Headlines

IAS Tukaram Mundhe Vs Bombay High Court; Maharashtra FDA


IAS तुकाराम मुंढे, यानी महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, यानी FDA के कमिश्नर। सिर्फ 3 महीने के टेन्योर में महाराष्ट्र के रेस्टोरेंट, कैंटीन और फूड प्रोडक्ट्स कंपनियों पर 1100 से ज्यादा छापे, 165 लाइसेंस सस्पेंड किए। शाहरुख खान, अजय देवगन और

.

अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने FDA से पूछा है- ‘क्या आप खुद को लॉर्ड समझते हैं?’

बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्ती की वजह क्या है, आखिर कौन हैं तुकाराम मुंढे और उनकी इतनी चर्चा क्यों है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

बीते दिनों दो मामलों में बॉम्बे हाईकोर्ट ने तुकाराम की अगुवाई वाले FDA को कड़ी फटकार लगाई और उसके 2 ऑर्डर रद्द कर दिए….

केस-1. मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के फूड लाइसेंस सस्पेंड

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन, MCA के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स, BKC में स्थित कैंपस में 5 रेस्टोरेंट या फूड आउटलेट हैं। 20 अगस्त को FDA ने इन आउटलेट्स में छापा मारा और साफ-सफाई, लाइसेंसिंग से जुड़ी खामियों के चलते पांचों आउटलेट्स के FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिए…

  • MCA ने इसके खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। 25 अगस्त को चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड की बेंच ने सुनवाई की।
  • FDA ने आउटलेट्स की रिपोर्ट्स में लिखा था- मानकों का ‘पार्शियल कंप्लायंस’ यानी ‘आंशिक अनुपालन’ हुआ।
  • इस पर कोर्ट ने पूछा- FDA की रिपोर्ट्स में छापे के दौरान हर पैरामीटर के लिए स्कोर दिया जाता है। इस रिपोर्ट में स्कोर क्यों नहीं है?’
  • MCA के विक्रम नानकानी ने दलील दी कि FDA ने ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट’ की धारा 32 के तहत सुधार का नोटिस दिए बिना सीधे लाइसेंस सस्पेंड कर दिए।
  • इस पर जस्टिस घुगे ने FDA को 25 अगस्त को दोबारा इंस्पेक्शन करके नई रिपोर्ट देने को कहा।
  • फिर 29 अगस्त की सुनवाई में FDA ने नई रिपोर्ट में कहा कि रेस्टोरेंट 88% मानक पूरे कर रहा है। हालांकि FDA ने सस्पेंशन नहीं हटाया और दलील दी कि लाइसेंस MCA के नाम पर हैं, लेकिन रेस्टोरेंट ‘मेसर्स शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर’ नाम की कंपनी चला रही है।
  • इस दलील पर कोर्ट भड़क गया। कोर्ट ने पूछा, ‘जब हाइजीन का मसला सुलझाने का निर्देश था, तो FDA ‘जल्दबाजी’ में नई दलील क्यों दे रहा है?’

कोर्ट ने FDA के रवैये को अड़ियल बताते हुए अवमानना की कार्यवाही करने की चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा, ‘हम FDA को कितनी बार समझाने की कोशिश करें? मच्छर को तलवार से मत मारो। क्या आप खुद को लॉर्ड समझते हैं कि कुछ भी कर सकते हैं?’ कोर्ट विभाग और अफसरों को डांटते-डांटते थक गया है।’

कोर्ट ने रेस्टोरेंट्स पर सस्पेंशन के ऑर्डर रद्द कर दिया है। हालांकि FDA ने कहा कि वह MCA को लाइसेंसिंग में गड़बड़ी को लेकर नया नोटिस जारी करके सुनवाई करेगी और उसके बाद नया आदेश देगा।

मुंढे ने एक टोल-फ्री नंबर जारी किया है, जिस पर कॉल करके लोग नकली, मिलावटी या प्रतिबंधित खाने की शिकायत कर सकते हैं।

