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Mahabharat Kunti Bhim Rakshas Story


1 घंटे पहले

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महाभारत में वनवास के समय कुंती अपने पांचों पुत्रों- युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव के साथ वन में लगातार यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान वे एक गांव में पहुंचे। वे गांव में एक ब्राह्मण के घर ठहरे थे। उस गांव के लोग एक राक्षस से बहुत परेशान थे। वह राक्षस रोज गांव में आता और एक व्यक्ति को अपना भोजन बना लेता था। डर के कारण गांव के लोगों ने तय कर रखा था कि हर दिन गांव के किसी एक परिवार से कोई व्यक्ति राक्षस के पास जाएगा।

कुंती और पांचों पांडव जिस ब्राह्मण के घर ठहरे हुए थे, उस दिन राक्षस के पास जाने की बारी उस ब्राह्मण परिवार की थी। ब्राह्मण अपने परिवार को बचाने के लिए खुद राक्षस के पास जाने की तैयारी कर रहा था। जब कुंती को इस बात का पता चला, तो कुंती ने ब्राह्मण से कहा, “आप चिंता मत कीजिए। आज आपके परिवार का कोई व्यक्ति राक्षस के पास नहीं जाएगा। मेरा एक पुत्र आपकी जगह जाएगा।”

ब्राह्मण ने कुंती की बात मानने से इनकार कर दिया। उसने कहा, “मैं अपने परिवार को बचाने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति को मौत के मुंह में नहीं भेज सकता।”

कुंती ने उसे भरोसा दिलाया कि मेरे पांच पुत्रों में भीम बहुत शक्तिशाली है और वह राक्षस का सामना कर सकता है। आज भीम राक्षस के पास जाएगा और गांव को इस संकट से मुक्ति दिलाएगा।

युधिष्ठिर ने माता कुंती से कहा, “आप अपने ही पुत्र को खतरे में क्यों डाल रही हैं?”

तब कुंती ने अपने सभी पुत्रों को समझाया, “इस गांव के लोग हमारे लिए अनजान हो सकते हैं, लेकिन इन्होंने मुश्किल समय में हमारा साथ दिया है। हमें रहने के लिए जगह दी है। अब जब ये लोग संकट में हैं, तो इनकी मदद करना हमारा कर्तव्य है। हमें किसी के उपकार को भूलना नहीं चाहिए।”

कुंती की बात सुनकर भीम राक्षस का सामना करने के लिए निकल पड़े। उन्होंने अपनी शक्ति से राक्षस का वध कर दिया और गांव के लोगों को उसके आतंक से मुक्त कर दिया।

कुंती और पांडवों की ऐसी ही भावनाओं की वजह से उनके ऊपर भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा थी। भले ही पांडवों के जीवन कई परेशानियां आईं, लेकिन हर बार श्रीकृष्ण की कृपा से वे हर परेशानी का सामना कर पाए और अंत में कौरवों को पराजित किया।

प्रसंग की सीख

  1. मदद को अपना अधिकार न समझें – कोई व्यक्ति हमारी मदद करता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह ऐसा करने के लिए मजबूर था। उसकी मदद की कद्र करें और उसे धन्यवाद दें। किसी की मदद को अपना अधिकार न समझें।
  2. अच्छे समय में रिश्ते न भूलें – अक्सर हम परेशानी में लोगों को याद करते हैं, लेकिन परेशानी खत्म होते ही उनसे दूर हो जाते हैं। यह सही तरीका नहीं है। अच्छे समय में भी उन लोगों से जुड़े रहें, जिन्होंने बुरे समय में हमारा साथ दिया।
  3. मदद का मौका मिले तो पीछे न हटें – अगर हमारा कोई परिचित मुश्किल में है और हम उसकी मदद कर सकते हैं, तो केवल यह सोचकर पीछे न हटें कि “मुझे इससे क्या मिलेगा?” नि:स्वार्थ भाव से मदद करने के लिए तैयार रहें।
  4. हर मदद पैसे से नहीं होती – किसी की आर्थिक मदद करना ही सहायता नहीं है। किसी को सही सलाह देना, किसी का काम आसान करना, बीमारी में मदद करना, ध्यान से किसी की बात सुनना, मुश्किल समय में किसी के पास खड़े रहना भी बड़ी मदद है।
  5. उपकार का मतलब हिसाब-किताब नहीं – मदद करने का अर्थ यह नहीं कि सामने वाले जरूरतमंद से बदले में कुछ पाने की उम्मीद रखी जाए। सच्ची मदद वही है, जिसमें इंसान दूसरे के दुख को समझकर उसके काम आता है।
  6. मदद करने वाले को कभी छोटा न समझें – कई बार हमें लगता है कि सामने वाले ने तो बस छोटी-सी मदद की थी, लेकिन जिस समय हमें जरूरत थी, उस समय वही छोटी मदद हमारे लिए बहुत बड़ी थी। इसलिए किसी की मदद को छोटा न समझें।
  7. सही समय पर साथ खड़े हों – किसी के मुश्किल समय में केवल यह कहना कि “मैं तुम्हारे साथ हूं” काफी नहीं होता। अगर संभव हो, तो उसके लिए कुछ करके दिखाएं। सही समय पर की गई मदद रिश्ते को मजबूत बनाती है।

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