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44 मिनट पहले
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सवाल- मेरी शादी को दो साल हुए हैं। कुछ दिन पहले मुझे पता चला कि मेरे पति आज भी अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड से बात करते हैं। वे कहते हैं कि रिश्ता तो खत्म हो गया, लेकिन अब वो दोनों अच्छे दोस्त हैं। वो एक-दूसरे को बर्थ–डे विश करते हैं और एक-दूसरे की सोशल मीडिया पोस्ट पर कमेंट भी करते हैं। मुझे यह बात अजीब लगती है। मैं जब उनसे पूछती हूं कि कहते हैं कि अगर उन्हें कुछ गलत करना होता तो मुझसे यह बात छिपा लेते। मैं भरोसा करना चाहती हूं, लेकिन मन में डर बना रहता है।
क्या शादी के बाद अपने एक्स से दोस्ती रखना नॉर्मल बात है? मैं इसे कैसे देखूं?
एक्सपर्ट– डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा
सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। देखिए, शादी के बाद एक्स से दोस्ती अपने आप में गलत नहीं है। शादी के बाद किसी पुराने साथी से संपर्क में रहना अपने आप में बेवफाई नहीं है। कई बार लोग पुराने रिश्ते से भावनात्मक रूप से आगे बढ़ चुके होते हैं। इसके बाद भी सामान्य दोस्ती और संवाद बनाए रखते हैं। इसमें कुछ भी अजीब या अबनॉर्मल नहीं है।
लेकिन हर रिश्ते की सीमा अलग होती है। इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पति एक्स से बात कर रहे हैं या नहीं। असली सवाल ये है कि वे किस तरह की बात करते हैं, कितनी बार करते हैं और उस रिश्ते की जगह उनकी शादी में कितनी है।
अगर बातचीत सामान्य है, छिपाकर नहीं की जा रही है और उसमें भावनात्मक या रोमांटिक जुड़ाव नहीं है, तो इसे दोस्ती के रूप में देखा जा सकता है।
लेकिन अगर एक्स से बात करने के लिए पति आपसे बातें छिपाने लगें, लगातार उसी से भावनाएं साझा करें या आपकी तुलना उससे करें तो यह चिंता की बात हो सकती है।

आधी–अधूरी जानकारी से निष्कर्ष न निकालें
जैसाकि आपने अपने सवाल में लिखा है कि दोनों एक–दूसरे को बर्थडे विश करते हैं, सोशल मीडिया पोस्ट पर लाइक–कमेंट करते हैं। लेकिन जरा सोचिए, किसी को जन्मदिन की बधाई देना या सोशल मीडिया पर कमेंट करना भावनात्मक संबंध का प्रूफ नहीं है।
मनोविज्ञान के नजरिए से कहूं तो समस्या तब बढ़ती है, जब हम अधूरी जानकारी से पूरा निष्कर्ष निकाल लेते हैं।
आपके मन में यह विचार आ सकता है कि अगर वे आज भी बात करते हैं तो शायद उनके मन में अभी भी प्यार है। लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। इसलिए पहले बात को पूरी तरह समझने की कोशिश करें और इन पहलुओं पर गौर करें–

रिश्ते में भरोसा एक वाक्य, एक शब्द नहीं
आपके पति का यह कहना कि “अगर मुझे कुछ गलत करना होता तो मैं बात छिपा लेता,” भी एक बात की ओर इशारा करता है। संभव है कि वे इस संपर्क को सामान्य मानते हों। हालांकि केवल इस बात से भी पूरी तरह भरोसा करना जरूरी नहीं है। भरोसा एक वाक्य से नहीं बनता। यह कोई अंधा विश्वास भी नहीं है। भरोसा लगातार होने वाले व्यवहार से बनता है।

आपकी फिक्र भी गैरवाजिब नहीं
यह भी जरूरी है कि आप अपनी भावनाओं को सिर्फ इसलिए गलत न मानें क्योंकि पति कह रहे हैं कि कुछ गलत नहीं है। अपने डर को समझें, स्वीकार करें और फिर फैक्ट्स के आधार पर उसे परखें। कई बार पुराने रिश्ते का नाम ही मौजूदा साथी के मन में असुरक्षा पैदा कर देता है। मन में कई तरह के सवाल आने लगते हैं—
- “अगर वह इतनी अच्छी दोस्त है तो रिश्ता क्यों खत्म हुआ?”
- “क्या दोनों के बीच फिर से कुछ हो सकता है?”
- “क्या मैं उसके मुकाबले कम महत्वपूर्ण हूं?”
ऐसे सवाल सामान्य मानवीय असुरक्षा से पैदा हो सकते हैं। इन्हें दबाने के बजाय इन्हें समझना जरूरी है।

