Headlines

Canada PGWP Controversy | Minister Ravjot Singh Meets S Jaishankar


कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के बाद पंजाबी स्टूडेंटेस के आंदोलन को पंजाब के कैबिनेट मंत्री डॉक्टर रवजोत सिंह का समर्थन मिला है। मंत्री ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को ईमेल भेजकर उनसे मिलने के लिए समय मांगा है। बता

.

विदेश मंत्री को लिखे अपने पत्र में उन्होंने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इससे कई प्रभावित परिवार चिंतित हैं। उन्होंने विदेश मंत्री से जल्द से जल्द मुलाकात का समय देने का अनुरोध किया है ताकि इस स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सके और प्रभावित युवाओं तथा परिवारों के हित में उचित कार्रवाई के कदम उठाए जा सकें।

छात्र प्रदर्शन क्यों कर रहे? 5 पॉइंट में समझिए

1. पढ़ाई पूरी की, फिर भी PGWP से इनकार एक छात्रा ने बताया कि वह 10 जुलाई 2024 को पहली बार कनाडा पहुंची थी। उसने पढ़ाई पूरी की और किसी भी सब्जेक्ट में फेल नहीं हुई। कॉलेज ने कहा था कि 15 मई 2024 से पहले रजिस्ट्रेशन कराने वाले छात्र पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के पात्र होंगे।

इसके बावजूद 16 जुलाई 2026 को उसका आवेदन खारिज कर दिया गया। रिजेक्शन में कारण बताया गया कि उसकी कनाडा में एंट्री 23 नवंबर 2025 की दर्ज है। छात्रा का कहना है कि उसके साथ पढ़ने वाली अन्य छात्राओं को वर्क परमिट मिल गया, लेकिन उसका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया।

2. IRCC के रिजेक्शन लेटर से बढ़ी परेशानी छात्रों का कहना है कि उन्होंने इसी भरोसे के साथ इन कार्यक्रमों में दाखिला लिया था कि पढ़ाई पूरी होने के बाद वे पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट के पात्र होंगे। हालांकि बाद में कई छात्रों को इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) की ओर से रिजेक्शन लेटर मिले। इसके बाद वे पढ़ाई पूरी करने के बावजूद कनाडा में काम करने के अधिकार से वंचित हो गए।

3. डिप्रेशन में छात्र, 250 फाइलें दो दिन में रिजेक्ट अचानक PGWP रिजेक्ट होने से कई छात्र मानसिक तनाव में हैं। उनका कहना है कि परिवार ने कर्ज लेकर उन्हें कनाडा भेजा था। अब न नौकरी मिल रही है और न भविष्य साफ दिखाई दे रहा है। छात्रों के मुताबिक, अल्बर्टा के कैलगरी स्थित पोर्टेज कॉलेज के करीब 250 छात्रों की वर्क परमिट फाइलें केवल दो दिनों में खारिज कर दी गईं। उनका दावा है कि प्रभावित छात्रों की संख्या बढ़कर 2000 तक पहुंच सकती है।

4. 20 लाख रुपए खर्च किए, फिर भी हाथ खाली पीड़ित छात्रों और इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि 15 मई 2024 से पहले दाखिला लेने वाले छात्रों को नियमों के अनुसार वर्क परमिट मिलना चाहिए था। छात्रों ने बताया कि उन्होंने करीब 32 हजार कनाडाई डॉलर (करीब 20 लाख रुपए) फीस देकर पढ़ाई पूरी की।

उनके साथ पढ़ने वाले कई छात्रों को तीन-तीन साल के वर्क परमिट मिल गए, लेकिन 7 जुलाई 2024 के बाद उनकी फाइलें यह कहकर खारिज की जाने लगीं कि संबंधित कोर्स नॉन-क्रेडिबल है। छात्र सवाल उठा रहे हैं कि जब दाखिले के समय यही कोर्स मान्य था तो अब अचानक नियम बदलकर उन्हें वर्क परमिट से क्यों वंचित किया जा रहा है।

5. न हेल्थ कार्ड, न काम करने का अधिकार छात्रों का कहना है कि वर्क परमिट रिजेक्ट होते ही उनका कानूनी स्टेटस खत्म हो गया। पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके हेल्थ कार्ड भी रद्द हो चुके हैं। कई छात्र गंभीर बीमारियों के बावजूद डॉक्टर के पास नहीं जा पा रहे हैं। ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि खत्म होने से पहचान संबंधी दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। रिजेक्शन के बाद कई छात्र डर और तनाव में हैं। कुछ अपने माता-पिता को पूरी जानकारी नहीं दे पा रहे, जबकि कई घरों और हॉस्टल के कमरों से बाहर निकलने तक से बच रहे हैं।

डॉ. रवजोत ने लेटर में ये लिखा-

आदरणीय डॉ. जयशंकर जी, आशा है कि आप सकुशल होंगे। मैं कनाडा की वर्क परमिट नीतियों में हाल ही में हुए बदलावों से उत्पन्न चिंताओं पर चर्चा करने के लिए आपकी सुविधानुसार जल्द से जल्द आपसे मिलने का समय चाहता हूँ। इन बदलावों का भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से पंजाब के युवाओं पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। मामले की गंभीरता और प्रभावित परिवारों द्वारा व्यक्त की जा रही चिंताओं को देखते हुए, मेरा मानना है कि स्थिति को समझने और उचित कार्रवाई के विकल्पों की तलाश करने के लिए आपके साथ एक संक्षिप्त चर्चा बहुत मूल्यवान होगी। यदि आप अपनी सुविधानुसार बैठक के लिए कुछ मिनट निकाल सकें तो मैं आपका अत्यंत आभारी रहूंगा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *