17 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र
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रेखा आज अपना 72वां जन्मदिन मना रही हैं।
रेखा की जिंदगी जितनी ग्लैमरस दिखती है, उसके पीछे उतने ही दर्दनाक अध्याय छिपे हैं। बचपन में पिता जेमिनी गणेशन की बेरुखी मिली, तो परिवार की आर्थिक मजबूरियों ने किशोर उम्र में ही फिल्मों में काम करने पर मजबूर कर दिया। बड़े पर्दे पर सफलता मिली, लेकिन निजी जिंदगी लगातार सवालों के घेरे में रही।
विनोद मेहरा से कथित शादी, अमिताभ बच्चन से रिश्ते की चर्चाएं और 1990 में पति मुकेश अग्रवाल की आत्महत्या के बाद लगे गंभीर आरोपों ने उन्हें भीतर तक झकझोरा। इन मुश्किलों के बावजूद रेखा ने खुद को संभाला और हिंदी सिनेमा में ऐसी पहचान बनाई, जो आज भी कायम है।
जन्मदिन पर पढ़िए रेखा की जिंदगी के 5 ऐसे अध्याय, जिन्होंने उनकी शख्सियत को प्रभावित किया।


पिता ने बेटी को कभी अपना नहीं समझा, स्कूल में देखते रहे लेकिन पहचान तक नहीं मिली
रेखा का जन्म 10 अक्टूबर 1954 को तमिल सिनेमा के मशहूर अभिनेता जेमिनी गणेशन और अभिनेत्री पुष्पवल्ली के घर हुआ था। लेकिन पिता की मौजूदगी उनके बचपन का हिस्सा नहीं बन सकी। सिमी गरेवाल के शो ‘रेंडेजवू विद सिमी गरेवाल’ में रेखा ने अपने बचपन और पिता के बारे में बात की थी।
उन्होंने बताया था कि जब वह बहुत छोटी थीं, तभी उनके पिता उनकी जिंदगी से चले गए थे। उन्हें याद नहीं था कि उनके पिता कभी घर में रहे हों। रेखा ने अपने माता-पिता के रिश्ते को रोमांटिक बताया था और कहा था कि उनकी मां अपने पिता के प्यार में बेहद डूबी हुई थीं।
रेखा के लिए पिता की पहली याद भी किसी पिता-पुत्री के रिश्ते जैसी नहीं थी। उनके कई सौतेले भाई-बहन एक ही स्कूल में पढ़ते थे। जेमिनी गणेशन कभी-कभी अपने दूसरे बच्चों को स्कूल छोड़ने आते थे। रेखा ने बताया कि उन्हें दूर से देखकर उनके मन में आया था- ‘ओह, ये अप्पा हैं।’
लेकिन रेखा के मुताबिक, उनके पिता ने उन्हें नोटिस तक नहीं किया। उन्होंने बताया कि उन्हें उनसे मिलने का मौका कभी नहीं मिला और उन्हें नहीं लगता कि उनके पिता ने उस वक्त उन्हें देखा भी था।
बचपन में रेखा ने इस कमी को किस तरह महसूस किया, इसका अंदाजा उनकी एक मार्मिक बात से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि शायद उन्होंने इस दर्द को अपने अंदर ही दबा दिया था। उस उम्र में उनका ध्यान होमवर्क और दूसरी छोटी-छोटी चीजों पर ज्यादा था। उन्हें अपनी बहन के ज्यादा सुंदर होने की भी चिंता रहती थी।
बड़ी होने के बाद रेखा को एहसास हुआ कि शायद उन्हें पिता की कमी महसूस हुई थी। उन्होंने कहा था कि जब आपने किसी चीज का स्वाद ही नहीं चखा हो, तो आपको नहीं पता होता कि वह चीज कैसी होती है। उनके लिए पिता शब्द का मतलब ही साफ नहीं था।
रेखा ने बताया था कि उनके बचपन का बड़ा हिस्सा नानी और मौसी के साथ बीता, क्योंकि उनकी मां शूटिंग के सिलसिले में अक्सर बाहर रहती थीं। उनके पास कोई स्थायी पुरुष रोल मॉडल भी नहीं था। बाद में उन्होंने फिल्ममेकर मोहन सहगल को अपनी जिंदगी का पहला फादर फिगर बताया।


बचपन खत्म होने से पहले ही फिल्मों में धकेली गईं, मां ने कहा- परिवार के लिए काम करना होगा
रेखा के लिए फिल्मों में आना किसी सपने के पूरा होने की कहानी नहीं थी। वह अभिनेत्री बनना ही नहीं चाहती थीं। उस उम्र में उनके सपने किसी आम लड़की जैसे थे- प्यार करने वाला जीवनसाथी, शादी और ढेर सारे बच्चे। परिवार की आर्थिक स्थिति ने उनके इन सपनों को पीछे धकेल दिया।