मुंढे ने एक टोल-फ्री नंबर जारी किया है, जिस पर कॉल करके लोग नकली, मिलावटी या प्रतिबंधित खाने की शिकायत कर सकते हैं।

केस-2. दवा कंपनी सिप्ला का सेल्स लाइसेंस रद्द किया

पुणे की सिप्ला यूनिट के इंस्पेक्शन में FDA को पैकेजिंग, स्टोरेज और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी मिली। 26 अगस्त को FDA ने कंपनी को सुनवाई के लिए बुलाया। सिप्ला से कोई अधिकारी नहीं आया, तो FDA ने अगले दिन यूनिट का सेल्स लाइसेंस रद्द कर दिया…

  • सिप्ला ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इसे चुनौती दी और कहा कि FDA के ऑर्डर में दवाओं की सेफ्टी या क्वालिटी को लेकर कोई चिंता नहीं जताई गई, मरीजों को कोई खतरा होने का भी जिक्र नहीं था।
  • 29 अगस्त को इस मामले में भी जस्टिस घुगे ने FDA से कहा कि वह अपनी ‘लिमिट क्रॉस’ करके अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है।
  • FDA ने लाइसेंस कैंसिल करने वाला ऑर्डर तो वापस ले लिया, हालांकि ये भी कहा कि नया नोटिस जारी करके सुनवाई करेगा।

इससे पहले FDA के तेजतर्रार एक्शन पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सवाल उठाया था कि FDA सिर्फ निजी संस्थानों पर छापेमारी क्यों कर रहा है? कानून का पालन सरकारी परिसरों की कैंटीनों में भी होना चाहिए। इसके बाद FDA ने बॉम्बे हाई कोर्ट के ही कैंपस में तीन कैंटीन पर छापेमारी कर दी और दो कैंटीन के लाइसेंस कैंसिल कर दिए। FDA ने मंत्रालय और IIT बॉम्बे की कैंटीन में भी इंस्पेक्शन किया था।

FDA के इस ‘क्विक एक्शन’ के पीछे असल में तुकाराम मुंढे और उनकी वर्किंग स्टाइल है। चैप्टर 2 में उन्हीं की बात…

तुकाराम मूलतः महाराष्ट्र के बीड जिले के छोटे से गांव ताडसोन्ना के रहने वाले हैं। एक गरीब किसान परिवार में 3 जून 1975 को उनका जन्म हुआ। ये इलाका अक्सर सूखे से ग्रस्त रहता है।

तीसरी क्लास की पढ़ाई के दौरान मुंढे ने खेत पर भी काम करना शुरू कर दिया। दिन में अपने पोलियोग्रस्त भाई को कंधे पर बैठाकर बिना चप्पल स्कूल जाते। रात में बिजली आती, तो खेत सींचते। साप्ताहिक बाजार में सिर पर सब्जियां लादकर बेचने जाना होता।

10वीं के बाद तुकाराम के बड़े भाई अशोक की औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजी नगर) में नौकरी लगी, तो उन्होंने तुकाराम को भी वहीं बुला लिया। यहां तुकाराम ने साइंस से 12वीं और फिर 1996 में यूनिवर्सिटी से बी.ए. में टॉप किया।

इसके बाद भाई के कहने पर तुकाराम UPSC की किताबें खरीदने और अच्छी कोचिंग ढूंढने दिल्ली पहुंचे। तुकाराम एक इंटरव्यू में बताते हैं, ‘मैं किताबें खरीदकर होटल में ठहरा। वहां अटेंडर ने पूछा, ‘सर बियर लेंगे?’ मैंने कहा- क्या तुम्हें बियर लेने वाला लगता हूं? मैं उसी वक्त अपना सामान उठाकर बिना टिकट वापस औरंगाबाद लौट आया।’

