Headlines

Rajasthan Civic Polls Controversy | Police Raid Resorts Badebandi Dispute


राजस्थान के 273 निकायों में सोमवार को मेयर, सभापति और अध्यक्ष चुने जाएंगे। बाड़ेबंदी से निकलकर वो पार्षद वोट डालेंगे, जिन्हें जीत के बाद बस और गाड़ियों में बैठाकर होटलों में भेजा गया था।

.

कांग्रेस ने निर्दलीयों पर पुलिस प्रशासन का दबाव बनाने, होटलों में घुसने और करोड़ों रुपए के ऑफर के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने चेतावनी भी दी कि खून-खराबा हुआ तो जिम्मेदार सरकार और पुलिस होगी।

वहीं, पूर्व CM अशोक गहलोत ने भी कहा- बोर्ड बनाने में मशीनरी झोंक दी गई। बीजेपी ने आरोपों के जवाब में कहा है- कांग्रेस खुद ही बाड़ेबंदी कर रही है, पुलिस तभी जाती है जब परिजन पार्षदों को बंधक बनाने या उनके लापता होने की शिकायत करते हैं।

ऐसे में सवाल है कि जीते हुए पार्षदों की बाड़ेबंदी सुरक्षा है या स्वतंत्र मताधिकार पर दबाव? क्या जीते हुए पार्षदों को होटल और रिसॉर्ट में ले जाना सही है? चुनाव आयोग इसे कैसे देखता है? मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए ऐसे ही सवालों के जवाब…

निकाय चुनावों का गणित और बाड़ेबंदी की वजह

राजस्थान में 9 और 11 सितंबर को निकाय चुनावों में पार्षद पद के लिए मतदान हुआ था। 14 सितंबर को ज्यादातर के नतीजे आ गए। कुछ के नतीजे री पोलिंग के बाद आ गए।

नतीजों के बाद 169 निकायों में भाजपा आगे तो 110 निकायों में कांग्रेस आगे रही, वहीं 30 के करीब निकायों में निर्दलीय बोर्ड बनाने की स्थिति में आ गए थे।

10 नगर निगमों में से जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला तो वहीं बीकानेर में कांग्रेस जीती। अजमेर, जोधपुर, भरतपुर, पाली और अलवर में निर्दलीय अहम भूमिका में आ गए।

हालांकि, इन परिणामों के बाद भी कई शहरों में 1-2 वोट से भी बोर्ड पलट सकता है। इसलिए पोलिंग खत्म होते ही न सिर्फ दोनों पार्टियों ने बल्कि कई जगहों पर बागी बने निर्दलीयों ने एक ही काम शुरू किया, पार्षदों को सेफ जगह ले जाकर बाड़ेबंदी में बंद करना। इस का नाम रखा गया प्रशिक्षण वर्ग।

सीकर की लोसल नगर पालिका के कांग्रेस पार्षद बाड़ाबंदी में हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यहां रविवार सुबह बीजेपी कार्यकर्ताओं ने घुसने की कोशिश की।

सीकर की लोसल नगर पालिका के कांग्रेस पार्षद बाड़ाबंदी में हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यहां रविवार सुबह बीजेपी कार्यकर्ताओं ने घुसने की कोशिश की।

निकाय प्रमुख के चुनाव से पहले बाड़ेबंदी की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। दैनिक भास्कर ने लीगल एक्सपर्ट्स अनिल सोनी से बात कर बाड़ेबंदी से जुड़े सवालों के जवाब जाने….

सवाल : जीते हुए पार्षदों की बाड़ेबंदी सुरक्षा है या स्वतंत्र मताधिकार पर दबाव?

