कौशांबी के महमूदपुर में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में 11 लोगों की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है।
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जिस फैक्ट्री में धमाका हुआ, उसका लाइसेंस दो साल पहले ही निलंबित हो चुका था। आरोपी को जेल भेजा गया था, फिर भी कारोबार दोबारा कैसे शुरू हो गया। आबादी के बीच बड़ी मात्रा में पटाखे और बारूद जमा करता रहा, लेकिन जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
रविवार को धमाके से 7 मकान ढह गए, मलबा 500 मीटर दूर तक जा गिरा और 33 हजार वोल्ट की बिजली लाइन का टावर भी क्षतिग्रस्त हो गया। अब सवाल है कि पुलिस, प्रशासन और अग्निशमन विभाग आखिर दो साल तक क्या करते रहे? पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया।
दो साल पहले पकड़ा गया, फिर भी नहीं रुका कारोबार
महमूदपुर के रहने वाले नौशाद अली ने कई साल पहले पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस लिया था। 8 अक्टूबर 2024 को इसी गांव में उसके गोदाम से करीब 12 किलो बारूद और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी।
जांच में सामने आया था कि विस्फोटक सामग्री का अवैध तरीके से भंडारण किया जा रहा था। इसके अगले दिन पुलिस ने नौशाद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस कार्रवाई के बाद उसका पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया।
सवाल यही है कि लाइसेंस निलंबित होने के बाद भी उसके कारोबार पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग सकी। क्या यह सुनिश्चित किया गया था कि आरोपी दोबारा पटाखों का कारोबार शुरू न कर सके? क्या उसके गोदाम और फैक्ट्री की दोबारा जांच हुई थी? अगर जांच हुई तो उसमें क्या मिला और अगर नहीं हुई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी?

चारपाई पर लादकर युवक को अस्पताल पहुंचाया गया था।
जेल से बाहर आया और फिर शुरू हुआ ‘बारूद का खेल’
आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद नौशाद ने दोबारा पटाखों का कारोबार शुरू कर दिया। इस बार उसके परिवार के दूसरे लोग भी उसके साथ जुड़ गए। इनमें उसका भाई शकील, बेटा आदिल और परिवार के अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद गोदाम में पटाखों का भंडारण जारी रहा। आरोप है कि देखते ही देखते वहां बड़ी मात्रा में बारूद और पटाखे जमा कर लिए गए। यानी दो साल पहले हुई कार्रवाई के बाद भी सिस्टम ने सबक नहीं लिया।
नतीजा रविवार को सामने आया, जब विस्फोट ने कुछ ही सेकंड में कई घरों को मलबे में बदल दिया और 11 परिवारों से उनके अपने छीन लिए।

घायलों को चारपाई पर रखकर ही पिकअप में लादकर स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज (SRN) पहुंचाया गया था।
जिम्मेदार कौन?
1. पिपरी थानाध्यक्ष विकास सिंह
विस्फोट की जगह पिपरी थाना क्षेत्र में आती है। थानाध्यक्ष विकास सिंह पर अपने क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों की निगरानी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी है।आबादी के बीच बड़ी मात्रा में बारूद और पटाखे जमा किए जाते रहे, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
जिस आरोपी के खिलाफ पहले ही अवैध विस्फोटक रखने के मामले में कार्रवाई हो चुकी थी, उसके दोबारा इसी कारोबार में सक्रिय होने की जानकारी पुलिस को क्यों नहीं हुई? क्या लाइसेंस निलंबित होने के बाद उसके ठिकाने की निगरानी की गई थी?

2. सीओ चायल शिवांक सिंह
सर्किल अधिकारी होने के नाते सीओ चायल की जिम्मेदारी अपने अधीन आने वाले थानों की कार्यप्रणाली की निगरानी और पर्यवेक्षण की भी है। ऐसे में सवाल है कि दो साल पहले अवैध बारूद रखने के आरोप में जेल भेजा गया व्यक्ति उसी क्षेत्र में दोबारा बड़े पैमाने पर बारूद जमा करता रहा और पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।
क्या थाने स्तर पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की गई थी? क्या संवेदनशील लाइसेंसधारियों और पहले विस्फोटक अधिनियम से जुड़े मामलों की निगरानी की गई? इन सवालों के जवाब अब जांच में तलाशे जाएंगे।

3. एसडीएम चायल प्रेरणा गौतम
प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर आबादी के बीच पटाखों का कारोबार और बड़ी मात्रा में उनका भंडारण कैसे चलता रहा? क्या तहसील प्रशासन ने कभी मौके का निरीक्षण किया था? जिस जमीन पर गोदाम और कथित फैक्ट्री संचालित हो रही थी, उसका भू-उपयोग क्या था? क्या वहां इस तरह की गतिविधि की अनुमति थी?
अगर पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही निलंबित हो चुका था तो उसके बाद प्रशासन ने मौके की स्थिति जानने के लिए क्या कार्रवाई की? इन सवालों के जवाब अब 11 मौतों के बाद तलाशे जा रहे हैं।

