सूर्यनगर पुल के नीचे हो रहा अवैध निर्माण।
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के अंतिम चेतावनी वाले नोटिस के बावजूद सूर्यनगर पुल के नीचे अवैध निर्माण जारी है। 11 सितंबर को एचएसवीपी के अफसरों ने बिल्डिंग पर अवैध निर्माण का नोटिस चस्पाया था।
.
इस्टेट ऑफिस की ओर से गत 11 सितंबर को मेमो नंबर 275315 के जरिए बिल्डिंग मालिक को नोटिस थमाया गया था। इसमें साफ-साफ लिखा गया था कि HSVP की जमीन पर अवैध निर्माण तुरंत बंद करें और अतिक्रमण हटाएं, वरना बिना किसी नोटिस के सीधे FIR दर्ज कराई जाएगी।
मगर बावजूद इसके लगातार अवैध निर्माण जारी है। इस बारे में जब एचएसवीपी के संपदा अधिकारी(EO) जगदीप ढांडा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में हैं और टीम ने जाकर अवैध निर्माण रूकवा दिया था। अगर फिर भी निर्माण जारी है तो जेई से वह रिपोर्ट लेंगे।
11 सितंबर को चस्पाया गया था नोटिस…

पहले इस इमारत में थी सूर्यनगर चौकी हैरानी की बात यह है कि जिस इमारत में यह अवैध निर्माण हो रहा है, वहां पहले सूर्यनगर पुलिस चौकी हुआ करती थी। पुलिस चौकी के नाम का पर्दा होने के कारण यह अवैध ढांचा हमेशा HSVP के पीले पंजे और कार्रवाई से बचा रहा।
इसी का फायदा उठाकर अब इस इमारत को पूरी तरह कॉमर्शियल रूप देने की तैयारी है। पहले तो नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए जैक लगाकर पूरी बिल्डिंग को रातों-रात ऊपर उठाया गया और अब इसमें दिन-दहाड़े पक्का निर्माण कराया जा रहा है।

इससे पहले एचएसवीपी ने बाउंड्रीवाल को हटाया था मगर अंदर निर्माण जारी रहा।
अफसरों ने आंखें बंद की बड़ा सवाल उठता है कि जब नोटिस में स्पष्ट रूप से एफआईआर की चेतावनी दी गई थी, तो नोटिस जारी करने के बाद अधिकारी मौके पर कार्रवाई करने क्यों नहीं पहुंचे? क्या HSVP का काम सिर्फ कागजी खानापूर्ति (नोटिस जारी करना) तक ही सीमित है।

अवैध निर्माण करने वाले बेखौफ, HSVP मेहरबान नोटिस जारी होने के कई दिन बाद भी काम का न रुकना सीधा-सीधा HSVP के संबंधित जेई, एसडीओ और प्रशासनिक अधिकारियों की ढिलाई और संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाता है। शहर में आम आदमी अगर एक ईंट भी बिना अनुमति के रख दे तो दस्ता तुरंत पहुंच जाता है।
लेकिन सूर्यनगर पुल के नीचे खुलेआम हो रहे इस बड़े अवैध निर्माण पर अधिकारियों की आंखें बंद हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते इस निर्माण को ढहाया नहीं गया और एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई, तो यह साबित हो जाएगा कि इस अवैध खेल में विभाग के अधिकारियों की मौन सहमति शामिल है।
