दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट के बीच प्रतियोगी परीक्षा के पेपर लीक करने वालों के खिलाफ केंद्र सरकार के कानून में सख्त संशोधन को केबिनेट में मंजूरी मिल गई है। अब इस संशोधन बिल को लोकसभा में रखा जाएगा।
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राजस्थान में 2023 के विधानसभा चुनाव में पेपर लीक ही सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना था। खास बात यह है कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानून राजस्थान में है।
फिर भी अब तक किसी भी आरोपी को कोर्ट से सजा नहीं हुई है। साल 2015 के बाद से अब तक 600 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
एक्सपट्र्स के अनुसार, आरोपियों को जल्दी सजा तक पहुंचाने के लिए अब बस यहां फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत है। राजस्थान के अलावा पेपर लीक मामलों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड के कानून में भी उम्रकैद का प्रावधान है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
राजस्थान में 2023 से पेपर लीक और नकल विरोधी संशोधन कानून लागू हो चुका है। वहीं केंद्र में संशोधन को सरकार सोमवार को संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है।
राजस्थान के पेपर लीक मामलों में RPSC और कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित सभी तरह की प्रतियोगी परीक्षाएं शामिल हैं।
वहीं, केंद्रीय कानून में UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग परीक्षाएं (IBPS) और NTA की ओर से आयोजित NEET, JEE, और UGC-NET जैसी बड़ी प्रवेश व पात्रता परीक्षाएं शामिल हैं।

राजस्थान में पिछली कांग्रेस सरकार दवाब में लाई थी संशोधन बिल
राजस्थान में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बनाने के लिए 21 जुलाई 2023 को संशोधन बिल (राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2023) विधानसभा में पारित हो गया था।
इसके बाद 5 अगस्त 2023 को राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही इसने कानूनी रूप ले लिया। पिछली सरकार में 2021 में रीट 2021 व सब-इंस्पेक्टर और 2022 में सीनियर टीचर, कॉन्स्टेबल भर्ती, हाई कोर्ट LDC भर्ती सहित कई परीक्षाओं में पेपर लीक हुए।
वहीं RAS जैसी परीक्षा के बाद ओएमआर शीट तक बदलने के मामले को ACB ने पकड़ा। पेपर लीक के मामले में बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को जमकर घेरा हुआ था।
पिछली सरकार काफी दबाव में थी और चुनाव भी नजदीक आते जा रहे थे। ऐसे में सरकार पेपर लीक और नकल रोकने के लिए राजस्थान परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 1992 में 2023 में संशोधन बिल लेकर आई थी।
पेपर लीक, नकल या गलत तरीके से नौकरी पाने वाले 190 कर्मचारी हटाए
राजस्थान में पिछले ढाई सालों में पेपर लीक को लेकर कई कार्रवाई हुई हैं। सरकार में आते ही सीएम भजनलाल शर्मा ने पेपर लीक मामलों की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया।
सरकार ने पेपर पाकर नौकरी पर लगने वाले, नकल करके या गलत सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले करीब 190 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इन्हें बर्खास्त कर सरकार ने इनकी सेवा समाप्त कर दी है।
सरकार ने 135 शारीरिक शिक्षकों को भी नियुक्ति रद्द की, इन्होंने फर्जी खेल सर्टिफिकेट लगाए थे। सरकार की रेडार पर 500 सरकारी कर्मचारी ओर हैं, इनके खिलाफ जांच जारी है।

615 गिरफ्तार, सजा 1 को भी नहीं
पेपर लीक करने वाले या ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे करीब 570 लोग यहां गिरफ्तार हो चुके हैं। यदि 2015 से अब तक के आंकड़े देखें तो पेपर लीक मामलों में 615 से भी अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी है।
लेकिन कोर्ट से किसी को भी अब तक कोई सजा नहीं हुई है। मामलों में सुनवाई जारी है। राजस्थान में पिछले ढाई साल में अब तक 380 से ज्यादा छोटी-बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित हो चुकी हैं।
लेकिन सरकार की ओर से की गई सख्ती के चलते पेपर लीक की घटनाएं काफी हद तक थम गई हैं। हाल ही राजस्थान सरकार ने दावा भी किया कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 17 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ।
राज्य सरकार की सबसे बड़ी कार्रवाई में सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक में की गई थी। अकेले इस मामले में 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसमें आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा और रामूराम राईका को भी गिरफ्तार किया गया।
दो बड़े किरदार
बाबू लाल कटारा : चलती बस में पेपर सॉल्व
उदयपुर जिले के बेकरिया थाना पुलिस ने 24 दिसंबर 2022 को एक बस को पकड़ा था। पेपर लीक के सरगना चलती बस में द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के 49 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पेपर हल करवा रहे थे।
इसके बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ और तार तत्कालीन आरपीएससी के सदस्य बाबूलाल कटारा से जुड़ गए। ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती-2022 पेपर लीक मामले में कटारा को इस परीक्षा के पेपर और उत्तर कुंजी तैयार करने का दायित्व मिला था।
उसने पेपर लीक कर दिया। कटारा के घर से 51.20 लाख रुपए नकद और 541 ग्राम सोने के 9 गहने बरामद हुए थे।

एसओजी ने 2023 में RPSC के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा, उसके भांजे विजय डामोर और ड्राइवर को गिरफ्तार किया।
रामूराम राइका : बेटे-बेटी के लिए पेपर लिया
रामूराम राईका को 1 सितंबर 2024 को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने 5 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। राईका पर आरोप है कि उसने निलंबित RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा से अपने बेटे और बेटी के लिए एसआई भर्ती परीक्षा से पहले पेपर लिया था। रामूराम राईका 2018 से 2022 तक आरपीएससी मेंबर रहा था।

पेपर लीक मामले में आरपीएससी (RPSC) के पूर्व सदस्य रामूराम राईका को 2024 में SOG ने गिरफ्तार किया था।
पेपर लीक में सजा जल्दी क्यों नहीं मिल पाती…
एक्सपर्ट के अनुसार पेपर लीक मामलों में आरोपियों की संख्या काफी अधिक होती है। ये गैंग के रूप में होते हैं। एक के बाद दूसरा, तीसरा…ऐसे चेन जुड़ी हुई रहती है।
हर पेपर लीक मामले में आरोपियों की संख्या काफी अधिक होने के कारण जांच भी लगातार चलती रहती है। कोर्ट में सुनवाई भी लगातार चलने के कारण काफी समय लगता है। पिछले कुछ सालों में पकड़े गए आरोपियों की संख्या भी यहां काफी अधिक है।
पेपर लीक के आरोपियों को जल्दी सजा के लिए कुछेक ही विकल्प हो सकते हैं। जैसे सरकार को फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामलों को ले जाना चाहिए, जिससे कोर्ट ऐसे मामलों पर ही फोकस करते हुए काम करे।

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