रेखा ने बताया था कि घर में कई बच्चों की पढ़ाई और दूसरे खर्चों की जिम्मेदारी थी। उनकी मां ने उनसे साफ कहा कि उन्हें काम करना होगा। फिल्मों में काम करने की इच्छा नहीं होने के बावजूद रेखा ने इसे स्वीकार किया और कहा कि वह सिर्फ एक फिल्म करेंगी- ‘अंजाना सफर’।
इसके बाद जो हुआ, उसने उनकी जिंदगी बदल दी। स्कूल छूट गया और महज किशोर उम्र में वह फिल्म स्टूडियो के चक्कर लगाने लगीं। एक तरफ घर की आर्थिक जरूरत थी, दूसरी तरफ फिल्म इंडस्ट्री उनके लिए अनजान दुनिया थी।
रेखा ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया था कि वह उस माहौल के लिए तैयार नहीं थीं। उन्हें काम करना पसंद नहीं था और कई बार सेट पर जाने का मन नहीं करता था। बाद में उन्होंने अपने शुरुआती फिल्मी दौर को मुश्किल समय के तौर पर याद किया।
मुंबई और फिल्म इंडस्ट्री उनके लिए सुरक्षित जगह जैसी नहीं थी। एक कम उम्र की लड़की, जिसे हिंदी भाषा तक ठीक से नहीं आती थी, अचानक ऐसे माहौल में पहुंच गई थी जहां उसे अपने लिए रास्ता बनाना था। बाद के वर्षों में रेखा ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें रूप-रंग और भाषा को लेकर भी काफी आलोचना झेलनी पड़ी।
इस मजबूरी से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे उनकी पहचान बन गया। जिस लड़की ने शुरुआत में सिर्फ परिवार की आर्थिक मदद के लिए कैमरे का सामना किया था, वही आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल हुई। रेखा ने पीछे मुड़कर इस सफर को सिर्फ शिकायत की नजर से नहीं देखा।
उन्होंने कहा था कि वह अपनी जिंदगी में हुई हर घटना के लिए आभारी हैं, क्योंकि अगर उनकी जिंदगी का ‘स्क्रीनप्ले’ उसी क्रम में नहीं लिखा गया होता, तो शायद वह आज जैसी इंसान हैं, वैसी नहीं बन पातीं।


मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि रेखा और विनोद मेहरा ने मंदिर में गुपचुप शादी की है।
विनोद मेहरा से शादी की खबर, ससुराल में कथित अपमान की कहानी
रेखा का नाम अभिनेता विनोद मेहरा के साथ जुड़ा तो उनकी निजी जिंदगी फिर चर्चा में आ गई। दोनों ने साथ में फिल्में कीं और उनकी नजदीकियों की खबरें सामने आती रहीं। इसी दौरान यह दावा भी किया गया कि दोनों ने गुपचुप शादी कर ली थी।
कई सालों तक रेखा और विनोद मेहरा की कथित शादी की कहानी फिल्मी गलियारों में सुनाई जाती रही। यह भी कहा गया कि शादी के बाद जब विनोद मेहरा रेखा को अपने घर लेकर गए तो उनकी मां ने उन्हें बहू के रूप में स्वीकार नहीं किया। कुछ रिपोर्ट्स में ससुराल में रेखा के साथ बुरे व्यवहार की बात भी कही गई। लेकिन इस कहानी का एक अहम पहलू खुद रेखा का बयान है।
2004 में ‘रेंडेजवू विद सिमी गरेवाल’ में रेखा ने विनोद मेहरा से शादी की बात को साफ तौर पर खारिज किया था। उन्होंने शादी की खबर पर हैरानी जताई और कहा कि उनके बारे में ऐसी कई बातें कही जाती रही हैं। यहां तक कि उनके फारूक अब्दुल्ला से शादी करने की खबर भी सामने आ चुकी थी।
रेखा ने इस मामले को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उनके लिए विनोद मेहरा बेहद खास थे, लेकिन उन्होंने उन्हें पति के तौर पर स्वीकार नहीं किया। रेखा ने विनोद मेहरा को अपना करीबी और शुभचिंतक बताया था। उनके मुताबिक, विनोद उनकी जिंदगी में ऐसे शख्स थे, जो उनके बेहद करीब रहे। रेखा के अपने बयान के मुताबिक, विनोद मेहरा के साथ उनका रिश्ता खास और गहरा था, लेकिन शादी की बात वह स्वीकार नहीं करती थीं।
