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BNMU की पूर्व संविदाकर्मी ने आत्मदाह की दी चेतावनी:फिर से बहाली नहीं होने पर 17 जुलाई को करेगी आत्मदाह; राज्यपाल को लिखा पत्र




मधेपुरा स्थित बीएन मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) की एक पूर्व महिला संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर ने आत्मदाह की चेतावनी दी है। महिला का कहना है कि यदि उसे 16 जुलाई तक न्याय नहीं मिला, तो वह 17 जुलाई को विश्वविद्यालय परिसर या उसके आसपास आत्मदाह कर लेगी। उसने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित कई संवैधानिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों को त्राहिमाम-पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। महिला ने अपने आवेदन में विश्वविद्यालय के कुलपति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि कुलपति ने शोषण की नीयत से उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और शिकायत करने के बाद उसे संविदा सेवा से हटा दिया गया। कुलपति मानसिक-शारीरिक रूप से कर रहे थे प्रताड़ित महिला ने यह भी दावा किया है कि वह अत्यंत पिछड़ा वर्ग से आने वाली आर्थिक रूप से कमजोर युवती है। महिला के अनुसार, पिछले दो साल से उसे कुलपति और उनके निजी सहायक द्वारा मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उसने बताया कि जब उसने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, पुलिस महानिदेशक, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों सहित विभिन्न स्तरों पर शिकायतें कीं, तो उसे बिना किसी ठोस कारण के संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर के पद से हटा दिया गया। आवेदन में महिला ने उल्लेख किया है कि अप्रैल से जून 2026 के बीच उसने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें भेजीं। हालांकि, अब तक किसी भी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। महिला का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम से उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भी गहरा आघात पहुंचा है। सेवा समाप्ति का आदेश वापस लेने की मांग की महिला ने अपनी सेवा समाप्ति का आदेश तत्काल वापस लेने, उसे पूर्व प्रभाव से पुनर्बहाल करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उसने दोहराया है कि यदि 16 जुलाई तक न्याय नहीं मिला, तो वह 17 जुलाई को आत्मदाह जैसा कदम उठाने को विवश होगी। इस बीच, पूर्व महिला संविदाकर्मी द्वारा 17 जुलाई को संभावित राज्यपाल दौरे के दौरान आत्मदाह की घोषणा के बाद एआईएसएफ के पूर्व बीएनएमयू प्रभारी डॉ. हर्षवर्धन सिंह राठौर ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।



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