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16 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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फर्ज कीजिए, रात के 11 बजे हैं। आप बिस्तर पर लेटे हैं, लेकिन नींद नहीं आ रही। ऐसे में आप ईयरबड्स, ईयरफोन, नेकबैंड या हेडफोन लगाते हैं, पसंदीदा गाने या पॉडकास्ट चलाते हैं और कुछ ही देर में सो जाते हैं। अगले दिन भी यही होता है। फिर धीरे-धीरे यह आपकी रोज की आदत बन जाती है। अब हालत यह है कि ईयरबड्स के बिना नींद ही नहीं आती।
सुनने में यह आदत आरामदायक लग सकती है। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पूरी रात ईयरफोन लगाए रखने से कानों से जुड़ी कई प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। इसके अलावा कुछ लोगों में यह आदत नींद की नेचुरल प्रोसेस को भी प्रभावित कर सकती है।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में ईयरबड्स लगाकर सोने के नुकसान पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- क्या ईयरफोन लगाकर सोने से नींद जल्दी आती है?
- ईयरफोन के बिना सोने की आदत कैसे डालें?
एक्सपर्ट- डॉ. दीपांशु गुरनानी, सीनियर कंसल्टेंट- ENT, हेड एंड नेक सर्जरी, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर
सवाल- लोग ईयरबड्स लगाकर क्यों सोते हैं?
जवाब- लोग आमतौर पर इन वजहों से ईयरबड्स लगाकर सोते हैं-
- पॉडकास्ट या म्यूजिक सुनने के लिए।
- आसपास के शोर को कम करने के लिए।
- रिलैक्स होने और तनाव कम करने के लिए।
- खर्राटों की आवाज से बचने के लिए।
- जल्दी नींद के लिए।
- यात्रा के दौरान आराम से सोने के लिए।
- ईयरबड्स के बिना नींद न आने की आदत के कारण।
सवाल- क्या ईयरबड्स लगाकर सोने से नींद जल्दी आती है?
जवाब- कुछ लोगों को धीमा और सुकून देने वाला ऑडियो सुनने से रिलैक्स होने और नींद आने में मदद मिल सकती है। लेकिन हर व्यक्ति को इससे जल्दी नींद आए, ऐसा जरूरी नहीं है।
सवाल- ईयरबड्स लगाकर सोने से ब्रेन पर क्या असर होता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- तेज आवाज या बार-बार बदलता ऑडियो नींद के दौरान ब्रेन को स्टिमुलेट कर सकता है और नींद टूट सकती है।
- इससे ब्रेन पूरी तरह रेस्ट मोड में नहीं जा पाता है।
- लगातार ऑडियो से नींद के सामान्य पैटर्न में खलल पड़ता है और स्लीप क्वालिटी प्रभावित होती है।
- इससे अगले दिन थकान, फोकस की कमी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।
सवाल- ईयरबड्स लगाकर सोने के संभावित नुकसान क्या हैं?
जवाब- कभी-कभार धीमी आवाज में थोड़ी देर तक सुनने से आमतौर पर रिस्क नहीं होता। लेकिन रात भर ईयरबड्स लगाकर सोने से कान से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए-