मुंढे बताते हैं कि जब औरंगाबाद गए, तो पहली बार गांव के बाहर की दुनिया देखी। मॉल, थियेटर देखे, तो चौंक गए।

मुंढे बताते हैं कि जब औरंगाबाद गए, तो पहली बार गांव के बाहर की दुनिया देखी। मॉल, थियेटर देखे, तो चौंक गए।

तुकाराम ने 1997 में UPSC की परीक्षा दी, लेकिन असफल रहे। 1999 में इंटरव्यू तक पहुंचे। इधर एम.ए. में भी सिर्फ 57% नंबर आए थे। ऐसे में UPSC का खयाल छोड़कर तुकाराम ने महाराष्ट्र PSC एग्जाम दिया। इसमें पास होकर सेकंड क्लास अफसर बन गए।

भाई अशोक इससे खुश नहीं थे। तुकाराम ने 2005 में फिर से UPSC दिया और इस बार ऑल इंडिया रैंक-20 लेकर आए।

तुकाराम बताते हैं, ‘उस साल महाराष्ट्र से 4 लोगों ने IAS पास किया था। अगले दिन अखबार में 3 लोगों की फोटो छपी। मेरे नाम के आगे खाली बॉक्स था। कोई मुझे जानता ही नहीं था।’

तुकाराम मुंढे ने अपने चौथे प्रयास में UPSC की परीक्षा पास की।

तुकाराम मुंढे ने अपने चौथे प्रयास में UPSC की परीक्षा पास की।

तुकाराम की पहली पोस्टिंग बतौर असिस्टेंट कलेक्टर सोलापुर में हुई। यहां रेत माफियों पर कार्रवाई की, तो उन पर जानलेवा हमला हो गया। फिर…

  • 2007 में नांदेड़ में अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई की। 5 महीने में ट्रांसफर हो गया। 2012 में मुंबई सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट पहुंचे, तो टैक्स चोरों से सरकार के 310 करोड़ रुपए वसूले।
  • नवंबर 2014 में कलेक्टर बनकर सोलापुर लौटे। इस बार पानी के टैंकरों में कम पानी भरकर बेचने वाले वॉटर टैंकर माफियाओं पर कार्रवाई की।
  • एक आंकड़ा है कि 2013-14 में 673 मिलीमीटर बारिश हुई थी और 673 पानी के टैंकरों की जरूरत पड़ी। 2015-16 में करीब तिहाई 238 मिलीमीटर बारिश हुई, लेकिन सिर्फ 40 टैंकरों की जरूरत पड़ी। तुकाराम को ‘महाराष्ट्र का वॉटरमैन’ कहा जाने लगा।
  • 2016 में नवी मुंबई पहुंचे, तो ‘वॉक विद कमिश्नर’ मुहिम के तहत हर शनिवार-रविवार मुंढे सड़कों पर निकल जाते और लोगों की शिकायतें सुन भ्रष्ट अफसरों को सस्पेंड कर देते।
  • इसी दौरान उन्होंने 20 करोड़ रुपये की संगमरमर की मूर्ति खरीदने और 163 करोड़ रुपए के सोलर प्रोजेक्ट को जनता के पैसे की बर्बादी बताकर रद्द कर दिया। ये पैसा दिव्यांगों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगाया।
  • मुंढे पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड के चेयरमैन बने। 2018 में सालों से गायब चल रहे 158 कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों को एकसाथ सस्पेंड कर दिया।
  • 2020 में मुंढे नागपुर के म्यूनिसिपल कमिश्नर और फिर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के CEO बने। नेताओं ने उन पर पहले से पास टेंडर होल्ड करने के आरोप लगाए। सांसद नितिन गडकरी ने तो उनकी बतौर CEO नियुक्ति पर ही सवाल कर दिए और PMO तक शिकायत की।
  • 2022 में मुंढे महाराष्ट्र के हेल्थ केयर कमिश्नर बने, तो सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस बंद करवाई।
तुकाराम मुंढे को साल 2015-16 में ‘बेस्ट कलेक्टर’ का अवॉर्ड मिला था।

