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3 घंटे पहले
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शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद प्रधान 27 जुलाई को पहली बार संसद पहुंचे थे।
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को संसद पहुंचे। संसद परिसर में प्रधान के पहुंचते ही भाजपा और NDA सांसदों की भीड़ उनका स्वागत करने पहुंची। विपक्षी सांसदों ने भी उनसे मुलाकात की।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक विपक्षी सांसद ने तंज कसा कि यह पहली बार है, जब किसी मंत्री ने आरोप का सामना किए बिना इस्तीफा दे दिया।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी कहा- ऐसा होता रहता है। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने जवाब दिया, “मैं स्ट्रीट फाइटर हूं, एसी कमरों में बैठने वाला एक्टिविस्ट नहीं।”
प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। कॉकरोच जनता पार्टी ने NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए 36 दिन तक जंतर-मंतर पर धरना दिया था।
संसद में धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत की 2 तस्वीरें…

धर्मेद्र प्रधान संसद के मानसून सत्र के लिए पहुंचे। मकर द्वार पर मौजूद भाजपा सांसदों ने उन्हें रिसीव किया।

प्रधान को मिथिला टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया गया। NDA सांसदों ने उनके फैसले की सराहना की।
प्रधान का स्वागत करने पर कांग्रेस ने BJP की आलोचना की
कांग्रेस ने सोमवार को संसद भवन परिसर में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का स्वागत करने पर BJP की कड़ी आलोचना की। पार्टी ने कहा कि यह पूरी घटना बेहद शर्मनाक है और देश के युवाओं का घोर अपमान है। विपक्षी सांसदों ने “चोर-चोर, पेपर चोर” जैसे नारे भी लगाए।
कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने कहा कि BJP सांसद प्रधान का ऐसे स्वागत कर रहे थे जैसे उन्होंने कोई बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की हो।
रमेश ने X पर एक पोस्ट में कहा, “देश पहले ही देख चुका है कि पेपर लीक के मामले में इस्तीफा देते समय माफी मांगने के बजाय, प्रधान ने छात्रों पर ही गुमराह होने का आरोप लगाया था, और उसके बाद सभी केंद्रीय मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ की थी।”
उन्होंने लिखा- “BJP को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या पेपर लीक, चरमराती शिक्षा व्यवस्था, छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने के बावजूद प्रधान का काम सराहनीय था? अगर नहीं, तो यह सम्मान किसलिए है? और अगर हां, तो क्या BJP देश के युवाओं और छात्रों को यही संदेश देना चाहती है?”

25 जुलाई को दिया था इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफे को लेकर X पर चिट्ठी पोस्ट की थी। दो पेज और 575 शब्दों में लिखी इस चिट्ठी में प्रधान ने बाकी बातों के साथ दो जगह युवाओं को भ्रमित करने की बात भी लिखी थी।
उसी दिन राष्ट्रपति मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार दिया गया।
कभी पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरे थे धर्मेंद्र, उसी मुद्दे पर इस्तीफा दिया

1997 में पेपर लीक प्रदर्शन में धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए थे। उनको बुरी तरह पीटा गया था। चेहरे पर चोटें भी आईं थीं। -फोटो क्रेडिट:TNIE
29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर धर्मेन्द्र प्रधान ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक हुआ था, तब प्रधान ने प्रदर्शन किया था। इसमें करीब 1,500 छात्र शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह पीटा गया था। उनके शरीर में कई जगह चोटें आईं और फ्रैक्चर भी हुआ था।
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परीक्षा संशोधन बिल पर चर्चा शुरू नहीं, विपक्ष का हंगामा: छात्रों की पिटाई मामले पर बहस के लिए अड़ा

विपक्ष के हंगामे की वजह से लोकसभा में परीक्षा संशोधन बिल पर दोपहर 2 बजे चर्चा शुरू नहीं हो पाई। कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए। छात्रों की पिटाई मामले पर बहस की मांग करने लगे।
स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों से कहा कि आप चर्चा नहीं चाहते। इसके बाद 5 मिनट तक हंगामा होता रहा। स्पीकर ने कहा कि मैं शाम 5 बजे तक का समय देता हूं। सरकार और विपक्षी सांसद सहमति बनाकर आएं। पढ़ें पूरी खबर…

