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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने सोमवार को अररिया में शिक्षा के निजीकरण और अन्य जनसरोकार से जुड़ी मांगों को लेकर विशाल प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन शहर के बस स्टैंड से शुरू होकर चांदनी चौक होते हुए समाहरणालय परिसर तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई। समाहरणालय पहुंचने पर, CPI के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित 15 सूत्री मांगपत्र जिला पदाधिकारी को सौंपा। पार्टी नेताओं ने कहा कि देश में शिक्षा का बढ़ता निजीकरण गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को निजीकरण से मुक्त कर सभी के लिए समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। मांगपत्र में नई शिक्षा नीति की समीक्षा, सभी वर्गों के लिए समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने, व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने और गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों के बच्चों, दलित, आदिवासी तथा अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की मांगें प्रमुख थीं। आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पत्र में पार्टी ने मांगपत्र में आम जनता से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को भी शामिल किया। नेताओं ने जोर दिया कि सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में जनहित को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता बैनर और तख्तियां लेकर शामिल हुए। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने आवश्यक इंतजाम किए थे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और जिला प्रशासन को मांगपत्र सौंपने के बाद कार्यक्रम का समापन किया गया।
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CPI ने शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया:अररिया में राष्ट्रपति के नाम 15 सूत्री मांगपत्र सौंपा
