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देशभर में वास्तुकला शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट अकादमिक कार्यों को पहचान देने वाले काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार 2026 की राष्ट्रीय जूरी गुरुवार को मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर में शुरू हुई। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय आयोजन में दे
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काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर की ओर से मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम 8 और 9 अक्टूबर को होगा। राष्ट्रीय जूरी तक पहुंचे विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट्स का चयन कॉलेज स्तर से शुरू हुई बहु-स्तरीय प्रक्रिया के बाद किया गया है। संस्थान स्तर पर चयन के बाद प्रोजेक्ट्स का जोनल स्तर पर मूल्यांकन हुआ और इसके बाद देशभर से श्रेष्ठ कार्यों को राष्ट्रीय जूरी के लिए चुना गया।
युवा आर्किटेक्ट्स को राष्ट्रीय मंच देने की पहल
काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर की अध्यक्ष प्रो. (आर्क.) किरण एस. महाजनी ने कहा कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार का उद्देश्य उभरते आर्किटेक्ट्स की प्रतिभा को पहचान देना और वास्तुकला शिक्षा में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपना अकादमिक काम प्रस्तुत करने के साथ देश के प्रमुख आर्किटेक्ट्स और शिक्षाविदों से संवाद का अवसर देता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जूरी में देशभर से चयनित आर्किटेक्चरल थीसिस और आर्किटेक्चरल हेरिटेज डॉक्यूमेंटेशन प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन किया जा रहा है। विद्यार्थियों को अलग-अलग संस्थानों में हो रहे उत्कृष्ट वास्तुकला कार्यों को देखने और उनसे सीखने का भी अवसर मिलता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर्किटेक्ट नवीन कानिथी, उपाध्यक्ष, सीओए; दीपक कुमार, रजिस्ट्रार-सचिव, सीओए; प्रो. (आर्क.) जयश्री देशपांडे, निदेशक, सीओए-टीआरसी; प्रो. (डॉ.) पूजा ललित कुमार, निदेशक, स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन, मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर और प्रो. (डॉ.) मधुरा यादव, डीन, स्टूडेंट वेलफेयर, एमयूजे मौजूद रहे।
राष्ट्रीय जूरी की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए प्रो. (आर्क.) जयश्री देशपांडे ने बताया कि पुरस्कारों के लिए चयन प्रक्रिया कई चरणों में होती है। सबसे पहले कॉलेज स्तर पर विद्यार्थियों के उत्कृष्ट कार्यों की पहचान की जाती है। इसके बाद जोनल स्तर पर विशेषज्ञों द्वारा उनका मूल्यांकन किया जाता है और चयनित प्रोजेक्ट्स राष्ट्रीय जूरी तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से विद्यार्थियों को अपने अकादमिक कार्य की तुलना देशभर के विभिन्न संस्थानों के उत्कृष्ट प्रोजेक्ट्स से करने का अवसर मिलता है। राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञ जूरी विद्यार्थियों की रचनात्मकता, शोध, डिजाइन और दस्तावेजीकरण के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मूल्यांकन कर रही है।
सीओए के राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार 2026 में वास्तुकला शिक्षा से जुड़ी तीन प्रमुख श्रेणियां शामिल हैं। आर्किटेक्चरल थीसिस में उत्कृष्टता पुरस्कार (एईएटी) के तहत स्नातक स्तर की उत्कृष्ट आर्किटेक्चरल थीसिस को सम्मानित किया जाएगा। वास्तुकला विरासत के दस्तावेजीकरण में विद्यार्थियों के उत्कृष्टता पुरस्कार (डीएएच) के माध्यम से भारत की वास्तुकला विरासत के उत्कृष्ट दस्तावेजीकरण और उसकी व्याख्या करने वाले कार्यों को पहचान दी जाएगी। वहीं वास्तुकला में स्नातकोत्तर थीसिस में उत्कृष्टता पुरस्कार (पीजीटीए) के तहत वास्तुकला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्नातकोत्तर शोध और अकादमिक अनुसंधान को सम्मानित किया जाएगा। इन श्रेणियों के लिए देशभर से चयनित प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन राष्ट्रीय स्तर पर गठित विशेषज्ञ जूरी कर रही है।
