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आखिरी समय बेटे के लिए तड़प रहे थे रेंजर:पत्नी बोलीं- डंपर से कुचलने वालों का एनकाउंटर हो, सुप्रीम कोर्ट देखेगा सरकार की एक्शन रिपोर्ट




‘जिन माफियाओं ने मेरे पति की कुचलकर हत्या की है, उनका एनकाउंटर हो या फांसी की सजा दी जाए। ड्यूटी पर जान की बाजी लगाने वाले मेरे पति को शहीद का दर्जा मिले।’ रोते-बिलखते दर्द बयां करती ये रेंजर प्रताप सिंह चुण्डावत की पत्नी आशा कंवर हैं। अवैध खनन रोकने गए रेंजर प्रताप सिंह को माफियाओं ने डंपर से कुचलकर मार दिया था। घटना इतनी दर्दनाक थी कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से रिपोर्ट तलब की है। दैनिक भास्कर टीम चित्तौड़गढ़ में रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत के गांव पहुंची। ग्राउंड जीरो से पड़ताल कर मामले को इन्वेस्टिगेट किया और परिजनों से बात कर उनके दर्द को जाना। पढ़िए संडे बिग स्टोरी… चचेरा भाई बोला- अकेले के सहारे था पूरा परिवार चित्तौड़गढ़ जिले के गांव मेडी का अमराना में रेंजर प्रताप सिंह के घर शोक सभा की बैठक चल रही थी। यहां हमें रेंजर के चचेरे भाई शैतान सिंह चुंडावत मिले। उन्होंने बताया कि प्रताप सिंह 3 माह के थे जब उनके पिता की सीमेंट फैक्ट्री में हुए एक हादसे में जान चली गई थी। इसके बाद उन्हें दादा नारायण सिंह ने पाला था। थोड़े टाइम बाद दादा का भी देहांत हो गया। प्रताप सिंह घर में अकेले कमाने वाले थे। पहली नौकरी साल 2011 में वन विभाग में गार्ड की लगी थी, इसके बाद भी कई एग्जाम फाइट किए। फिर वन विभाग में फॉरेस्टर (वनपाल) भर्ती हुए। तीन साल पहले ही रेंजर के पद पर प्रमोशन मिला था। उनकी बहादुरी के किस्से पूरे डिपार्टमेंट में चर्चित थे। इसी साल विभाग ने उनका नाम स्टेट लेवल पर सम्मानित करने के लिए भी भेजा था। 21 सितंबर की रात को क्या हुआ था? शैतान सिंह ने बताया भाई प्रताप सिंह को मोहनपुरा तलाई में वन विभाग की जमीन पर अवैध खनन की सूचना मिली थी। उसे रुकवाने के लिए वो एक फॉरेस्ट गार्ड के साथ बुलेट पर गए थे। वहां, पहुंचकर उन्होंने अवैध खनन कर रही जेसीबी, ट्रैक्टर व डंपरों को पकड़ लिया। अचानक हुई कार्रवाई से अवैध खनन माफिया बौखला गए। एक चालक डंपर लेकर भागने लगा। प्रताप सिंह ने पीछा कर अपनी बाइक डंपर के आगे रास्ते में लगा दी। उधर से खनन माफिया भी कई बदमाशों को लेकर मौके पर पहुंचा। भाई के साथ मारपीट शुरू कर दी। एक बदमाश ने ड्राइवर कान्हा को कहा- इस पर डंपर चढ़ा दे। इतना सुनते ही ड्राइवर ने डंपर चला दी और भाई प्रताप सिंह को बुलेट सहित बुरी तरह से कुचल दिया। करीब 50 मीटर तक घसीटता ले गया। इसके बाद रास्ते में मिट्टी खाली करते हुए मौके से भाग गया। 21 सितंबर की रात की ये घटना थी। हमारे पास 12 बजे फोन आया कि आपके का एक्सीडेंट हो गया है। हम तुरंत निम्बाहेड़ा के हॉस्पिटल पहुंचे। वहां जाने पर ही पता चला कि उनकी मौत ही हो गई है। ये असहनीय दर्द था। घर में 3-3 विधवा, शहीद का दर्जा देने की मांग शैतान सिंह ने बताया- एक ही घर में दादी, मां और पत्नी सहित तीन-तीन विधवा महिलाएं हैं। उनके एक बेटा 8 साल का है तो बेटी 11 साल की है। घर में अब कोई कमाने वाला नहीं हैं। महज एक बीघा जमीन है। परिवार की एक ही डिमांड है, अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभाते हुए जान गंवाने वाले प्रताप सिंह को शहीद का दर्जा मिले। वन मंत्री संजय शर्मा और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत आए थे, उन्होंने आश्वासन दिया है। पत्नी