जोधपुर राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग की निर्माण गुणवत्ता और संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर चल रही स्वतः संज्ञान याचिका पर कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ ने सोमवार को करीब तीन घंटे तक सुनवाई की। वह
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सुनवाई के दौरान बिल्डिंग के डोम सहित अन्य हिस्सों की स्थिति, आईआईटी मुंबई, आईआईटी जोधपुर की रिपोर्ट और निर्माण गुणवत्ता से जुड़ी एफआईआर की जांच पर चर्चा हुई।
हाईकोर्ट ने जांच की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए पुलिस और संबंधित विभागों से जवाब मांगा। कोर्ट ने एसओजी के डीजी को निर्देश दिए कि बिल्डिंग निर्माण में यदि कोई अधिकारी या व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही 15 सितंबर को जांच की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
राजस्थान की किसी अदालत से नहीं मिलेगा अग्रिम संरक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा-
इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों या अन्य संबंधित लोगों को पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए राजस्थान की किसी भी अदालत से अग्रिम संरक्षण नहीं दिया जाएगा।

मामले में ऐसा संरक्षण केवल राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ अथवा सुप्रीम कोर्ट ही दे सकेगा। कोर्ट ने आदेश की गंभीरता से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा- केवल चार्जशीट पेश करना ही कार्रवाई का अंतिम चरण नहीं माना जाएगा, बल्कि निर्माण के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय करनी होगी।

2023 की एफआईआर पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस से पूछा- साल 2023 में भवन की गुणवत्ता से संबंधित एफआईआर दर्ज होने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने कहा- यदि जांच में निर्माण से जुड़े अधिकारियों या अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। करीब 3 साल बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
मुख्य सचिव और डीजीपी नहीं हुए पेश
सुनवाई में मुख्य सचिव और डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना था, लेकिन दोनों अधिकारी कोर्ट में नहीं आ सके। मुख्य सचिव की ओर से एसीएस प्रवीण गुप्ता और डीजीपी की ओर से डीजी एसओजी आनंद श्रीवास्तव उपस्थित रहे। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर मुख्य सचिव और डीजीपी राजीव कुमार शर्मा को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद भी मौजूद रहे।


डोम क्षेत्र में प्रवेश पर रोक
आईआईटी की रिपोर्टों में हाईकोर्ट भवन के डोम क्षेत्र सहित अन्य हिस्सों की संरचनात्मक स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। डोम क्षेत्र में खतरे की आशंका को देखते हुए वहां आम लोगों और एडवाेकेट के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
सुरक्षा के लिए 24 घंटे निगरानी वाला कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। आईआईटी मुंबई की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद बिल्डिंग की मरम्मत और तकनीकी समाधान को लेकर आगे निर्णय होगा।
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