हालांकि, विनोद मेहरा की मां और रेखा के रिश्ते को लेकर भी कई सालों तक अलग-अलग दावे सामने आते रहे। यासिर उस्मान की किताब ‘रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी’ और इसके आधार पर प्रकाशित रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि विनोद मेहरा की मां ने रेखा को बहू के रूप में स्वीकार नहीं किया। यहां तक बताया गया कि जब रेखा ने उनके पैर छूने की कोशिश की तो उन्हें धक्का देकर रोक दिया गया।
रेखा की जिंदगी में विनोद मेहरा का रिश्ता चाहे जिस रूप में रहा हो, इस रिश्ते से जुड़ी शादी की खबरों और ससुराल के कथित व्यवहार ने उनकी निजी जिंदगी को लंबे समय तक सुर्खियों में रखा।


अमिताभ के लिए प्यार कबूल किया, लेकिन निजी रिश्ता होने से साफ इनकार
अमिताभ बच्चन के साथ रेखा की जोड़ी पर्दे पर जितनी पसंद की गई, उनकी निजी जिंदगी को लेकर उतनी ही चर्चाएं हुईं। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और इसी दौरान उनके रिश्ते को लेकर तरह-तरह की खबरें सामने आईं।
2004 में सिमी गरेवाल के शो में रेखा ने पहली बार इतने खुले अंदाज में अमिताभ के लिए अपनी भावनाओं पर बात की थी। उन्होंने अमिताभ को ऐसा शख्स बताया, जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। रेखा के मुताबिक, अमिताभ में इतनी खूबियां थीं कि उन्हें देखकर प्रभावित हुए बिना रहना मुश्किल था।
रेखा ने अमिताभ के लिए अपने प्यार को छिपाया नहीं। उन्होंने साफ कहा था कि वह उनसे प्यार करती हैं। उनका कहना था कि अमिताभ जैसे इंसान के प्यार में पड़ना उनके लिए असामान्य बात नहीं थी। उन्होंने यहां तक कहा कि दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जो अमिताभ की शख्सियत से प्रभावित न हो।
इसके तुरंत बाद रेखा ने इस रिश्ते को लेकर सबसे अहम बात कही। उन्होंने अमिताभ के साथ किसी भी निजी रिश्ते या अफेयर से साफ इनकार किया। रेखा के मुताबिक, उनके बीच कभी कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं था और उनके रिश्ते को लेकर जो विवाद और अटकलें लगाई गईं, उनमें सच्चाई नहीं थी।
रेखा ने यह भी कहा था कि अमिताभ को शायद अंदाजा तक नहीं था कि वह उनके बारे में क्या महसूस करती हैं। उनके बयान में एक तरफ अमिताभ के लिए गहरा आकर्षण और प्यार था, लेकिन दूसरी तरफ उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों के बीच वैसा निजी रिश्ता नहीं था, जैसा मीडिया में बताया जाता रहा।
जया बच्चन के लिए भी रेखा के मन में सम्मान था
इस इंटरव्यू में रेखा ने जया बच्चन के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने जया को ‘दीदीभाई’ कहकर संबोधित किया और उनके व्यक्तित्व, गरिमा और मजबूती की तारीफ की। रेखा के मुताबिक, अमिताभ से जुड़ी अफवाहों की वजह से उनके और जया के बीच कोई दुश्मनी नहीं थी। उन्होंने बताया कि अफवाहों और मीडिया की अटकलों से पहले से उनका जया के साथ रिश्ता था और वह रिश्ता उनके लिए आज भी मायने रखता है।
‘सिलसिला’ के बाद दोनों फिर साथ नहीं आए
अमिताभ और रेखा की आखिरी फिल्मों में से एक ‘सिलसिला’ (1981) रही, जिसमें अमिताभ, रेखा और जया बच्चन एक ही कहानी का हिस्सा थे। फिल्म की कहानी और उस समय दोनों के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं ने पर्दे और निजी जिंदगी के बीच की सीमा को धुंधला कर दिया।