बोली- आरोपियों का एनकाउंटर हो या मिले फांसी की सजा दिवंगत रेंजर प्रताप सिंह को याद कर उनकी पत्नी आशा कंवर का रो-रो कर बुरा हाल है। उन्होंने बताया- 21 सितंबर की शाम 5 बजे तक वो ऑफिस का काम निपटा रहे थे। मुझे पीहर (चित्तौड़गढ़) जाना था, तो शाम सवा 5 बजे बस में बिठा के आए थे। इसके बाद शाम 7:00 बजे उनका कॉल आया- मम्मी और बेटी की तबीयत खराब है तो उन्हें नीमच में दिखाने जा रहा रहूं। रात 9:30 बजे मेरी बेटी से कॉल पर बात हुई। फिर अचानक रात 12:50 बजे केपी सिंह नाम से कॉल आया। उन्होंने बताया कि पति प्रताप सिंह का एक्सीडेंट हुआ है। आप लोग निम्बाहेड़ा आ जाओ। कोई कुछ बताने को तैयार नहीं था। केवल इतना पता चला कि किसी ने उन पर डंपर चढ़ा दिया है। इतना बताते ही आशा कंवर एक बार फिर फूट-फूट कर रोने लगीं। ‘रेंजर साब मरने से पहले बोले- मेरे बेटे का ख्याल रखना’ घटना के वक्त रेंजर प्रताप सिंह के साथ रहे सुरेश मेघवाल ने बताया कि 21 सितंबर की रात मुखबीर की सूचना पर हम अवैध खनन रोकने निकले थे। मौके पर देखा तो वनभूमि में एक जेसीबी से मिट्टी खोदी जा रही थी। मौके पर एक ट्रैक्टर और 3 डंपर खड़े थे। पूछताछ पर जेसीबी चालक ने अपना नाम नारायण पुत्र भानूराम मीणा बताया था। वहीं ट्रैक्टर चालक ताराचंद मोग्या, प्रकाश धाकड़ और उसका लड़का हरीश भी वहीं खड़े थे। रोकने पर चालक ने मिट्टी से भरा डंपर भगा लिया। उसे भागता देख रेंजर प्रताप सिंह ने मुझे (सुरेश) को वहीं छोड़ा और खुद बुलेट लेकर डंपर के पीछे दौड़ गए। राजखेड़ा, घाटी वाले बालाजी रोड पर उन्होंने अपनी बुलेट डंपर के आगे लगा दी। तभी नारायण, दिनेश मोग्या और हरीश धाकड़ भी वहां पहुंच गए। आरोपियों ने रेंजर प्रताप सिंह को धक्का देकर गिराया और तीनों ने डंपर चालक कान्हा बावरी से कहा कि डंपर इसके ऊपर चढ़ा दे। इसके बाद ड्राइवर कान्हा बावरी ने रेंजर प्रताप सिंह को कुचलकर आगे खड़ी उनकी बुलेट पर भी डंपर चढ़ा दिया और मौके से भाग गया। इसके बाद रेंजर प्रताप सिंह को छोटी सादड़ी अस्पताल ले जाया गया। जहां से निम्बाहेड़ा रेफर किया गया। हम हॉस्पिटल पहुंचे तो रेंजर साहब ने मुझे कहा था कि मेरा टाइम आ गया है और मैं मरने वाला हूं, पर मेरे बेटे भवी (अनिरुद्ध सिंह) का ध्यान रखना। आरोपियों की अवैध कब्जे की संपत्ति पर भी चला रहे बुलडोजर छोटी सादड़ी थाना एसएचओ कैलाश सोनी ने बताया वनरक्षक सुरेश की रिपोर्ट पर मामला दर्ज किया गया था। मुख्य आरोपी कन्हैयालाल उर्फ कान्हा बावरी को 25 सितंबर को घोसुंडी जंगल से गिरफ्तार किया। वहीं 27 सितंबर तक प्रकाश धाकड़, हरिश धाकड़, विक्रम मोग्या, दिनेश मोग्या और नारायण मीणा को भी गिरफ्तार किया गया है। घटना के दौरान अवैध खनन में लगे सभी डंपर, ट्रेक्टर और जेसीबी जब्त की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में कैसे उठा ये मामला? सुप्रीम कोर्ट ने प्रतापगढ़ रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की मौत के मामले पर अलग से नया स्वतः संज्ञान नहीं लिया है। बल्कि 23 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चंबल में अवैध खनन से जुड़े मामले में सुनवाई चल रही थी। उस दौरान वरिष्ठ वकील निखिल गोयल ने कोर्ट को इस घटना की जानकारी दी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राजस्थान सरकार के वकील से कहा- इस तरह के मामलों में तो अनिवार्य रूप से पहले ही जरूरी प्रीवेंशन होने चाहिए। इस पर 6 अक्टूबर की पेशी में अपना पक्ष या जवाब तैयार करके आएं।



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