4 घंटे पहले
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मिन्हाज मर्चेंट, लेखक, प्रकाशक और सम्पादक
जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमॉन ने 21-22 सितंबर को भारत यात्रा के दौरान एक टिप्पणी की, जो तेजी से वायरल हो गई। डिमॉन ने कहा कि भारत की जीडीपी अगले 10 साल में 4.2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 12.5 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी।
दुनिया के सबसे ताकतवर और समझदार बैंकरों में शुमार डिमॉन के इस अनुमान से हर कोई हैरान था। हालांकि, एक अखबार ने कई तालिकाओं और गणनाओं के जरिए डिमॉन के अनुमान पर सवाल उठाया और अपनी गणना की कि डिमॉन के अनुमान तक पहुंचने के लिए भारत को सालाना कितनी विकास दर चाहिए होगी।
अखबार के वरिष्ठ एसोसिएट एडिटर ने डिमॉन के जीडीपी संबंधी गणित को समझने की कोशिश की और 2036 में भारत की अर्थव्यवस्था का अपना अनुमान दिया। उन्होंने कहा कि डिमॉन की 10 साल की समय-सीमा में भारत की अर्थव्यवस्था को 4.2 ट्रिलियन डॉलर से 12.5 ट्रिलियन डॉलर करने के लिए जीडीपी को हर साल 11.6% की दर से बढ़ना होगा।
यह लगभग असंभव लगता है, क्योंकि पिछले 12 वर्षों में भारत की औसत ग्रोथ रेट 6.2% ही रही है। अगर 6.2% की यही ग्रोथ रेट जारी रहती है तो 2036 में भारत की जीडीपी 7.6 ट्रिलियन डॉलर होगी, 12.5 ट्रिलियन डॉलर नहीं। लेकिन इस विश्लेषण में तीन गलतियां थीं।
पहली, उनकी गणना नॉमिनल जीडीपी (वास्तविक जीडीपी और इन्फ्लेशन डिफ्लेटर) पर आधारित है, लेकिन उन्होंने 2036 में 7.6 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए नॉमिनल नहीं, बल्कि पिछले 12 वर्षों की वास्तविक जीडीपी की औसत ग्रोथ 6.2% का इस्तेमाल किया। दूसरी गलती, यह कि उन्होंने बीते 12 सालों में औसत विकास दर को कम करने वाले कोविड के दो वर्षों के असर को नजरअंदाज किया और बिना कोई स्पष्टीकरण दिए उसी दर पर भविष्य के अनुमान लगा दिए।
तीसरी गलती यह आकलन था कि रूस-यूक्रेन और ईरान युद्ध खत्म हो जाएं, लंबे समय से अटकी भारत-यूएस ट्रेड डील हो जाए, कच्चे तेल की कीमतें फिर 65-70 डॉलर प्रति बैरल आ जाएं, तब भी जीडीपी 8% से अधिक की दर से नहीं बढ़ेगी। अब समझते हैं कि यदि डिमॉन ने इन तीनों गलतियों से बचकर अनुमान लगाए हैं तो उनका गणित कैसा दिखता है।
पहली बात, 2020-22 के कोविड काल के बाद बीते चार वर्षों (2022-26) में भारत की औसत नॉमिनल जीडीपी विकास दर 10.5% से अधिक रही है। इसमें 8% वास्तविक विकास दर और 2.5% इन्फ्लेशन डिफ्लेटर शामिल हैं।
दूसरी बात, यदि दोनों युद्ध खत्म हो जाएं, तेल की कीमतें नीचे आ जाएं और भारत-यूएस ट्रेड डील हो जाए तो भारत अपनी खपत आधारित वास्तविक विकास दर बढ़कर 8.5% होने की उम्मीद कर सकता है। इसमें 3% इन्फ्लेशन डिफ्लेटर और जोड़ें तो भारत की नॉमिनल जीडीपी विकास दर 11.5% होगी। क्या यह हमें 12.5 ट्रिलियन तक पहुंचा देगी?
शुरुआत मौजूदा 4.2 ट्रिलियन डॉलर से करते हैं। 11.5% की नॉमिनल विकास दर से बढ़ती जीडीपी हर छह साल में लगभग दोगुनी हो जाती है। यानी, 2032 तक भारत की जीडीपी 8.4 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। इसके बाद 2036 तक चार साल और बाकी रहेंगे। 11.5% की दर से इन चार वर्षों में जीडीपी करीब 50 प्रतिशत और बढ़ेगी।
इस तरह 2036 में यह बढ़कर 12.6 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। अगर रुपया लगातार कमजोर होता रहा तो क्या ये अनुमान गड़बड़ा सकते हैं? ऐसा शायद ही हो। क्योंकि युद्ध और व्यापार से जुड़े संकट खत्म हुए तो अगले साल ला-नीना का सकारात्मक जलवायु प्रभाव अच्छी मानसूनी बारिश ला सकता है। वहीं 2028 में जब ट्रम्प का कार्यकाल खत्म होगा तो रुपया स्थिर रह सकता है और यहां तक कि और मजबूत भी हो सकता है।
युद्ध खत्म हों, तेल की कीमतें गिरें और यूएस ट्रेड डील हो जाए तो हम अपनी खपत आधारित वास्तविक विकास दर के 8.5% होने की उम्मीद कर सकते हैं। 3% इन्फ्लेशन डिफ्लेटर जोड़कर नॉमिनल जीडीपी 11.5% हो जाएगी। यह हमें 12.5 ट्रिलियन तक पहुंचा देगी। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