इसके बाद अमिताभ और रेखा किसी फिल्म में साथ नजर नहीं आए। रेखा ने सिमी गरेवाल को बताया था कि अब दोनों की मुलाकात सिर्फ सार्वजनिक कार्यक्रमों या अवॉर्ड फंक्शंस में होती है। उन्होंने अमिताभ के लिए सम्मानजनक शब्दों में कहा था कि वह उन्हें देखकर नमस्ते करती हैं और उनके बीच इतना ही संपर्क है।


पति मुकेश अग्रवाल ने आत्महत्या की, इसके बाद रेखा पर लगा सबसे बड़ा आरोप
रेखा की जिंदगी की दर्दनाक घटनाओं में 1990 में हुई उनके पति मुकेश अग्रवाल की मौत शामिल है। रेखा ने 4 मार्च 1990 को दिल्ली के बिजनेसमैन मुकेश अग्रवाल से शादी की थी। शादी के कुछ ही समय बाद दोनों के रिश्ते में परेशानियां आने लगीं। बाद में दोनों ने अलग होने और तलाक लेने का फैसला किया। रेखा के अनुसार, दोनों को अपने स्वभाव और सोच में काफी अंतर महसूस हुआ था।
तलाक की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही 2 अक्टूबर 1990 को मुकेश अग्रवाल ने आत्महत्या कर ली। उस समय रेखा विदेश में थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकेश ने एक नोट भी छोड़ा था, जिसमें किसी को उनकी मौत के लिए जिम्मेदार न ठहराने की बात कही गई थी।
इस घटना के बाद सबसे ज्यादा निशाना रेखा को बनाया गया। मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री के एक हिस्से ने उन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्हें अपमानजनक नामों से पुकारा गया और उनकी फिल्मों के पोस्टरों पर कालिख पोते जाने की खबरें सामने आईं।
रेखा ने बाद में इस दौर के बारे में बात करते हुए बताया कि उन्होंने सदमे, इनकार, गुस्से, आत्मग्लानि और आखिरकार स्वीकार करने तक कई भावनात्मक पड़ाव झेले। उन्होंने यह भी कहा था कि वह मुकेश की मौत के लिए खुद को जिम्मेदार नहीं मानती थीं।
इन पांच दर्दनाक अध्यायों के बाद भी रेखा बनी रहीं ‘सदाबहार’
रेखा की जिंदगी की इन घटनाओं को देखें तो उनकी कहानी सिर्फ एक फिल्म स्टार के ग्लैमर की कहानी नहीं है। पिता की उपेक्षा से लेकर कम उम्र में काम करने, रिश्तों को लेकर विवाद और पति की मौत के बाद सार्वजनिक आरोपों तक, उनकी निजी जिंदगी लगातार चर्चा और मुश्किलों से घिरी रही।
हर बार रेखा ने अपनी जिंदगी को नए सिरे से खड़ा किया। शुरुआती दौर की आलोचना से निकलकर उन्होंने ‘उमराव जान’, ‘खूबसूरत’, ‘इजाजत’, ‘सिलसिला’ और कई दूसरी फिल्मों में यादगार अभिनय किया और अपनी अलग पहचान बनाई।
आज 72 साल की उम्र में भी रेखा की जिंदगी का विरोधाभास यही है- जिस महिला की निजी जिंदगी को दुनिया ने बार-बार सवालों के कटघरे में खड़ा किया, वही पर्दे पर हिंदी सिनेमा की सबसे रहस्यमयी और प्रभावशाली शख्सियतों में से एक बन गईं।

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मुंबई की एक स्कूल गर्ल ने 13-14 साल की उम्र में फिल्म साइन की थी। शायद उन्हें भी नहीं पता था कि कैमरे के सामने खड़े होने का यह फैसला उन्हें भारतीय सिनेमा की लंबे समय तक टिकने वाली अभिनेत्रियों में शामिल कर देगा। शुरुआत आसान नहीं थी। पहली फिल्म नहीं चली, साउथ में नई भाषा और माहौल से जूझना पड़ा। करियर के शुरुआती दौर में उन्हें एक सीन करने में असहजता जताने पर फिल्म से रिप्लेस कर दिया गया। सेट पर उनके सामने कहा गया- ‘हीरोइन बदल दो।’पूरी खबर पढ़ें..

