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DU ने रोका शरणार्थी स्टूडेंट का एडमिशन:हाईकोर्ट ने कहा- जो देश छोड़ भागा, वो पासपोर्ट कहां से लाएगा




दिल्ली हाईकोर्ट ने म्यांमार के एक शरणार्थी छात्र को पासपोर्ट न होने के कारण दाखिला न देने पर दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) की कड़ी खिंचाई की है। जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने डीयू की एडमिशन पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए कहा, “कोई शरणार्थी पासपोर्ट कहां से लाएगा?” कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। यह याचिका म्यांमार के शरणार्थी छात्र हेनरी ह्ट्टू आंग ली ने दायर की है, जिसे संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचआरसी) की ओर से आधिकारिक तौर पर शरणार्थी के रूप में मान्यता मिल चुकी है। सताए लोगों से पासपोर्ट मांगना भेदभावपूर्ण सुनवाई के दौरान हेनरी के वकील अशोक अग्रवाल ने दलील दी कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की विदेशी छात्रों को दाखिला देने की नीति भेदभावपूर्ण है, क्योंकि इसमें शरणार्थियों को विदेशी छात्रों के रूप में अलग से राहत नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि जो शरणार्थी अपने देश में प्रताड़ना और जान के खतरे के बाद भागकर आए हैं, उन्हें वहां की सरकार से पासपोर्ट मिलना मुमकिन नहीं है। याचिका में मांग की गई है कि डीयू विदेशी छात्र श्रेणी में शरणार्थियों से पासपोर्ट मांगने की शर्त को हटाए या याचिकाकर्ता को इससे छूट दे। केस बैकग्राउंड: भारत में ही की स्कूल की पढ़ाई हिंसा के कारण भारत आया परिवार: याचिका के मुताबिक, हेनरी और उसका परिवार म्यांमार में राजनीतिक उथल-पुथल, हिंसा और उत्पीड़न के कारण भारत भाग आया था। वे यहां UNHCR की सुरक्षा में रह रहे हैं। यूएनएचआरसी कार्ड को मानने से डीयू का इनकार: हेनरी ने अपनी स्कूली शिक्षा भारत में ही पूरी की है। उसने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विदेशी छात्र कोटे के तहत डीयू में आवेदन किया था। हालांकि, डीयू ने पासपोर्ट न होने के कारण उसके आवेदन को अधूरा घोषित कर दिया। हेनरी ने आग्रह किया था कि उसके UNHCR शरणार्थी दस्तावेज को ही पासपोर्ट के रूप में स्वीकार किया जाए, लेकिन डीयू से राहत न मिलने पर उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।



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