जवाब : सुरक्षा तब कहलाती है, जब क्रॉस-वोटिंग, खरीद-फरोख्त और धमकी से बचाव के लिए चुना हुआ पार्षद अपनी खुद की सहमति से किसी सुरक्षित जगह ठहरे।

परिवार उसके साथ हो, उसे बाहर आने-जाने और फोन पर बात करने की स्वतंत्रता बनी रहे और वोटिंग के दौरान वो अपनी मर्जी से वोट डाल सके। पार्टियां ये सब पार्षदों का प्रशिक्षण वर्ग, एकजुटता और बोर्ड बचाने के नाम पर करती हैं।

इस मामले में कानून बेहद साफ है, जनप्रतिनिधि को उसकी मर्जी से होटल या कहीं ले जाना अपने आप में अपराध नहीं हैं। हालांकि उसे रोकना, डराकर वोट तय कराना, पैसे या मुकदमे की धमकी देना उस के स्वतंत्र मताधिकार पर हमला है।

निकाय प्रमुख का चुनाव जनता नहीं, पार्षद करते हैं। इसलिए पार्षद का स्वतंत्र मत ही इस चुनाव की पूरी वैधता है।

सवाल : क्या जीते हुए पार्षदों को होटलों और रिसोर्ट में ले जाना सही हैं? चुनाव आयोग इसे कैसे देखता हैं ?

जवाब : आयोग जीते हुए पार्षदों के होटल या रिसोर्ट में में ठहरने को अपने आप में प्रतिबंधित नहीं करता। कोई सामान्य आदेश नहीं है कि पार्षद होटल या रिसॉर्ट नहीं जा सकते।

हालांकि आयोग इन बातों पर नजर रखता है कि कहीं आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन न हो। मतदाता या सदस्य को अनुचित प्रभाव, लालच देकर या डर दिखाकर भ्रमित न किया जाए।

प्रशासन का दुरुपयोग न हो, खरीद-फरोख्त या हॉर्स-ट्रेडिंग न हो और किसी भी पार्षद मतदाता से जबरदस्ती न हो पाए। अगर ऐसी कोई शिकायत आए तो आयोग रिटर्निंग ऑफिसर या जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांग सकता है, पर्यवेक्षक भेज सकता है।

साबित होने पर आयोग चुनाव प्रक्रिया पर रोक, रद्द या अभियोजन की सिफारिश तक कर सकता है।

सवाल : क्या पुलिस पार्षदों का पता लगाने के लिए होटल/रिसोर्ट के गेट तोड़कर अंदर घुस सकती है?

जवाब : पार्षद चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं, अपराधी नहीं। दूसरा- होटल-रिसोर्ट प्राइवेट प्रॉपर्टी हैं, मैनेजमेंट खुद दरवाजा खोले तो पुलिस पूछताछ या तलाशी के लिए अंदर जा सकती है। अगर बंधक, लापता व्यक्ति या अपराध की आशंका हो तो मजिस्ट्रेट की ओर से जारी सर्च वारंट पर पुलिस तलाशी ले सकती है।

इसके अलावा यदि होटल के अंदर किसी की जान खतरे में हो, कोई अपराध कारित हो रहा हो, या व्यक्ति को जबरन रोका जा रहा हो तब भी बिना वारंट भी प्रवेश हो सकता है। हालांकि, बाद में कारण दर्ज करना पड़ता है।

बिना वारंट या बिना पेनिक कंडीशन के ताला तोड़ना, सामान छीनना, लोगों को जबरन ले जाना भी नहीं किया जा सकता हैं, एक पार्टी के होटल में तलाशी और दूसरी पार्टी की होटल में सुरक्षा यह सीधे- सीधे पक्षपात का आरोप बनता है।

सवाल: क्या पार्षदों की वोटिंग सच में गुप्त रहेगी?

जवाब : चुनाव आयोग के नियमानुसार गुप्त मतदान होता है। हालांकि, कई पार्टियां अपने पार्षदों को बैलेट पर मतदान करने के तरीके भी कोड वर्ड में बतताी हैं, ताकि बाद में उस तरीके का मिलान कर ये पता लगाया जा सके कि कहीं कोई क्रॉस वोटिंग तो नहीं हुई है।

अब 3 घटनाओं से समझिए- रिसॉर्ट पॉलिटिक्स में क्या-क्या चल रहा है

1. झुंझनू : कांग्रेस की बाड़ाबंदी में पहुंचे 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी

