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PWD मंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट कोर्ट में अटका:तलाकी गेट पर बने गुंबद का मालिक सामने आया, कहा-ये मेरी प्रॉपर्टी, कोर्ट में स्टे




हिसार में पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा के शहर को जाम मुक्त करवाने के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक सिक्सलेन परियोजना हिसार कोर्ट में अटक गई है। तलाकी गेट के पास बने गुंबद को सेक्टर 14 निवासी नरेंद्र चौधरी ने अपना बताया है। कब्जाधारक द्वारा स्टे ऑर्डर लेने के बाद परियोजना अधर में लटक गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस हिस्से को हटाने पर पूरी सड़क सिक्सलेन हो सकती थी, लेकिन फिलहाल इसी कारण रोजाना हजारों वाहन चालकों को जाम की समस्या झेलनी पड़ रही है। शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए मंत्री द्वारा गठित डी-कंजेक्शन कमेटी ने शहर की प्रमुख सड़क को चरणबद्ध तरीके से सिक्सलेन करने का प्रस्ताव तैयार किया था। इस पर निगम हिसार की आयुक्त सी. जयश्रीधा का कहना है कि अधिकारियों ने गुंबद वाले हिस्से को लेकर पत्राचार किया था। जांच में पता चला कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर स्टे ऑर्डर मिला हुआ है। अदालत के फैसले के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब जानिए क्या है ये सिक्सलेन प्राेजेक्ट तीन चरणों में बनना है प्रोजेक्ट : दरअसल, मंत्री ने अपने गृह जिले में शहर की जाम व्यवस्था सुधारने के लिए सिक्सलेन प्रोजेक्ट की रूपरेखा बनाई थी। पहले चरण में टाउन पार्क से रानी लक्ष्मीबाई चौक, दूसरे चरण में सिरसा चुंगी से बस अड्डा और तीसरे चरण में बस अड्डे से नागौरी गेट गुरुद्वारा तक सड़क को सिक्सलेन करना था। एक चरण की औपचारिकताएं पूरी : टाउन पार्क से रानी लक्ष्मीबाई चौक तक परियोजना की सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और संबंधित सरकारी विभागों से सहमति भी मिल गई है। सिरसा चुंगी से बस अड्डे तक के हिस्से के लिए विभिन्न विभागों से एनओसी मांगी गई है। तीसरे चरण में अटका : वहीं, तीसरे चरण में तलाकी गेट पर गोलाकार आकृति वाला दो मंजिला भवन सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। इस भवन के ऊपरी और निचले हिस्से में सामान रखा हुआ है। नगर निगम ने कुछ समय पहले कब्जाधारक से जमीन के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज मांगे थे। इसके बाद कब्जाधारक नरेंद्र चौधरी ने अदालत से स्टे ऑर्डर प्राप्त कर लिया। नगर निगम ने स्वामित्व के दस्तावेज मांगे तो यह जवाब मिला सेक्टर-14 निवासी नरेंद्र चौधरी को नगर निगम ने 13 मई 2025 को स्वामित्व संबंधी साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया था। उन्होंने 15 मई को अपने अधिवक्ता के माध्यम से जवाब देते हुए 16 अप्रैल 1904 का उर्दू में लिखा दस्तावेज, 15 अगस्त 1912 और 8 अप्रैल 1913 के दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके साथ नगर पालिका हिसार की ओर से वर्ष 1963 में स्वीकृत नक्शा भी संलग्न किया गया। इस भूमि को लेकर सिविल जज सुमित कुमार की अदालत ने 16 जुलाई को स्टे ऑर्डर जारी कर दिया। इस प्रोजेक्ट में ये भी हैं अड़चनें… क्लॉथ मार्केट की स्लिप रोड पर भी नहीं बनी सहमति : बस अड्डे के पास क्लॉथ मार्केट के एक हिस्से का उपयोग कर स्लिप रोड बनाने का प्रस्ताव भी लंबित है। इसका उद्देश्य जाम की समस्या कम करना था, लेकिन नगर निगम अब तक इस पर सहमति नहीं बना पाया है। क्लॉथ मार्केट के दुकानदारों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था, जिसके चलते करीब एक साल से यह योजना भी आगे नहीं बढ़ सकी। एक साल में फुट ओवरब्रिज भी नहीं हटा पाया विभाग : डी-कंजेक्शन कमेटी ने वर्ष 2025 की बैठक में बस अड्डे के पास बने फुट ओवरब्रिज (FOB) को हटाने का निर्णय लिया था। इसकी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (PWD) को सौंपी गई थी, लेकिन करीब एक वर्ष बाद भी विभाग टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका। एफओबी को भी यातायात में बाधा माना गया है।



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