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- Ashadh Gupt Navratri Bhadli Navmi Puja Vidhi Update, Gupt Navratri Puja Vidhi, Significance Of Gupt Navratri In Hindi
3 घंटे पहले
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भड़ली नवमी इस बार तिथियों की घटने-बढ़ने के कारण 22 और 23 जुलाई दोनों दिन रहेगी। इस तिथि पर आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भी खत्म होती है। 25 जुलाई को आने वाली देवशयनी एकादशी से पहले पड़ने वाली भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इसलिए इस दिन विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नया व्यापार या अन्य शुभ कार्य बिना मुहूर्त निकाले किए जा सकते हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित मनीष शर्मा के मुताबिक, भड़ली नवमी गुप्त नवरात्रि की अंतिम तिथि है। इस दिन भगवान गणेश, भगवान शिव और माता दुर्गा की विशेष आराधना का महत्व बताया गया है। साथ ही जरूरतमंद लोगों को धन, अन्न, वस्त्र, छाता, जूते-चप्पल जैसी उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए।
- भगवान गणेश की पूजा में सबसे पहले भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र और फूलों की माला पहनाकर चंदन का तिलक लगाएं। ॐ गं गणेशाय नमः मंत्र का जप करें। गणेश जी को दूर्वा के साथ लड्डू का भोग अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें।
- भगवान शिव की पूजा में तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल अर्पित करें। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें और फिर दोबारा जल चढ़ाएं। पंचामृत दूध, दही, घी, मिश्री और शहद से तैयार किया जाता है। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन लगाएं और बिल्व पत्र, फूल, धतूरा और आंकड़े के फूल अर्पित करें। दीपक जलाकर ॐ उमामहेश्वराय नमः मंत्र का रुद्राक्ष की माला से जप करें। शिव जी के साथ माता पार्वती की भी पूजा करें और उन्हें लाल चुनरी, लाल फूल अर्पित करें। देवी दुर्गा को माता पार्वती का ही स्वरूप माना जाता है।
- पति-पत्नी को इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा एक साथ करनी चाहिए। ऐसा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और वैवाहिक जीवन में प्रेम व सामंजस्य बढ़ता है।
- भड़ली नवमी पर माता दुर्गा की विशेष आराधना भी की जाती है। पूजा में माता को लाल चुनरी अर्पित करें। इसके बाद छोटी कन्याओं को सात्विक भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा व उपहार देकर सम्मानित करें। इस दिन कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।
- इस तिथि पर भगवान हनुमान के सामने दीपक जलाकर सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। इच्छानुसार ॐ रां रामाय नमः मंत्र का जप किया जा सकता है। शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करते हुए ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। बाल गोपाल को माखन-मिश्री और तुलसी अर्पित करें। किसी मंदिर में पूजा सामग्री का दान करें और संभव हो तो माता दुर्गा के किसी प्राचीन या प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन-पूजन करें।
गुप्त नवरात्रि में होती है महाविद्याओं की साधना
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में देवी सती के दस महाविद्या स्वरूपों की साधना की जाती है। यह साधना मुख्य रूप से तंत्र-मंत्र से जुड़े साधक करते हैं। इन दस महाविद्याओं में मां काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।
- दो ऋतुओं के संधिकाल में आती है नवरात्रि
नवरात्रि का पर्व ऋतुओं के परिवर्तन से भी जुड़ा माना जाता है। जब एक ऋतु समाप्त होती है और दूसरी शुरू होती है, उस समय को संधिकाल कहा जाता है। वर्ष में चार बार ऐसे संधिकाल में नवरात्रि आती है। आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि गर्मी और वर्षा ऋतु के बीच पड़ती है। इस दौरान पूजा-पाठ के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखने और संतुलित खान-पान अपनाने की भी सलाह दी जाती है।
- देवशयनी एकादशी से शुरू होता है चातुर्मास
भड़ली नवमी के दो दिन बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी रहेगी। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इस वर्ष तिथियों के घट-बढ़ के कारण देवउठनी एकादशी 20 और 21 नवंबर दोनों दिन रहेगी। भगवान विष्णु के विश्राम काल को चातुर्मास कहा जाता है। इस अवधि में विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। करीब चार महीने तक शुभ मुहूर्त नहीं रहते, इसलिए देवशयनी एकादशी से पहले आने वाली भड़ली नवमी पर पूजा, दान और धर्म-कर्म का विशेष महत्व माना जाता है।