मलसीसर नगर पालिका में फतेहपुर बाइपास रोड स्थित होटल में 16 सितंबर को 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम तलाशी लेने पहुंची। मंडावा विधायक रीटा चौधरी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने दबाव में कांग्रेस के जीते पार्षदों को उठाने की कोशिश की, ये जनादेश को दबाने की कोशिश है।

मलसीसर (मंडावा), झुंझुनूं में कांग्रेस पार्षदों की बाड़ाबंदी वाली एक होटल में तलाशी लेती पुलिस।

मलसीसर (मंडावा), झुंझुनूं में कांग्रेस पार्षदों की बाड़ाबंदी वाली एक होटल में तलाशी लेती पुलिस।

डीएसपी नरेंद्र सिंह ने किसी राजनीतिक दबाव से इनकार किया। पुलिस के मुताबिक वार्ड नंबर 3 के पार्षद संत कुमार के परिजनों ने SDM को उनके बंधक बनाए जाने की शिकायत दी थी। शिकायत में अलग-अलग जगहों की लोकेशन भी बताई गई थी। इसी आधार पर पुलिस ने होटल में सर्च अभियान चलाया।

2. नागौर : कुचेरा में पार्षद जीजा के किडनैप होने की शिकायत, पुलिस पहुंची

कुचेरा नगर पालिका के वार्ड नंबर 9 से जीते कांग्रेस पार्षद निंबाराम और उनकी पत्नी के लापता होने और अपहरण की शिकायत साले महेंद्र ने पुलिस को दी।

मुंडवा सीओ धर्म पूनिया, कुचेरा थानाधिकारी हबीब सहित पुलिस का जाब्ता कांग्रेस समर्थित पार्षदों की बाड़ेबंदी वाले स्थान पर पहुंचा। वहां काफी गहमा गहमी हुई। इसी दौरान वार्ड 9 के विजेता पार्षद निंबाराम का सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, वीडियो में पार्षद निम्बाराम ने खुद को सुरक्षित बताते हुए कहा कि उन्हें किसी प्रकार का खतरा नहीं है।

इससे एक दिन पहले कुचेरा नगरपालिका चेयरमैन पद के कांग्रेस प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा ने भी ये आरोप लगाया था कि पार्षदों के शपथ ग्रहण के बाद लौटते समय उनकी गाड़ियों का पीछा किया गया।

कांग्रेस ने कुचेरा नगरपालिका अध्यक्ष प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा पर हमला और पार्षदों को जबरन ले जाने के प्रयास के आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस ने कुचेरा नगरपालिका अध्यक्ष प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा पर हमला और पार्षदों को जबरन ले जाने के प्रयास के आरोप लगाए हैं।

3. अलवर : कांग्रेस की बाड़ेबंदी में पहुंचे भाजपाई

अलवर नगर निगम में बोर्ड बनाने को लेकर चल रही सियासी खींचतान के भाजपा के कुछ पार्षद जयपुर के तूंगा स्थित एक रिसॉर्ट पहुंचे। जानकारी के मुताबिक यहां कांग्रेस पार्षदों की बाड़ेबंदी थी।

अलवर से आए भाजपा पार्षद वार्ड 22 से निर्दलीय जीते कुलदीप मीणा को अपने साथ बाहर ले गए। इसके बाद जयपुर, अलवर और दौसा जिलों की पुलिस मौके पर पहुंची।

पुलिसकर्मी कुलदीप मीणा को तुंगा थाने लेकर गए। यहां कुलदीप ने तबीयत खराब होने की बात कही और घर जाने की इच्छा जताई। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

….

निकाय चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…

सीकर- सर्च वारंट लेकर कांग्रेस की बाड़ाबंदी में पहुंची पुलिस:परिजनों को पार्षद से मिलाया; बीजेपी MLA की पत्नी ने बाड़ेबंदी में बनाया दाल-बाटी-चूरमा

राजस्थान के पांच नगर निगम सहित 273 निकायों में सोमवार को मेयर, चेयरमैन और अध्यक्ष के लिए वोटिंग होगी। वहीं, 2 नगर निगम समेत 32 निकायों में निर्विरोध मेयर-चेयरमैन बन चुके हैं। पूरी खबर पढ़िए…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *