बीड़ (महाराष्ट्र)7 मिनट पहले
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परिवार का दावा है कि पैतृक वंश में करीब 200 साल से कोई बेटी पैदा नहीं हुई।
महाराष्ट्र के बीड़ जिले के परिवार ने दावा किया है कि उनके यहां 200 साल बाद बेटी का जन्म हुआ है। मंगलवार को बच्ची को सजे रथ में घर लाया गया। ढोल नगाड़ों से स्वागत हुआ। संगीत के बीच लोगों ने जश्न मनाया।
परली वैजनाथ की रहने वाली कल्पना दहिफले ने 27 अगस्त को स्थानीय अस्पताल में बेटी को जन्म दिया था। बेटी के जन्म से उनके पति ऋषिकेश और परिवार के लोग और रिश्तेदार काफी खुश हो गए।

कल्पना दहिफले (माला पहनी) ने 27 अगस्त को अस्पताल में बेटी को जन्म दिया।

स्वागत जुलूस में रिश्तेदार, पड़ोसी और शुभचिंतक भी शामिल हुए।
पैतृक वंश में बेटी नहीं
बच्ची के दादा लिम्बाजी दहिफले भगवान प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर हैं। उन्होंने कहा कि उनके सीधे पैतृक वंश में करीब 200 साल से कोई बेटी पैदा नहीं हुई थी। परिवार में कन्यारत्न के आने से दो सदी से चली आ रही यह कमी पूरी हुई है।
रंगोली, फूलों से की सजावट
कल्पना को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद दहिफले परिवार ने इस मौके को खास बनाने की तैयारी की। बच्ची को रोशनी से सजाए गए रथ में परिवार के इंदिरा नगर स्थित घर लाया गया।
इस स्वागत जुलूस में रिश्तेदार, पड़ोसी और शुभचिंतक शामिल हुए। रास्ते में लोग पारंपरिक ढोल की धुन पर नाचे और आतिशबाजी की।
घर पहुंचने पर बच्ची का प्रवेश द्वार पर पारंपरिक आरती से स्वागत किया गया। इस दौरान वहां रंगोली, फूलों की सजावट और गुब्बारे लगाए गए थे।
बेटियां आशीर्वाद होती हैं-लिम्बाजी
लिम्बाजी दहिफले ने कहा, बेटियां आशीर्वाद होती हैं, बोझ नहीं। बेटी का जन्म भी उतनी ही गरिमा, खुशी और उत्सव का हकदार है, जितना समाज आमतौर पर बेटों के जन्म पर मनाता है।
उन्होंने बताया कि इस मौके पर जलेबियां बांटकर खुशी मनाई गई।
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