बिलासपुर26 मिनट पहले
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राज्यपाल के खिलाफ अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी करने पर दर्ज एफआईआर को दी थी चुनौती।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणी की थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने दोनों को शर्तों के साथ राहत दी है।
हाईकोर्ट ने दोनों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, फेसबुक अकाउंट पर प्रमुखता से माफी प्रकाशित करने और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री स्थायी रूप से हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही भविष्य में इस तरह का आचरण दोबारा नहीं करने के लिए शपथपत्र देने को कहा है।

राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अशोभनीय टिप्पणी की गई थी।
असमिया भाषा में पोस्ट और कार्टून किया था पोस्ट
दरअसल, प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी ने अपने-अपने फेसबुक अकाउंट से असमिया भाषा में राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अपमानजनक लेख पोस्ट किए थे। इसके साथ ही कार्टून बनाकर भी वायरल किया था।
जिसकी शिकायत के बाद राजभवन की ओर से राजधानी के सिविल लाइंस थाने में दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। बाद में मामला रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा।
FIR रद्द कराने हाईकोर्ट में लगाई याचिका
एफआईआर को निरस्त कराने के लिए दोनों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान 14 अगस्त 2026 को याचिकाकर्ताओं की ओर से बिना शर्त माफी मांगने और आपत्तिजनक सामग्री को स्थायी रूप से हटाने की इच्छा जताई गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मनोज गोयल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं का कृत्य क्षम्य नहीं है।
19 अगस्त को शपथ पत्र देकर मांगी माफी
इसके बाद 19 अगस्त 2026 को दोनों याचिकाकर्ताओं ने दोबारा माफी मांगते हुए हाईकोर्ट में शपथ पत्र पेश किया। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ समझौते पर सहमति व्यक्त की। सुनवाई के दौरान यह तर्क भी रखा गया कि राज्यपाल छत्तीसगढ़ के प्रथम नागरिक और संवैधानिक पद पर हैं।
उनके पद की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने या उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य, घृणा और शत्रुता की भावना पैदा कर सकता है। इससे दोनों राज्यों के बीच लोक शांति प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई।

शर्तों के पालन पर मामले में आगे की राहत
हाईकोर्ट के आदेश का मूल आधार याचिकाकर्ताओं की ओर से माफी और आपत्तिजनक सामग्री हटाने की सहमति रही। कोर्ट ने स्पष्ट शर्तों के साथ दोनों को राहत दी है। अब दोनों को सार्वजनिक और न्यायालय के सामने माफी के साथ सोशल मीडिया से आपत्तिजनक सामग्री पूरी तरह हटानी होगी और भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति नहीं करने का वचन निभाना होगा।
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