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आसाराम बापू केस के मुख्य गवाह महेंद्र चावला और उसके परिवार पर 70 लाख रुपए की रंगदारी और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोपों के बीच पानीपत अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने शिकायतकर्ता द्वारा 58 लाख 65 हजार रुपए की राशि सुपरदारी (अंतरिम कस्टडी) पर रिहा करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (JMIC) आदित्य जैन की अदालत ने स्पष्ट किया कि जब्त की गई राशि इस मामले में मुख्य साक्ष्य है और इसका स्वरूप रंगदारी के आरोपों से सीधा जुड़ा हुआ है। अदालत ने माना कि मुकदमे के इस चरण पर राशि जारी करने से केस के तथ्यों पर असर पड़ सकता है, इसलिए इसे ट्रायल पूरा होने तक अदालत की सुरक्षित कस्टडी में रखना आवश्यक है। जानिए महेंद्र ने कैसे ठगे ₹70 लाख 3 पॉइंट में पढ़िए…क्यों मुकरा महेंद्र चावला अदालत में आरोपियों का पक्ष सुनवाई के दौरान अदालत में पेश किए गए आरोपी महेंद्र चावला, देवेंद्र चावला और राम प्रसाद ने अपने बयान में कहा कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है और उन्होंने किसी भी तरह की रंगदारी नहीं ली है। आरोपियों ने भी इस राशि को सुपरदारी पर रिहा किए जाने का विरोध किया। 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे आरोपी राज्य सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील और शिकायतकर्ता के वकील ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दिए अपने आदेश में सुपरदारी अर्जी खारिज कर दी। तीनों आरोपियों को 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जिस दिन आरोपों पर बहस होगी।
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आसाराम केस के मुख्य गवाह महेंद्र चावला को झटका:₹70 लाख रंगदारी का मामला, पानीपत में ₹58.65 लाख की सुपरदारी की अर्जी खारिज
