राजस्थान में पिछले 16 साल के इतिहास में इस बार सबसे कमजोर मानसून रहा है। कोटा-झालावाड़-बांसवाड़ा जैसे जिलों में जहां बारिश से नदियां उफान पर रहती थीं।
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कई बार बाढ़ जैसे हालात बन जाते थे, वहां भी आंकड़े माइनस में हैं। मौसम विभाग की मानें तो 30 सितंबर तक मानसून विदा लेगा, उससे पहले तेज बारिश के कोई आसार नहीं है।
मानसून की इस बेरुखी का असर बिजली, खेती जैसे सेक्टर्स पर पड़ना तय माना जा रहा है। खरीफ की पैदावार कम होने की आशंका है। वहीं, सितंबर में भी बिजली की डिमांड गर्मी के सीजन की तरह है। पढ़िए- मानसून 2026 का एनालिसिस….
16 साल में सबसे कमजोर मानसून
राजस्थान में मानसूनी सीजन में औसत बारिश का आंकड़ा 435.6 मिलीमीटर है। लेकिन इस साल अब तक 345.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। ये सामान्य से 18 फीसदी कम है।
- 16 साल पहले भी कुछ ऐसे ही हालात देखने को मिले थे। साल 2009 में तब सामान्य से 42.8 फीसदी कम बारिश रिपोर्ट की गई थी।
- साल 2018 में औसत से 9.6 फीसदी बारिश कम दर्ज हुई थी। लेकिन उसके बाद लगातार 7 साल तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की जा रही थी।
- साल 2024 और 2025 में तो रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई थी। साल 2024 में सामान्य से 55 फीसदी और साल 2025 में 64 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।

बांसवाड़ा, जालोर और पाली में सबसे कम बारिश
एक-दो जिलों को छोड़ दें तो ज्यादातर में हालात एक जैसे ही हैं। जो जिले अच्छी बारिश के लिए जाने जाते हैं (झालावाड़, बांसवाड़ा, बारां, कोटा), वहां भी इस बार बारिश के लिए तरसना पड़ा है।
सबसे कम बारिश जालोर और पाली जिले में हुई है, यहां सामान्य से भी 51 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।
बांसवाड़ा जिले में 47 फीसदी कम बारिश हुई है। इसके अलावा सिरोही जिले में सामान्य से 44 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।
जैसलमेर जिले में 48 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं, अलवर में सामान्य और भरतपुर में सामान्य से 30 फीसदी ज्यादा दर्ज की गई है।
दौसा में 12, धौलपुर में 30 फीसदी, झुंझुनूं में 6 फीसदी और नागौर में सामान्य से 5 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

अगस्त में सबसे कम बारिश
मौसम विभाग के अनुसार मानसून सीजन (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में सबसे कम बारिश अगस्त में दर्ज की गई है।
जून में सामान्य से 17 फीसदी ज्यादा बारिश थी। लेकिन उसके बाद लगातार मानसून कमजोर होता चला गया।
जुलाई में सामान्य से 19 फीसदी तो अगस्त में 33 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।
सितंबर (18 सितंबर तक) में 30 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। यह स्थिति तब है जब बुधवार-गुरुवार को कई जिलों में बारिश हुई।

तापमान बढ़ने से बिजली की डिमांड बढ़ी
कमजोर बारिश के चलते सितंबर माह में प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से बढ़ा हुआ तापमान दर्ज हुआ है। बाड़मेर में 13 सितंबर को 40.8 दर्ज किया गया था।
इससे बिजली की खपत काफी बढ़ी है। बिजली विभाग का दावा है कि पिछले साल की तुलना में इस बार एक हजार लाख यूनिट बिजली की मांग बढ़ी है। ये मांग कृषि के साथ-साथ घरेलू बिजली से जुड़ी है। एक्सपर्ट इसे बढ़े हुए तापमान से जोड़कर देख रहे हैं।
बारिश की कमी से खरीफ उत्पादन पर असर की आशंका
राजस्थान में कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों के उत्पादन में कमी आने की आशंका है। ग्वार, मूंग और मोठ की पैदावार में गिरावट हो सकती है। इसका सबसे अधिक असर पश्चिमी राजस्थान के जिलों में दिखाई दे रहा है।
इस बार खरीफ की बुआई का लक्ष्य 165.39 लाख हेक्टेयर रखा गया था, लेकिन कमजोर मानसून के चलते 154 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो पाई।
कृषि वैज्ञानिक योगेश शर्मा ने बताया कि कई इलाकों की फसलें बारिश पर ही निर्भर करती हैं, इस बार वहां हालात चिंतनीय हैं। हालांकि, अभी सभी जिलों में फसलों के प्रभावित होने के अधिकारिक आंकड़े नहीं आए हैं, लेकिन बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होना तय है।
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