मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए हजारों नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने सोमवार को भोपाल के नीलम पार्क में राज्य स्तरीय धरना प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि नर्सिंग शिक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और न्यायिक प्रक्रिया के कारण उनका भविष्य पिछले करीब छह साल
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प्रदर्शन में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए B.Sc. Nursing और GNM के छात्र शामिल हुए। छात्रों ने कहा कि कॉलेजों की मान्यता से जुड़ी प्रक्रिया और उसकी वैधता की जिम्मेदारी छात्रों की नहीं है। यदि किसी कॉलेज को गलत तरीके से मान्यता दी गई है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित शासन-प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की तय होनी चाहिए। छात्रों का कहना है कि इसकी सजा विद्यार्थियों को भुगतनी पड़ रही है।

सुबह से ही पहुंचे छात्र
लिखित आश्वासन मिलने तक प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी
इस दौरान मनोज रजक ने बताया कि सरकार से मांग की कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल ठोस निर्णय लिया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे केवल मौखिक आश्वासन नहीं चाहते, बल्कि मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही आंदोलन समाप्त करने पर विचार करेंगे। छात्रों का कहना है कि नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बावजूद वे परीक्षा, डिग्री और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में उलझे हुए हैं। इससे आगे की पढ़ाई, नौकरी और करियर पर सीधा असर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मामले में जल्द निर्णय लेकर हजारों विद्यार्थियों का भविष्य बचाने की मांग की।
छात्रों की प्रमुख मांगें
- नर्सिंग मामले की जल्द से जल्द स्पेशल बेंच के माध्यम से सुनवाई कराकर नर्सिंग छात्रों के हित में निर्णय लिया जाए।
- B.Sc. Nursing और GNM के सभी श्रेणियों के विद्यार्थियों की परीक्षाएं बिना विलंब एक साथ कराई जाएं। इसमें suitable, unsuitable और ग्वालियर क्षेत्र के 56 कॉलेजों के विद्यार्थी भी शामिल हैं।
- बैच 2020-21 के विद्यार्थियों को दिसंबर 2026 तक डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध कराया जाए।
- छात्रों की छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं का जल्द निराकरण किया जाए।
- नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और उससे जुड़ी अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय कर विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
तस्वीरों में देखें

नर्सिंग की छात्राएं।

हाथों में पोस्टर्स लेकर पहुंचे छात्र।

छात्रों ने सरकार से मांग की कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल ठोस निर्णय लिया जाए।
