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EPF-EPS Salary Limit Hiked to 25,000


8 मिनट पहले

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केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को EPF और EPS के लिए अनिवार्य बेसिक सैलरी लिमिट बढ़ाकर ₹25,000 प्रति महीना कर दी है। अब कंपनियों को 25 हजार रुपए तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को PF के दायरे में शामिल करना ही होगा।

पहले यह लिमिट ₹15,000 प्रति महीना थी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि इससे 51 लाख कर्मचारियों को PF बचत और पेंशन का सीधा फायदा मिलेगा।

पहले 15 हजार रुपए से ज्यादा बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों का PF कटना या न कटना उनकी मर्जी पर डिपेंड करता था। नए आदेश से 25 हजार रुपए की लिमिट होने के बाद PF कटने से कर्मचारी की सेविंग बढ़ेगी और रिटायरमेंट पर बड़ा फंड मिलेगा।

EPF में ₹25,000 की मैंडेटरी कवरेज सैलरी लिमिट का मतलब आसान भाषा में समझें

  • अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी + महंगाई भत्ता (DA) अगर ₹25,000 या उससे कम है, तो कंपनी को उस कर्मचारी को EPF में शामिल करना अनिवार्य है। पहले 15 हजार से ज्यादा बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी के लिए यह ऑप्शनल था।
  • अगर बेसिक सैलरी + DA ₹25,000 से ज्यादा है, तो नई जॉइनिंग पर EPF अनिवार्य नहीं है, लेकिन ऐसा तब ही होगा जब कर्मचारी पहले से EPF सदस्य न हो।

नोट: यह लिमिट मुख्य रूप से बेसिक सैलरी + DA पर लागू होती है, पूरे CTC या ग्रॉस सैलरी पर नहीं।

₹30,000 सैलरी के उदाहरण से नए नियम समझें

यदि आपकी बेसिक सैलरी + DA मिलाकर ₹30 हजार है, तो आप अनिवार्य वेज सीलिंग की ₹25,000 की सीमा से बाहर हैं।

इसका मतलब है कि कंपनी के लिए आपका PF काटना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। हालांकि, ऐसी स्थिति में दो विकल्प और उनका गणित लागू होता है:

विकल्प 1: यदि कंपनी और आप आपसी सहमति से PF काटते हैं

  • गणित (अगर पूरी ₹30,000 सैलरी पर PF कटे):
  • आपकी जेब से कटेगा (12%): ₹3,600 प्रति माह
  • कंपनी अपनी तरफ से देगी (12%): ₹3,600 प्रति माह

विकल्प 2: यदि कंपनी ₹25,000 की सीलिंग लिमिट पर ही PF काटना चाहे

  • आपकी जेब से कटेगा (12% of ₹25k): ₹3,000 प्रति माह
  • कंपनी देगी (12% of ₹25k): ₹3,000 प्रति माह
  • कुल बचत: ₹6,000 प्रति माह (बाकी ₹5,000 बेसिक सैलरी पर कोई PF नहीं कटेगा)।

नए नियम से क्या बदलेगा सवाल-जवाब में जानें

सवाल 1: वर्तमान में EPFO का आकार और दायरा कितना बड़ा है?

जवाब: EPFO दुनिया के सबसे बड़े सोशल सिक्योरिटी सिस्टम्स में से एक है।

  • योगदान देने वाले मेंबर्स: लगभग 7.98 करोड़
  • योगदान देने वाले संस्थान/कंपनियां: लगभग 7.68 लाख
  • पेंशनर्स (EPS के तहत): लगभग 82 लाख

सवाल 2: सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा?

जवाब: 2014 के बाद से भारत में लोगों की न्यूनतम सैलरी, औसतन कमाई और पक्की (सरकारी या कंपनी के नियमों से जुड़ी) नौकरियों में बढ़ोतरी हुई है। कई राज्यों और अलग-अलग कामों में न्यूनतम सैलरी पहले ही पुरानी ₹15,000 की लिमिट के करीब पहुंच गई थी।

ऐसे में बढ़ती सैलरी के हिसाब से कर्मचारियों को PF और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं देने और इस सिस्टम को नए ज़माने के हिसाब से अपडेट करने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है।

सवाल 3: इस नए नियम से कर्मचारियों को कौन-कौन सी सुविधाएं या स्कीमों का लाभ मिलेगा?

जवाब: नए नियम से कर्मचारियों को मुख्य रूप से तीन योजनाओं का लाभ मिलेगा:

  • EPF (कर्मचारी भविष्य निधि): रिटायरमेंट के लिए प्रोविडेंट फंड की नियमित बचत।
  • EPS (कर्मचारी पेंशन योजना): रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन की सुरक्षा।
  • EDLI (कर्मचारी जमा सहबद्ध बीमा योजना): EPF मेंबरशिप से जुड़ा जीवन बीमा कवर।

सवाल 4: इस फैसले से सरकारी खजाने पर कितना वित्तीय भार पड़ेगा?

जवाब: इस फैसले के कारण सरकार का सालाना खर्च बढ़कर लगभग ₹11,339 करोड़ हो जाएगा, जो कि पहले लगभग ₹10,250 करोड़ था।

अगले 5 साल में इस पर कुल अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ आएगा। फाइनेंस कमेटी (EFC) ने 16 जून 2026 की बैठक में इसकी सिफारिश की थी।

सवाल 5: कंपनियों या एम्प्लॉयर्स के लिए इसका क्या मतलब है?

जवाब: अधिक कर्मचारियों के EPFO में शामिल होने से कंपनियों को कर्मचारियों को लंबे समय तक रोके रखने , वर्कफ़्लो में स्थिरता और बेहतर वर्क एनवॉयर्नमेंट बनाने में मदद मिलेगी।

सवाल 6: यह फैसला कब से लागू होगा और आगे की प्रक्रिया क्या है?

जवाब: कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO इस निर्णय को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। इसके बाद इसे अधिसूचित कर लागू कर दिया जाएगा।

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