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- Navneet Gurjar Column | Gold Significance In Indian Weddings & Society
3 घंटे पहले
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नवनीत गुर्जर
जैसे सोते वक्त आदमी “भावशून्य’ हो जाता है, वैसे ही सोने के भाव भी आम आदमी के लिए ज्यादा मायने नहीं रखते। खरीदना हो तो कितना ही महंगा हो खरीद ही लेता है।
…और न खरीदना हो तो सस्ता होने पर भी महंगा ही लगता है। भाव यहां भी शून्य! फिर भी सामाजिक प्रतिष्ठा या विवाद की बड़ी जड़ सोना ही होता है।
“फ्रीडम एट मिडनाइट’ से आज तक सोना बड़ा सोणा है। लेरी कॉलिन्स और डॉमिनिक लेपियरे की यह किताब कई वजहों से विवाद में आई। उनमें एक सोना भी था। सोने का सिंहासन। इसमें कहा गया कि उड़ीसा के महाराजा की शैय्या सोने की है और उसकी बनावट ब्रिटिश महारानी के सिंहासन से मिलती-जुलती है।
हो गया विवाद। बहरहाल, जैसे कभी शेयर चढ़ते थे, अब सोना चढ़ रहा है। बाजार कांप रहे हैं और घरों में विवाद है। बढ़ते भाव देखकर कोई कहता है- आज ही खरीद लो।
कोई कहता है- और सस्ता होगा। बे-भाव का सोना। घर-घर में भाव।
प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि फिलहाल सोना मत खरीदिए। दरअसल, वे इसे अंतरराष्ट्रीय संदर्भ से जोड़ कर देख रहे हैं। सोना चूंकि बड़ी मात्रा में आयात होता है और उसकी कीमत डॉलर में चुकानी होती है, इसलिए प्रधानमंत्री की अपील का सीधा-सा मतलब विदेशी मुद्रा भंडार को बनाए या बचाए रखने का है। सही भी है।
लाखों रुपए खर्च करके हम सोने के गहने खरीदते हैं। शो-रूम से निकलते ही लाख-पचास हजार जो बनवाई होती है, वो तो बट्टे में ही चली जाती है। यहां भी कई तरह की दिक्कतें हैं। हॉल मार्क न हो तो 22 कैरेट का गहना बेचते वक्त सत्तर-अस्सी प्रतिशत ही खरा निकलता है।
सोने को लेकर एक कवित्त है- “गढ़ो ऐसो सोना, जास्यूं कान जो टूटे, प्रेम कर्यो, कुछ बैर बसायो!’ मतलब ऐसा सोना किस काम का जिससे कान छिदवाना पढ़े? प्रेम किया है या दुश्मनी निकाली! बहरहाल, हिंदुस्तान के संदर्भ में देखें तो “सोने’ के बिना काम नहीं चलता।
जिंदगी भी नहीं। दिनभर की सक्रियता की जड़ और कई तरह की हाई-प्रोफाइल बीमारियों का इलाज “सोने’ में है। बीमारियां दूर रखने के लिए भर-नींद सोना जरूरी है! किसी जमाने में गले के दर्द और हाथ की मोच के लिए सोने का हार या कंगन जरूरी होते थे।
यही वजह है कि सोना चढ़ते-चढ़ते भी कई भाव जगा रहा है। हमारे देश के बैंक लॉकर्स में लाखों टन सोना पड़ा नींद निकाल रहा है। इसे खरीद तो लिया जाता है लेकिन कुछ मौकों पर गहने पहनने के बाद लॉकर्स की भेंट चढ़ा दिए जाते हैं।
कितनी ही बड़ी आर्थिक मुसीबत आ जाए, सोने के गहने न तो कोई बेचता और न ही कोई बेचने देता। लेकिन हर मौके पर खरीदना जरूरी होता है।
हिंदुस्तानी शादियों में तो सोने का वजन ही बताता है कि कितनी शानदार शादी की या हुई। खैर, कोई सोना चाहता है। कोई उसकी लंका बना लेता है।
लंका से याद आया एक विकट सवाल कि- लंका तो हनुमान जला आए थे। फिर राजतिलक में विभीषण को राम ने कौन-सी लंका सौंपी? जली हुई या मरम्मत कराई हुई?
जवाब उतना ही आसान कि- ताप पाकर सोना जलता नहीं, उसमें और निखार आता है! जिनकी कुव्वत सोने से मेल नहीं खाती, वे बेचारे, गुलजार की तरह कंचे रखकर भी अपनी जेब में आसमान समेट लेते हैं।
कुछ इस तरह- “सैकड़ों बार गिने थे मैंने, जेब में नौ ही कंचे थे! एक जेब से दूसरी जेब में रखते- रखते इक कंचा खो बैठा हूं! न हारा, न गिरा कहीं पर- प्लूटो मेरे आसमान से गायब है!’
अब सोना चढ़ रहा है… जैसे कभी शेयर चढ़ते थे, अब सोना चढ़ रहा है। बाजार कांप रहे हैं और घरों में विवाद है। बढ़ते भाव देखकर कोई कहता है- आज ही खरीद लो। कोई कहता है- और सस्ता होगा। बे-भाव का सोना। घर-घर में भाव। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि फिलहाल सोना मत खरीदिए। वे इसे अंतरराष्ट्रीय संदर्भ से जोड़ कर देख रहे हैं।