पति से सवाल-जवाब नहीं, संवाद करें
इस स्थिति में सबसे जरूरी है कि कपल के बीच बातचीत आरोपों से शुरू न हो। इस तरह की बातें न कहें, जैसेकि–
- “तुम अभी भी उससे प्यार करते हो?”
- “तुम मुझे धोखा तो नहीं दे रहे?”
- “तुम्हें उससे बात करने की जरूरत ही क्यों है?”
ऐसे सवाल सामने वाले को डिफेंसिव बना सकते हैं। इसकी बजाय अपनी भावनाएं शेयर करें। आप कह सकती हैं—
“मुझे परेशानी एक्स से तुम्हारी दोस्ती से नहीं है। इस बात से है कि मुझे नहीं पता इस रिश्ते की सीमा क्या है। इससे मुझे असुरक्षा महसूस होती है। मैं चाहती हूं कि हम दोनों मिलकर ऐसी सीमाएं तय करें, जिनसे हम रिश्ते में ज्यादा सेफ महसूस करें।”

शादी में बाउंड्री तय करना जरूरी
हर शादी में कुछ सीमाएं होती हैं। लेकिन जरूरी नहीं कि दोनों लोगों की सीमाएं एक जैसी हों। आपके लिए एक्स से निजी बातचीत असहज हो सकती है। पति के लिए यह सामान्य दोस्ती हो सकती है।
इस अंतर का मतलब यह नहीं कि किसी एक की सोच गलत है।
दोनों को मिलकर बीच का रास्ता निकालना होगा। उदाहरण के लिए, यह तय किया जा सकता है कि पर्सनल बातें एक्स से शेयर नहीं की जाएंगी। देर रात बात नहीं होगी। कोई ऐसी बात नहीं होगी, जिसे पार्टनर से छिपाना पड़े।
बाउंड्री का मतलब साथी को कंट्रोल करना नहीं है। बाउंड्री का मतलब है कि दोनों मिलकर तय करें कि रिश्ते में कौन सा व्यवहार दोनों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक है।

कब चिंता करना जरूरी?
अगर पति आपकी चिंता समझने के बजाय लगातार उसे खारिज करते हैं, तो यह गंभीर बात है। खासकर तब, जब उनके व्यवहार में बदलाव भी दिखाई दे। जैसे फोन छिपाना, चैट डिलीट करना, पासवर्ड बदलना या आपके साथ भावनात्मक दूरी बढ़ना। ऐसी में समस्या सिर्फ एक्स नहीं है। समस्या विश्वास और पारदर्शिता की है।
इसके उलट अगर पति खुलकर बताते हैं कि क्या बातचीत हुई, आपकी परेशानी सुनते हैं और आपको भरोसा दिलाने के लिए व्यवहार में भी पारदर्शिता रखते हैं, तो असुरक्षा की भावना धीरे–धीरे कम हो सकती है।
अंत में सबसे जरूरी बात
आपको न तो तुरंत यह मानने की जरूरत है कि पति आपको धोखा दे रहे हैं। न ही अपनी बेचैनी को पूरी तरह दबाने की जरूरत है। आप पहले उनके व्यवहार को देखें। फिर अपनी भावनाओं को समझें। उसके बाद दोनों मिलकर रिश्ते की सीमाएं तय करें।
शादी में भरोसे का मतलब यह नहीं कि पार्टनर के जीवन में कोई पुराना व्यक्ति कभी मौजूद हो ही नहीं सकता। भरोसे का मतलब है कि पुराने रिश्तों के बावजूद वर्तमान रिश्ते को प्रिऑरिटी, सम्मान और सुरक्षा मिले।
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सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आज के समय में यह सवाल बहुत से युवाओं के मन में आता है। करियर, आर्थिक जिम्मेदारियां और बदलती जीवनशैली की वजह से कई कपल शादी टालते हैं। ऐसे में कुछ लोग लिव-इन रिलेशनशिप को एक ‘ट्रायल’ की तरह देखते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