तुकाराम मुंढे को साल 2015-16 में ‘बेस्ट कलेक्टर’ का अवॉर्ड मिला था।

तुकाराम मुंढे के काम करने के इन तरीके से उनके जूनियर अफसरों से लेकर नेता तक परेशान रहते हैं। उन पर ड्यूटी के समय से ज्यादा और छुट्टियों में भी काम करवाने के आरोप लगते हैं।

2016 में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी आया। तब मुंबई के एक मेयर सुधाकर सोनवाने ने कहा था, ‘इस कमिश्नर के मन में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए बिल्कुल सम्मान नहीं है।’

21 साल की सेवा में 25 बार मुंढे का ट्रांसफर हो चुका है। यानी औसतन हर 10 महीने में उन्हें नए ठिकाने पर भेज दिया जाता है।

फूड सेफ्टी के लिए देश में एक तय व्यवस्था है। 2006 में बनी संस्था- फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, यानी FSSAI ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट’ नियमों के तहत खाने-पीने की चीजों के लिए मानक तय करती है और फूड प्रोडक्ट बिजनेस और कंपनियों को लाइसेंस देती है। राज्यों में भी फूड एडमिनिस्ट्रेशन की संस्थाएं, फूड सेफ्टी कमिश्नर और अन्य अधिकारी होते हैं।

इसके बावजूद देश में फूड सेफ्टी, साफ-सफाई और फूड प्रोडक्ट्स की क्वालिटी की स्थिति और आंकड़े चिंताजनक हैं…

  • टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021-22 से अब तक 5 सालों में भारत में 8.8 लाख से ज्यादा फूड सैम्पल की जांच हुई।
  • इनमें 1.85 लाख, यानी करीब 20% नमूनों में असुरक्षित या घटिया क्वालिटी या गलत लेबलिंग पाई गई। 2025-26 में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में टोटल नमूनों में से 52% गड़बड़ पाए गए।
  • FSSAI या राज्यों के फूड सेफ्टी प्राधिकरणों ने औसतन हर साल सिर्फ 3.3% मामलों में जिम्मेदार रेस्टोरेंट या कंपनी वगैरह को दोषी ठहराया है।

इसके पीछे दो बड़ी दिक्कतें हैं- CAG की एक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों में फूड सेफ्टी ऑफिसर्स की कमी है। करीब 10 राज्यों में आधे से ज्यादा पद खाली हैं। सरकारी फूड टेस्टिंग लैब में स्टाफ और जरूरी उपकरणों की कमी है।

इसके अलावा सैंपल की जांच से लेकर मामलों के निपटारे तक में देरी होती है। कई मामलों में जुर्माना लगता है, लेकिन उसकी वसूली नहीं हो पाती।

वहीं फूड सेफ्टी के मामले में तुकाराम का काम करने का तरीका अलग और तेज है…

  • 25 मई 2026 को महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर बनने के बाद पहले हफ्ते में ही उन्होंने घटिया सामान बेच रहे 50 से ज्यादा ठिकानों पर छापे मारे और 100 लोगों को गिरफ्तार किया।
  • चमत्कारी इलाज के दावे वाले भ्रामक विज्ञापनों के चलते पतंजलि पर छापे मारे। 51 लाख रुपए का सामान जब्त किया।
  • ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियों के 86 वेयरहाउसेज की जांच की और 14 वेयरहाउस के लाइसेंस सस्पेंड किए।
  • मुंबई में डोमिनॉज पिज्जा के 4 आउटलेट के लाइसेंस सस्पेंड किए। नूर मोहम्मदी होटल, शालीमार रेस्टोरेंट, के रुस्तम एंड को जैसे मुंबई और पुणे के पुराने नामी होटलों और रेस्टोरेंट में छापे मारे।
  • मुंढे ने ऑर्डर जारी किया कि महाराष्ट्र के रेस्टोरेंट कस्टमर से नहीं पूछ सकते कि वे कौन-सा पानी लेंगे। सभी ग्राहकों को साफ पानी देना होगा।
  • इसी महीने FDA ने महाराष्ट्र में एक साल तक एनालॉग पनीर, यानी बिना डेयरी से बने पनीर पर बैन लगाया है।
  • विमल इलायची का विज्ञापन करने पर बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को भी नोटिस भेजा गया। FDA के मुताबिक, विज्ञापन में इलायची के नाम पर पान मसाले का प्रमोशन हो रहा है, जबकि महाराष्ट्र में तंबाकू उत्पादों पर बैन है।
FDA को ब्लिंकिट और जेप्टो के वेयरहाउस में कीड़े, जमीन पर बिखरा सामान और गंदगी मिली।

