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Cabinet Decision on Vijay Shah Prosecution


बृजेन्द्र मिश्रा। भोपाल26 मिनट पहले

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मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के महू में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। - Dainik Bhaskar

मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के महू में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।

मध्य प्रदेश सरकार कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान के मामले में मंत्री विजय शाह पर केस चलाने की अनुमति नहीं देगी। सूत्रों के मुताबिक, ये फैसला मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया है। इस मुद्दे पर चर्चा के समय खुद मंत्री शाह भी बैठक में मौजूद थे।

कैबिनेट की बैठक में अभियोजन स्वीकृति नहीं दिए जाने के पीछे यह तर्क दिया गया कि शाह इस बयान पर कई बार सार्वजनिक माफी मांग चुके हैं। हालांकि, सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। इसके उलट बैठक की ब्रीफिंग देते वक्त मंत्री राकेश सिंह ने इस मामले में चर्चा का कोई एजेंडा होने से ही इनकार कर दिया।

इसी मामले में 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय है। इससे पहले राज्य सरकार अपना रुख एफिडेविट के जरिए कोर्ट के सामने रखेगी।

मंगलवार को जब मंत्री विजय शाह के मामले में कैबिनेट बैठक में चर्चा शुरू हुई तो सभी अधिकारियों को बाहर जाने के लिए कहा गया। इसके बाद मुख्यमंत्री, मंत्रियों के अलावा मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला और विधि विभाग के सचिव की मौजूदगी में इस विषय पर चर्चा कर निर्णय लिया गया।

मंत्रिमंडल की बैठक से पहले वंदे मातरम गायन किया गया।

मंत्रिमंडल की बैठक से पहले वंदे मातरम गायन किया गया।

SIT ने केस चलाने की अनुमति मांगी थी

मंत्री विजय शाह के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी का मामला लंबे समय से लटका है। जांच के लिए बनाई गई एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a) के तहत केस चलाने की अनुमति मांगी है।

19 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया था कि एसआईटी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दे चुकी है, लेकिन केस चलाने की मंजूरी का मामला राज्य सरकार के पास लंबित है। कोर्ट ने सरकार को फैसला लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। कोर्ट ने विजय शाह की माफी पर कहा था- माफी मांगने में काफी देर हो चुकी है।

मई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को पुराने निर्देशों का पालन करने और चार सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा था। इसके बावजूद 23 जुलाई की सुप्रीम कोर्ट की ऑफिस रिपोर्ट में सामने आया कि सरकार की तरफ से अब तक कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया गया था। अब 31 अगस्त की सुनवाई से पहले एफिडेविट के जरिए सरकार अपना रुख स्पष्ट करेगी।

मंत्री शाह ने महू में दिया था बयान

जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उन्होंने कहा था-

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“उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।”

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इसके बाद शाह ने कहा था- अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।

राज्य सरकार के सामने अब क्या विकल्प हैं

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यदि सरकार अभियोजन की स्वीकृति देती है तो इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को एफिडेविट के जरिए दी जा सकती है। इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

हालांकि, अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने पर भी मामला खत्म नहीं होगा। शाह के मंत्री पद से हटने के बाद एसआईटी उनके खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ा सकती है और उस स्थिति में सरकार की पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं होगी।

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कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अभियोजन स्वीकृति देने में हो रही देरी पर मध्य प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कड़े शब्दों में कहा- “Enough is enough (बस बहुत हुआ), अब हमारे आदेश का पालन कीजिए।” पढे़ं पूरी खबर…

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