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Maur Politics | AAP MLA Sukhbir Singh Maisarkhana Expulsion 2027 Ticket Race


बठिंडा में आम आदमी पार्टी के मौड़ हलके में विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना के पार्टी से निष्कासन के बाद अब अगली सियासी तस्वीर को लेकर हलचल तेज हो गई है। विधायक की जगह संगठन में खाली हुई राजनीतिक स्पेस को भरने के लिए पार्टी के भीतर कई चेहरे सक्रिय हो गए ह

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मौड़ हलके में प्रचार करते हुए एडवोकेट नवदीप सिंह जीदा।

मौड़ हलके में प्रचार करते हुए एडवोकेट नवदीप सिंह जीदा।

किसी की नजर दिल्ली पर, कोई मान के करीबियां बढ़ा रहा मौड़ में दावेदारों के बीच असली मुकाबला स्थानीय संगठन के साथ-साथ ऊपर तक पहुंच बनाने का भी है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कुछ नेता दिल्ली में बैठे पार्टी नेताओं से संपर्क साध रहे हैं, जबकि कुछ की कोशिश मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ अपने राजनीतिक संबंध मजबूत करने की है। ऐसे में आने वाले दिनों में हलका इंचार्ज की नियुक्ति पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन का संकेत भी दे सकती है। जिसे यह जिम्मेदारी मिलती है, उसके लिए 2027 की टिकट की दौड़ में स्वाभाविक रूप से बढ़त बनने की संभावना रहेगी।

मौड़ हलके में प्रचार करते हुए डॉ. राजू ढड्डे

मौड़ हलके में प्रचार करते हुए डॉ. राजू ढड्डे

राजनीतिक जगह को लेकर अंदरखाने मुकाबला शुरू मौड़ में अभी तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन सात चेहरों की बढ़ती सक्रियता ने साफ कर दिया है कि माइसरखाना के बाद खाली हुई राजनीतिक जगह को लेकर अंदरखाने मुकाबला शुरू हो चुका है। हलका इंचार्ज का फैसला पार्टी के लिए महज संगठनात्मक नियुक्ति नहीं होगा। इससे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मौड़ में पार्टी के संभावित चेहरे और टिकट की दौड़ के समीकरण भी काफी हद तक प्रभावित हो सकते हैं। अब नजर पार्टी हाईकमान के फैसले पर है कि वह पुराने संगठनात्मक चेहरे पर भरोसा जताता है, सरकार के करीब माने जाने वाले चेहरे को आगे करता है या स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता को जिम्मेदारी सौंपता है।

मौड़ हलके में प्रचार करती हुई रूपिंदर कौर गिल।

मौड़ हलके में प्रचार करती हुई रूपिंदर कौर गिल।

जीदा के पास संगठन और सरकार दोनों का अनुभव दावेदारों में एडवोकेट नवदीप सिंह जीदा का नाम सबसे प्रमुखता से चर्चा में है। वह बठिंडा लोकसभा हलके के इंचार्ज हैं और पंजाब शुगरफेड के चेयरमैन भी हैं। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता होने के कारण संगठन में उनकी पहचान नई नहीं है। संगठनात्मक जिम्मेदारी और सरकार से जुड़े पद पर रहने का अनुभव उनकी दावेदारी का मजबूत पक्ष माना जा रहा है।

डॉ. राजू ढड्डे: शुरुआत से AAP के साथ डॉ. राजू ढड्डे भी मौड़ की राजनीति में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वह आम आदमी पार्टी के शुरुआती दौर से जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ उनके करीबी संबंधों की भी पार्टी हलके में चर्चा रहती है। ऐसे में उनकी दावेदारी का आधार पुराना संगठनात्मक जुड़ाव और शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच दोनों को माना जा रहा है।

महिला विंग की नेता ने भी बढ़ाई सक्रियता महिला विंग की पंजाब वाइस प्रधान रूपिंदर कौर गिल भी इस दौड़ में सक्रिय हैं। लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़ी होने के कारण संगठन में उनका अपना आधार है। महिला कार्यकर्ताओं और महिला वोटरों के बीच सक्रियता को देखते हुए वह भी हलका इंचार्ज की दौड़ में महत्वपूर्ण चेहरा बनकर उभर रही हैं।

मौड़ हलके में प्रचार करते हुए सिपी भाकर

मौड़ हलके में प्रचार करते हुए सिपी भाकर

सिपी भाकर ने बदली राजनीतिक पारी सिपी भाकर की राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग है। वह पहले कांग्रेस में रह चुके हैं और लोकसभा चुनाव 2024 से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। AAP में आने के बाद अब उन्होंने मौड़ में अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। वर्करों से संपर्क और क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाकर वह भी अपनी जगह बनाने में जुटे हैं।

बूटा सिंह संदोहा के पास ग्रामीण संगठन का आधार बूटा सिंह संदोहा लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। वह जिला परिषद के सदस्य हैं और नशे के खिलाफ काम करने वाली टीम से भी जुड़े रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में उनकी सक्रियता और लंबे समय से पार्टी संगठन में रहने का अनुभव उनकी दावेदारी का आधार है।

हिम्मत सिंह के साथ परिवार की भी राजनीतिक मौजूदगी मौड़ हलके के कोऑर्डिनेटर हिम्मत सिंह कुत्तीवाल भी मैदान में हैं। उनकी पत्नी रानी कौर जिला परिषद सदस्य हैं। यानी हलके में राजनीतिक सक्रियता के साथ परिवार की भी स्थानीय स्तर पर मौजूदगी है। यही वजह है कि उनका नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है।

मौड़ हलके में प्रचार करते हुए कोऑर्डिनेटर हिम्मत सिंह कुत्तीवाल

मौड़ हलके में प्रचार करते हुए कोऑर्डिनेटर हिम्मत सिंह कुत्तीवाल

माइसरखाना से रंजीत सिंह मठाड़ू की दावेदारी रंजीत सिंह मठाड़ू गांव माइसरखाना के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी मौजूदा सरपंच हैं। माइसरखाना क्षेत्र से स्थानीय पकड़ और पंचायत स्तर पर राजनीतिक संपर्कों के चलते उन्होंने भी अपनी सक्रियता बढ़ाई है।



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