FDA को ब्लिंकिट और जेप्टो के वेयरहाउस में कीड़े, जमीन पर बिखरा सामान और गंदगी मिली।

मुंढे के कार्यकाल में FDA 1100 से ज्यादा छापे मार चुका है। 3100 से ज्यादा निरीक्षण हुए हैं। 165 लाइसेंस सस्पेंड किए हैं। 50 करोड़ से ज्यादा का माल जब्त हुआ है।

25 अगस्त को रॉयटर्स ने एक रिपोर्ट में बताया कि विदेशी कंपनियां भारत में अपने प्रोडक्ट्स की क्वालिटी गिरा देती हैं। मसलन- लंदन में बिकने वाले फैंटा के एक कैन में 63 कैलोरी होती हैं। भारत में इसी कैन में 3 गुना ज्यादा चीनी और आर्टिफीशियल कलर मिला होता है।

रॉयटर्स के मुताबिक, अकेले तुकाराम ऐसे ऑफिसर हैं, जिन्होंने इस पर टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, ‘अलग मानक क्यों? कंपनियों को सिर्फ कानून नहीं, बल्कि नैतिक व्यवहार का भी पालन करना चाहिए।’

कई रिपोर्ट्स में इसका जिक्र है कि तुकाराम के काम से महाराष्ट्र के आम लोग खुश हैं। कंज्यूमर कंसल्टेंट फर्म ‘द नॉलेज कंपनी’ के पार्टनर अंकुर बिसेन कहते हैं, ‘सालों से ये बात नॉर्मलाइज हो गई है कि भारत में खाने में गड़बड़ी होती है। लोगों में इसके खिलाफ गुस्सा है। अब उन्हें मुंढे से एक नई उम्मीद मिल रही है। मैंने उनके जैसा इंसान पहले कभी नहीं देखा।’

हालांकि मुंढे ने कई दुश्मन भी बना लिए हैं। कई बार तो उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं। हालांकि मुंढे कहते हैं कि उन्हें इनसे फर्क नहीं पड़ता।

वो कहते हैं, ‘मैं नियमों के दायरे में रहकर काम करता हूं। जो काम नहीं हो रहा था, उसे नियमानुसार शुरू किया है। मुझे कोई रिश्वत देने की हिम्मत नहीं करता। मेरा काम करने का एक ही तरीका है- सही या गलत। जो सही है, वो करुंगा। न्याय करना ही मेरा मकसद है।’

ये खबर भी पढ़ें..

आप आटा खा रहे हैं या सफेद पत्थर:यूपी की फैक्ट्रियों में गेहूं के साथ पत्थर की पिसाई, मजदूर बनकर रिपोर्टर का खुलासा

‘ये सफेद पत्थर का चूरा है, इसे आटे में मिलाते हैं, जिससे ज्यादा मुनाफा हो। आने वाले समय में यह लोगों को इतनी बीमारियां करेगा कि डॉक्टर भी कहने लगेंगे- भाई तेरा इलाज नहीं है।’ पूरी खबर पढ़ें…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *