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Chandigarh AMRUT Scheme Sewer Pipeline Scam



नगर निगम चंडीगढ़ में अमृत (AMRUT) योजना के तहत सीवरलाइन पंप योजना-1 में हुए काम को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्ड में 598 मीटर सीवर पाइपलाइन बिछाने का दावा करते हुए पूरा भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर जांच में करीब 380

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मामले को गंभीरता से लेते हुए चीफ इंजीनियर कार्यालय ने संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच के निर्देश दिए गए हैं।

3 दिन में देनी होगी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट

चीफ इंजीनियर ने संबंधित एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) को व्यक्तिगत रूप से जांच की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें तीन दिन के भीतर चीफ इंजीनियर कार्यालय में फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट पेश करनी होगी।

जांच टीम मौके पर जाकर वास्तविक रूप से बिछाई गई पाइपलाइन की लंबाई की दोबारा माप करेगी। इसके साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि रिकॉर्ड में 598 मीटर काम दिखाकर 380 मीटर के काम का ही भुगतान तो नहीं किया गया।

ठेकेदार के साथ निगम अधिकारियों की भूमिका भी जांच में

मामले में अब सिर्फ ठेकेदार की भूमिका ही नहीं, बल्कि निगम के उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी, जो इस काम से जुड़े रहे हैं। टेंडर जारी करने, साइट का निरीक्षण करने, मेजरमेंट बुक (MB) में काम की एंट्री करने, बिल प्रमाणित करने और भुगतान मंजूर करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी।

JE से लेकर संबंधित वरिष्ठ अभियंताओं तक की कार्यप्रणाली को जांच के दायरे में रखा जाएगा। अगर जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या ठेकेदार के साथ मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

MB, एस्टीमेट और बिल का होगा मिलान

जांच में मेजरमेंट बुक, स्वीकृत एस्टीमेट और जारी किए गए बिलों का मौके पर हुए वास्तविक काम से मिलान किया जाएगा। पाइपलाइन की लंबाई और भुगतान की गई राशि का मदवार हिसाब भी जांचा जाएगा।

इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि कहीं बिना प्रशासनिक या तकनीकी मंजूरी के अतिरिक्त काम तो नहीं दिखाया गया। यदि स्वीकृत काम से अधिक काम कागजों में दर्ज कर भुगतान लिया गया है या रिकॉर्ड में गलत माप दर्ज की गई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल तीन दिन में आने वाली फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि कागजों में दर्ज 598 मीटर और मौके पर मिली 380 मीटर पाइपलाइन के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे सामने आया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।



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