीकी दिक्कत देखी, तो तुरंत को-पायलट से प्लेन की नोज, यानी आगे का हिस्सा नीचे करने को कहा। ‘इससे प्लेन 300 मीटर नीचे आ गया। विमान स्थिर करने के लिए कभी-कभी इससे भी ज्यादा नीचे आना पड़ सकता है।’

सवाल-4: क्या गांजे से शरीर का कंट्रोल खत्म हो जाता है?

जवाब: गांजे को ‘वीड’ या ‘मैरुआना’ भी कहते हैं। ये कैनबिस पौधे के फूल को सुखाकर बनता है। गांजे में 150 तरीके के रासायनिक यौगिक होते हैं, जिन्हें कैनबिनॉइड्स कहते हैं। इनमें सबसे खास हैं- टेट्राहाइड्रोकैनबिनॉल यानी THC और कैनबिडियॉल यानी CBD।

THC शरीर में नशा पैदा करने के लिए जिम्मेदार है और CBD नशे को कम करता है।

गांजे का शरीर पर असर समझिए…

  • हमारा दिमाग न्यूरॉन्स के जरिए चीजों को देखता, सुनता और महसूस करता है। इन्हीं न्यूरॉन्स पर कैनबिनॉइड रिसेप्टर होते हैं। यानी ऐसी जगह, जहां कैनबिनॉइड जाकर चिपक जाते हैं।
  • आप कहेंगे कि हमारे शरीर में कैनबिनॉइड रिसेप्टर हैं, यानी हमारा ब्रेन ही चाहता है कि बाहर से नशे वाले कैनबिनॉइड आएं, लेकिन ऐसा नहीं है।
  • दरअसल, हमारे शरीर में भी कुछ कैनेबिनॉइड बनते हैं, जैसे- एनेंडेमाइड। ये नाम संस्कृत के ‘आनंद’ शब्द से बना है। कुछ लोगों को दौड़ने से जो आनंद आता है, उसके पीछे यही एनेंडेमाइड है।
  • गांजे का धुआं अंदर लेने पर उसमें मौजूद THC इसी एनेंडेमाइड की नकल करता है और खून के जरिए दिमाग में पहुंचता है।
  • दिमाग के जिन हिस्सों में कैनबिनॉइड रिसेप्टर की संख्या ज्यादा है, उन पर THC सबसे ज्यादा असर करता है।
  • दिमाग के 3 हिस्से- हिप्पोकैम्पस, सेरिबैलम और बेसल गैंग्लिया में कैनबिनॉइड रिसेप्टर सबसे ज्यादा हैं।
  • इसलिए ये शरीर के जिस हिस्से को कंट्रोल करते हैं, उनका काम सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।

अमेरिका के ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ड्रग एब्यूज’ (NIDA) के मुताबिक, करीब 30% लोगों में ‘मैरुआना यूज डिसऑर्डर’ यानी गांजे का नशा करने की लत लग सकती है। अगर 18 साल से कम उम्र से गांजा लिया जाए, तो लत लगने का खतरा 7 गुना ज्यादा हो सकता है।

सवाल-5: पायलट का पूरा प्रोटोकॉल क्या है, कहां चूक हुई होगी?

