बिलासपुर में रविवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने झीरम घाटी नरसंहार मामले में NIA के फैसले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि NIA की जांच और अदालत के फैसले पर सवाल उठाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सत्ता के दौरान उनके नेता झी
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अगर उनके पास मामले से जुड़े कोई ठोस सबूत थे, तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने रखना चाहिए था। अब न्यायालय का फैसला आ चुका है, इसलिए उस पर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस को न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना चाहिए। अदालत ने 100 से अधिक गवाहों की गवाही सुनने के बाद मामले में दोषियों को लेकर फैसला सुनाया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तीजा-पोरा कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।
तीजा-पोरा प्रोग्राम में पहुंचे थे CM साय
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित तीजा-पोरा कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे सीएम साय ने कहा कि झीरम कांड की सुनवाई करीब 13 सालों तक चली। इस दौरान अदालत में 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। अब 16 सितंबर को दोषियों की सजा पर फैसला होना है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि झीरम कांड में छत्तीसगढ़ के कई वरिष्ठ नेताओं और नेतृत्वकर्ताओं की जान गई थी। इस घटना का दुख सभी को है। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई थी और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।
बांग्लादेशियों को किया जाएगा डिपोर्ट
बिलासपुर में संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के मामले में भी मुख्यमंत्री ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 23 संदिग्धों को फिलहाल रायपुर के डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उनका परीक्षण और सत्यापन किया जाएगा। जांच में यदि उनके बांग्लादेशी नागरिक होने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार उन्हें डिपोर्ट किया जाएगा।
महतारी वंदन योजना पर बोले- नारी शक्ति को प्रणाम
महतारी वंदन योजना को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नारी शक्ति सदैव पूजनीय रही है। केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके हितों के लिए लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के कल्याण और उन्हें सशक्त बनाने के लिए सरकार की योजनाएं लगातार जारी हैं।
अब जानिए झीरम घाटी हमले के बारे में ?
दरअसल, 2013 के आखिर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे। रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। 10 साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस जीत के लिए जोर लगा रही थी। पार्टी पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा शुरू करने वाली थी। 25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली की गई।
रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था। इसमें करीब 25 गाड़ियां थीं। इन गाड़ियों में 200 नेता-कार्यकर्ता थे। सबसे आगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा थे।

कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप एक काफिले में थी
साथ ही उनके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैदू की गाड़ी थी। उनके पीछे बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार चल रहे थे। यानी छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप इस काफिले में थी। दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी में पहुंचा।
यहीं नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया। गाड़ियां रुकते ही 200 से ज्यादा नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश की मौके पर ही मौत हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग होती रही।

महेंद्र कर्मा को नक्सलियों ने मारी थी 100 गोलियां
शाम करीब 5:30 बजे नक्सली पहाड़ों से उतरकर नीचे आए और एक-एक गाड़ी चेक की। एक गाड़ी में उन्हें सलवा जुडूम आंदोलन शुरू करने वाले महेंद्र कर्मा मिल गए। आंदोलन की वजह से नक्सली महेंद्र कर्मा को दुश्मन समझते थे। उन्होंने बेरहमी से महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी। उन्हें करीब 100 गोलियां मारी गईं।
चश्मदीदों के मुताबिक, नक्सलियों ने कुछ नेताओं को नाम लेकर पहचाना और उन्हें गोली मारी। हमला पूरी योजना के साथ किया गया। नक्सलियों ने जगह का चुनाव, बम लगाने और भागने तक की पूरी तैयारी कर रखी थी। खुफिया एजेंसियों को हमले की कोई भनक नहीं थी।

झीरम घाटी में हमले के दौरान IED ब्लास्ट से एक गाड़ी का हिस्सा उड़कर नदी में जा गिरा था। ये 12 साल बाद भी वहीं फंसा हुआ है।
NIA ने 2013 में केस रजिस्टर्ड किया था
एनआईए ने 2013 में केस रजिस्टर्ड किया, जिसका नंबर RC-06/2013/NIA/DLI है। 23 दिसंबर 2023 को एनआईए ने राष्ट्रीय अखबारों में ‘झीरम घाटी हत्याकांड एनआईए केस में वांछित’ शीर्षक से विज्ञापन जारी किया था। इसमें 19 आरोपी नक्सलियों के नाम, पते समेत तमाम जानकारी जारी की थी। इसमें पहला नाम नक्सली लीडर देवजी का था।
इसके अलावा बारसे सुक्का ऊर्फ देवा का भी नाम उस सूची में था। एनआईए ने विज्ञापन में लिखा- इन माओवादी के संबंध में किसी भी प्रकार की सूचना देने या गिरफ्तार करवाने में सहयोग करने वाले को उचित इनाम दिया जाएगा।
2 जांच आयोग, NIA-SIT की जांच अलग
नरसंहार में अब तक दो न्यायिक जांच आयोग बने हैं। 2013 में विशेष न्यायिक जांच आयोग जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में बना था। उसे सुरक्षा में चूक, एसओपी, रैली आयोजकों की भूमिका, पुलिस-बलों का समन्वय की जांच करना था।
2013 में ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए को इसकी जांच सौंप दी गई थी। 2018 में कांग्रेस सरकार आने पर एसआईटी बनी। इसमें कथित राजनीतिक षड्यंत्रों की जांच करने का दावा किया गया था। फिर 2021 में दूसरा न्यायिक जांच आयोग बना। इस आयोग की जिम्मेदारी जस्टिस सतीश अग्निहोत्री और जस्टिस गुलाम मिन्हाजुद्दीन को सौंपी गई थी।
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