अब इन पॉइंट्स को विस्तार से समझिए-
1. कान पर लगातार प्रेशर
- रातभर ईयरबड्स लगे रहने से कान पर लगातार प्रेशर पड़ता है।
- करवट लेकर सोने पर ईयरबड्स कान और तकिए के बीच दब सकते हैं। इससे दर्द हो सकता है।
2. वैक्स जमा होना
- बड्स कान में लगे रहने से ईयरवैक्स अंदर जा सकता है।
- इससे कान बंद लगना, दर्द, घंटी जैसी आवाज या अस्थायी रूप से सुनने की क्षमता कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
3. इन्फेक्शन
- ईयरबड्स ईयर केनाल (कान की नली) को ढककर रखते हैं।
- इससे कान के अंदर एयर फ्लो कम हो सकता है और नमी फंस सकती है।
- इसके कारण इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ता है।
4. खुजली
- लंबे समय तक ईयरबड्स लगाने से कान की स्किन में नमी और घर्षण बढ़ सकता है।
- इससे जलन या खुजली हो सकती है।
5. दर्द और जलन
- सोते समय ईयरबड्स कान के अंदर लगातार दबाव बनाए रखते हैं।
- करवट लेकर सोने पर यह दबाव बढ़ जाता है। इससे कान में दर्द और जलन हो सकती है।
6. सुनने की क्षमता पर असर
- तेज आवाज में लंबे समय तक ऑडियो सुनने से कान की सेंसिटिव सेल्स को नुकसान पहुंचता है।
- लंबे समय तक तेज आवाज से सुनने की क्षमता को नुकसान हो सकता है।
7. खराब स्लीप क्वालिटी
- लगातार बजता ऑडियो नींद के दौरान भी ब्रेन को बिजी रखता है। इससे स्लीप क्वालिटी प्रभावित होती है।
- खासकर तेज या बार-बार बदलने वाली आवाजें नींद को बाधित कर सकती हैं।

सवाल- कैसे जानें कि ईयरबड्स कानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं?
जवाब- कुछ असामान्य लक्षण कानों को नुकसान पहुंचने के संकेत हो सकते हैं, जैसेकि-
- म्यूजिक सुनने के लिए पहले से ज्यादा वॉल्यूम बढ़ाने की जरूरत पड़ना।
- आसपास की आवाजें कम सुनाई देना।
- बिना ईयरबड्स के भी कानों में आवाजें महसूस होना।
- कान में दर्द, खुजली और जलन होना।
- कान से पानी/फ्लूइड निकलना।
- कान बंद या भरा हुआ महसूस होना।
- कानों में घंटी या सीटी जैसी आवाज आना।
- ईयरबड्स लगाने पर असहजता या दर्द होना।
- ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
सवाल- ईयरबड्स लगाकर सोना किन लोगों के लिए ज्यादा रिस्की है?
जवाब- तेज आवाज में देर तक ईयरबड्स लगाकर साउंड सुनना हर किसी के लिए रिस्की है। लेकिन कुछ लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- कानों के लिए कितनी आवाज सुरक्षित मानी जाती है?
जवाब- ‘हियरिंग हेल्थ फाउंडेशन’ के मुताबिक, 70 डेसिबल (dB) या उससे कम की आवाज आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती है।
ईयरबड्स में आवाज अधिकतम वॉल्यूम की 50-60% तक रखना बेहतर है। यानी आवाज इतनी हो कि आसपास का व्यक्ति सामान्य आवाज में बात करे, तो उसकी आवाज आपको सुनाई देती रहे।
सवाल- अगर ईयरबड्स लगाकर सोने की आदत है, तो नुकसान से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतें?
जवाब- कानों की सुरक्षा के लिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ध्यान रखें-

सवाल- ईयरबड्स के बिना सोने की आदत कैसे डालें?
जवाब- अगर ईयरबड्स के बिना नींद नहीं आती, तो धीरे-धीरे इसकी आदत बदलें। ग्राफिक में इसके आसान तरीके देखिए-

सवाल- दूसरों के ईयरबड्स यूज करने के क्या नुकसान हैं?
जवाब- इससे कान में मौजूद वैक्स, पसीना और बैक्टीरिया एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंच सकते हैं। इससे कान में इन्फेक्शन, खुजली और जलन का रिस्क होता है। इसलिए ईयरबड्स शेयर करने से बचें।
सवाल- सोते समय संगीत या आवाज सुनने के लिए कौन-से विकल्प सुरक्षित हैं?
जवाब- अगर बिना म्यूजिक के नींद नहीं आती तो ईयरबड्स की जगह ये विकल्प अपना सकते हैं-
- एक्सटर्नल स्पीकर पर धीमी आवाज
- व्हाइट नॉइज मशीन
- पिलो स्पीकर
- स्लीप हेडबैंड/हेडफोन
- कमरे की साउंडप्रूफिंग
इनकी आवाज हमेशा धीमी रखें और स्लीप टाइमर का इस्तेमाल करें।
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ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा
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