जवाब: फ्लाइट की शुरुआत से लेकर लैंडिंग के बाद पायलट्स के लिए कई रूल्स हैं…

  • पायलट्स और क्रू फ्लाइट से पहले ब्रेथ एनालाइजर और एल्कोहल टेस्ट देते हैं। अचानक कभी ड्रग टेस्ट भी हो सकता है। पहली बार टेस्ट में फेल होने पर सस्पेंड करने और दोबारा लाइसेंस रद्द करने का नियम है।
  • फ्लाइट के दौरान कॉकपिट में दो पायलट्स रहने जरूरी हैं। 10,000 फीट से नीचे यानी टेकऑफ और लैंडिंग के आसपास के क्रिटिकल फेज के दौरान पायलट-इन-कमांड, (PIC) यानी कैप्टन और को-पायलट दोनों को अपनी सीट पर होना और सीटबेल्ट पहने रहना जरूरी है।
  • दोनों में से एक पायलट ‘पायलट फ्लाइंग’, यानी फ्लाइट को कंट्रोल करने वाला और दूसरा ‘पायलट मॉनिटरिंग’ यानी कॉकपिट के इंस्ट्रूमेंट्स-कम्युनिकेशन देखता है। 1
  • क्रिटिकल फेज के दौरान कॉकपिट में सिर्फ उड़ान से जुड़ी जरूरी बातचीत की इजाजत है। खाना-पीना या कोई और डिस्ट्रैक्शन भी बैन है।
  • टर्बुलेंस या किसी असामान्य वाइब्रेशन का संकेत मिलते ही, तुरंत सीटबेल्ट साइन ऑन करना और कैप्टन का कंट्रोल संभालना जरूरी होता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने सोर्सेज के हवाले से कहा है कि बेसिक प्रोटोकॉल के उलट कैप्टन अपनी सीट के बजाय को-पायलट की सीट के पीछे खड़े थे।

पायलट्स के फोरम PPRuNe पर भी दावा किया गया है कि झटका लगने पर कैप्टन खुद कॉकपिट में उछले, फर्स्ट ऑफिसर ने संभालने की कोशिश की, सीटबेल्ट साइन ऑन किया और ‘आई हैव कंट्रोल्स’ कहकर कमान संभाली।

कई बार पायलट की गलती से कोई बटन दबने, लिवर या सिस्टम की फॉल्ट के चलते हादसा हो सकता है।

AAIB ने कहा है कि सभी तकनीकी, मेडिकल और ह्यूमन फैक्टर से जुड़े सबूतों के आधार पर जांच के बाद प्राइमरी रिपोर्ट जारी की जाएगी। उसके बाद ही साफ होगा कि घटना पायलट के गांजे के नशे में होने के चलते हुई या कोई और वजह थी।

सवाल-6: क्या पहले भी पायलट की गलती से ऐसी घटनाएं हुई हैं?

जवाब: हां, इसके दो उदाहरण देखिए…

1. कंट्रोल कॉलम पर गलती से दबाव पड़ा, प्लेन 7,000 फीट तक गिर गया

  • मई 2010 में दुबई से पुणे जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट में ऐसा ही हुआ था। को-पायलट ने अपनी सीट आगे की तरफ एडजस्ट की, जिससे गलती से उसका कंट्रोल कॉलम आगे दब गया।
  • इससे 37,000 फीट पर उड़ रहा प्लेन अचानक नीचे गिरने लगा। कैप्टन उस वक्त टॉयलेट ब्रेक पर थे और घबराए को-पायलट ने न तो दरवाजा खोला, न कंट्रोल संभाला। प्लेन कुल 6,000-7,000 फीट तक नीचे चला गया था।

2. एक साथ दो कमांड, पेल कंट्रोल से बाहर हुआ और

  • प्लेन के इंजन ऑटो-पायलट मोड पर काम करते रहते हैं। कई बार सिस्टम फेलियर या सेंसर की गड़बड़ी के चलते ऑटोपायलट मोड काम करना बंद कर देता है।
  • अगर ऊंचाई पर ऐसा अचानक हो और पायलट तुरंत मैन्युअली संभाल न पाएं, तो कुछ ही सेकंड में प्लेन सैकड़ों फीट नीचे आ सकता है।
  • फरवरी 2023 में तुर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट में कंट्रोल कॉलम पर एक ही समय को-पायलट ने ‘नोज डाउन’ और कैप्टन ने ‘नोज अप’ के कमांड दे दिए। इससे ऑटोपायलट मोड में प्लेन कंट्रोल से बाहर चला गया और एक मिनट में 8,000 फीट तक नीचे गिर गया।

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