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India-US Trade Deal Talks | Finance Minister Nirmala Sitharaman Statement


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2 घंटे पहले

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण म्यूनिक सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए। - Dainik Bhaskar

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण म्यूनिक सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए।

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत ऐसी जगह पर आकर अटक गई है, जहां से आगे बढ़ना दोनों देशों के लिए मुश्किल हो रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘म्यूनिख लीडर्स मीटिंग’ के दौरान यह बात कही। ।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बात उस मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां न तो भारत और छूट देने को तैयार है, और न ही अमेरिका। वित्त मंत्री ने कहा फिर भी अगर आगे बातचीत का कोई नया रास्ता निकलता है या गुंजाइश बनती है, तो दोनों देश उस पर बात करने के लिए तैयार हैं।

इसका क्या मतलब है 2 पॉइंट में समझें

  1. व्यापार समझौते में हर देश चाहता है कि उसके किसानों, कंपनियों और व्यापारियों का नुकसान न हो। एक हद के बाद कोई भी देश अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटना चाहता।
  2. इसका मतलब यह नहीं है कि डील टूट गई है, बल्कि इसका मतलब यह है कि फिलहाल गाड़ी थोड़ी धीमी हो गई है। जब तक डील नहीं होती, तब तक टैक्स पुराने जैसे ही बने रहेंगे।

व्यापार घाटा कम की कोशिश कर रहा अमेरिका

दोनों देशों के व्यापार में फिलहाल भारत फायदे में हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि अमेरिका अपने पुराने नुकसान की भरपाई करने और इस व्यापारिक अंतर को कम करने की कोशिश में जुटा है।

टैरिफ बढ़ाने पर सवाल, चीन का उदाहरण दिया

वित्त मंत्री ने व्यापार घाटा कम करने के लिए बार-बार टैरिफ बढ़ाने के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसे मामले बातचीत से ही सुलझाए जाते हैं।

चीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि चीन के साथ व्यापार में भारत को बहुत नुकसान है, फिर भी इसे सिर्फ भारी टैक्स लगाकर ठीक नहीं किया जा सकता; इसके लिए आपसी बातचीत और लेन-देन का रास्ता अपनाना होगा।

ग्लोबल ट्रेड के नियम टूटे, देश का हित सबसे आगे

निर्मला सीतारमण ने कहा कि आजकल अंतरराष्ट्रीय व्यापार का माहौल काफी मुश्किल हो चुका है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का सही से पालन नहीं हो रहा।

लगभग हर देश इन्हें तोड़ रहा है। ऐसे में भारत के कारोबारी समझौतों का सबसे बड़ा मकसद अपने देश के हितों को सुरक्षित रखना है।

अमेरिका ने कहा था- ट्रेड डील अंतिम दौर में पर फैसले में वक्त

हाल ही में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण में है, लेकिन यह तुरंत लागू नहीं होगी। अटके हुए मुद्दों की पहचान कर ली गई है और उन्हें सुलझाने पर काम चल रहा है। डील पर बातचीत कहां तक पहुंच है अमेरिकी राष्ट्रपति और भारतीय पीएम जल्द फोन पर बातचीत भी कर सकते हैं।

20 महीने में 3 बार टली बातचीत, हर बार नया कारण

  • अगस्त 2025: अमेरिका ने नई दिल्ली में होने वाली बैठक रद्द कर दी, क्योंकि उस समय भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ बढ़कर करीब 50% हो गया था।
  • फरवरी 2026: नियमों और नीतियों में बदलाव की वजह से भारतीय दल का अमेरिका दौरा टल गया।
  • हालिया स्थिति: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने तुरंत किसी भी समझौते से साफ मना कर दिया। वित्त मंत्री सीतारमण ने भी कहा कि बातची में अब ज्यादा गुंजाइश नहीं।

टैरिफ छूट के भरोसे स्थायी समझौता नहीं हो सकता

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ टैरिफ छूट के भरोसे डील करना सुरक्षित नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी नियमों के तहत इस छूट को किसी भी समय तीन अलग-अलग तरीकों से बदला या खत्म किया जा सकता है। जब तक अमेरिका साफ दिशानिर्देश, ठोस बातचीत और नीतियों में स्थिरता का भरोसा नहीं देता, तब तक स्थायी समझौते तक पहुंचना मुश्किल है।



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