4. मुख्य अग्निशमन अधिकारी मंगेश कुमार
पटाखों से जुड़ी गतिविधियों में आग से सुरक्षा सबसे अहम होती है। ऐसे में मुख्य अग्निशमन अधिकारी मंगेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लाइसेंस निलंबित होने के बाद क्या अग्निशमन विभाग ने मौके की जांच की थी?
क्या यह देखा गया था कि वहां अवैध तरीके से पटाखों या विस्फोटक सामग्री का भंडारण तो नहीं हो रहा है? क्या स्थानीय फायरकर्मियों ने कभी इस जगह के बारे में कोई रिपोर्ट दी थी? अगर नहीं, तो इतनी बड़ी मात्रा में ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री विभाग की निगरानी से कैसे बची रही?

धमाके ने खोली बारूद के भंडारण की पोल
विस्फोट से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौके पर कितना बड़ा खतरा जमा था। धमाके की आवाज करीब 2 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जबकि मलबा और विस्फोट के अवशेष करीब 500 मीटर दूर तक जा गिरे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पटाखा फैक्ट्री के सामान के साथ ईंट, सरिया और मकानों का मलबा भी दूर-दूर तक बिखर गया। कई अवशेष करीब 500 मीटर दूर स्थित बाग के पेड़ों पर लटके मिले।
हादसे में क्षतिग्रस्त एक मकान का आरसीसी पिलर भी करीब 500 मीटर दूर जाकर गिरा। इससे विस्फोट की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

फैक्ट्री से 70 मीटर दूर यह 3 मंजिला मकान है। तस्वीर में जगह-जगह मकान के हिस्से टूटे हुए दिख रहे।
200 मीटर दूर तीन मंजिला मकान की दीवारें उड़ीं
विस्फोट की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री से करीब 200 मीटर दूर स्थित तीन मंजिला मकान की पहली और दूसरी मंजिल की एक तरफ की दीवारें उड़ गईं।
आसपास के पांच मकानों के पिछले हिस्से भी पूरी तरह जमींदोज हो गए। यह सिर्फ एक फैक्ट्री में हुआ धमाका नहीं था, बल्कि आबादी के बीच जमा किए गए बारूद के बड़े भंडार का विस्फोट था, जिसकी चपेट में पूरा इलाका आ गया।
विस्फोट की ताकत इतनी ज्यादा थी कि करीब 200 मीटर दूर स्थित 33 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन का टावर भी क्षतिग्रस्त हो गया। मलबा और अन्य सामान टावर तक जा पहुंचा।विस्फोट से बिजली की लाइन को भी नुकसान पहुंचा। देर शाम तक बिजलीकर्मी क्षतिग्रस्त लाइन की मरम्मत में जुटे रहे।

पुलिस और एयरफोर्स की टीमों ने रेस्क्यू कर लोगों को बाहल निकाला।
नौ घंटे तक मलबे में लोगों को तलाशते रहे जवान
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती मलबे के नीचे दबे लोगों को तलाशने की थी। करीब दोपहर 12 बजे शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन रात नौ बजे तक चलता रहा। फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीमें लगातार मलबा हटाकर लोगों की तलाश करती रहीं। मौके पर 10 जेसीबी, 11 दमकल की गाड़ियां और 14 एंबुलेंस लगाई गईं।
करीब नौ घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद अब दूसरा सवाल खड़ा हो गया है। मलबे से जिंदगियां निकालने में नौ घंटे लगे, लेकिन जिस अवैध बारूद के ढेर ने यह तबाही मचाई, उसे समय रहते हटाने में दो साल क्यों लग गए?
अब पढ़िए अफसरों ने क्या कहा…
कमिश्नर एम. लोकेश ने कहा कि फिलहाल पूरा ध्यान रेस्क्यू ऑपरेशन पर था। आवासीय क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री कैसे चल रही थी, इसकी जांच कराई जाएगी। एफआईआर दर्ज कर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसपी कौशांबी सत्यनारायण प्रजापत ने बताया कि मौके पर पटाखों का अवैध भंडारण किया गया था। पुलिस की जांच में अब तक पटाखा निर्माण की बात सामने नहीं आई है। लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद पटाखे कैसे स्टोर किए जा रहे थे, इसकी जांच कराई जा रही है।
डीएम अमित पाल शर्मा ने बताया कि 2024 में आरोपी का लाइसेंस सस्पेंड हुआ था और उस समय के अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की गई थी। अब जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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