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16 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा
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कमर दर्द की शिकायत बहुत कॉमन है। ज्यादातर लोग इसे थकान, गलत पोस्चर या बढ़ती उम्र का असर मान लेते हैं। लेकिन अगर यह दर्द बार-बार हो रहा है और कई महीनों से बना हुआ है तो यह एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (AS) हो सकता है।
यह एक क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी बीमारी है। इसमें रीढ़ और जोड़ों में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या होती है। हेल्थकेयर डेटा और एनालिटिक्स फर्म ‘ग्लोबल डेटा’ के अनुसार, भारत में एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के करीब 16.5 लाख मरीज हैं। यह संख्या हर साल लगभग 2.95% की दर से बढ़ रही है। वहीं, जागरूकता की कमी के कारण कई मरीजों का समय पर सही डायग्नोसिस नहीं हो पाता।
इसीलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- इसके लक्षण क्या हैं?
- यह सामान्य कमर दर्द से कैसे अलग है?
एक्सपर्ट- डॉ. हेमंत बंसल, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम
सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस क्या है? क्या ये एक तरह का अर्थराइटिस है?
जवाब- हां, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (AS) एक तरह का इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस है। इसे एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस (Axial Spondyloarthritis) भी कहते हैं। पॉइंटर्स से समझिए-
- यह मुख्य रूप से रीढ़ (स्पाइन) और स्पाइन को पेल्विस से जोड़ने वाले सैक्रोइलिएक जॉइंट्स को प्रभावित करता है।
- इसमें जोड़ों और आसपास के टिश्यूज में सूजन, दर्द और अकड़न होती है।
- समय के साथ कुछ मरीजों में रीढ़ की हड्डियां आपस में जुड़ सकती हैं।
- इससे स्पाइन का लचीलापन कम हो जाता है और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।
सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस क्यों होता है?
जवाब- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस होने की वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तब होता है, जब इम्यून सिस्टम शरीर के ही जोड़ों और रीढ़ पर हमला करने लगता है। कुछ जीन, खासकर HLA-B27, इस बीमारी का रिस्क बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि जिन लोगों के परिवार में यह बीमारी रही है, उनमें इसका जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा होता है।
सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण क्या हैं?
जवाब-एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का सबसे कॉमन लक्षण कमर के निचले हिस्से और कूल्हों में लगातार दर्द व अकड़न है। यह परेशानी आमतौर पर सुबह उठने पर या लंबे समय तक बैठने के बाद ज्यादा महसूस होती है। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस और सामान्य कमर दर्द में अंतर होता है?
जवाब- हां, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का दर्द सामान्य कमर दर्द से अलग होता है। ग्राफिक से दोनों के बीच का फर्क समझिए-

सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?
जवाब- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। यह बीमारी अक्सर किशोरावस्था के आखिर या 20-30 साल की उम्र में शुरू होती है। ग्राफिक में सभी रिस्क फैक्टर्स देखिए-

सवाल- अगर एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का ट्रीटमेंट न हो तो इससे और किन बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है?
जवाब- यह कई गंभीर कॉम्प्लिकेशन्स का कारण बन सकता है, जैसेकि-
- लगातार सूजन की वजह से रीढ़ की हड्डियां आपस में जुड़ सकती हैं। इससे पीठ की लचक कम हो जाती है और चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है।
- सूजन कूल्हों, कंधों और अन्य जोड़ों तक भी फैल सकती है।
- कुछ मरीजों में आंखों में सूजन (यूवाइटिस) हो सकती है।
- सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
- रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो सकता है।
- हार्ट डिजीज और हार्ट वाल्व से जुड़ी समस्याएं विकसित हो सकती हैं।
- कुछ मामलों में फेफड़े और आंतें भी प्रभावित हो सकती हैं।

सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस डायग्नोज कैसे होता है?
जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-
- इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और फिजिकल टेस्ट करते हैं।
- इसके बाद रीढ़ और सैक्रोइलिएक जॉइंट्स में सूजन या बदलाव देखने के लिए एक्स-रे या MRI कराई जा सकती है।
- कुछ मामलों में सूजन के लेवल और HLA-B27 जीन की मौजूदगी जांचने के लिए ब्लड टेस्ट भी किए जाते हैं।
- इन सभी जानकारियों के आधार पर डॉक्टर बीमारी की पुष्टि करते हैं।
सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का इलाज कैसे किया जाता है?
जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-
- डॉक्टर दर्द और सूजन को कंट्रोल करने के लिए दवाएं देते हैं।
- इसके साथ फिजियोथेरेपी, नियमित स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
- नियमित इलाज और फॉलो-अप से ज्यादातर मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
सवाल- क्या एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में एक्सरसाइज फायदेमंद है?
जवाब- हां, सही तरह की एक्सरसाइज करने से दर्द और जकड़न कम करने, रीढ़ की लचक बनाए रखने, शरीर का मूवमेंट बेहतर करने और पोस्चर सुधारने में मदद मिलती है। इसमें ये एक्सरसाइज शामिल हैं-
- स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज
- वॉकिंग
- स्विमिंग
- पोस्चर सुधारने वाली एक्सरसाइज
- ब्रीदिंग एक्सरसाइज
ध्यान रहे, किसी भी नई एक्सरसाइज की शुरुआत डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ही करें।
सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से कैसे बचें?
जवाब- फिलहाल एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस को पूरी तरह रोकने का कोई तरीका नहीं है, क्योंकि इसके सटीक कारण स्पष्ट नहीं हैं। हालांकि, समय पर पहचान और इलाज से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। ग्राफिक में बचाव के सभी टिप्स देखिए-

समय पर पहचान और सही इलाज से एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के दर्द व जकड़न को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। जागरूकता और लाइफस्टाइल में सुधार इस बीमारी के मैनेजमेंट की सबसे बड़ी कुंजी है।
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ग्राफिक्स- विपुल शर्मा
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