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इंदौर में टूटते रिश्तों को लोक अदालत ने जोड़ा:24 दंपतियों ने मतभेद खत्म, फिर साथ रहने राजी, 103 पारिवारिक मामले हुए खत्म




मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में आपसी सुलह और समझाइश से 241 मामलों का निराकरण किया गया। कुल 537 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए थे। निराकृत मामलों में करीब 3 करोड़ 19 लाख रुपए के अवार्ड पारित हुए। इससे 1170 पक्षकार लाभांवित हुए। फैमिली कोर्ट में 512 केस रखे गए। इनमें से 103 मामलों का राजीनामे के आधार पर निराकरण हुआ। खास बात यह रही कि इनमें करीब 24 दंपतियों ने आपसी मतभेद खत्म कर दोबारा साथ रहने का फैसला किया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश पर आयोजित वर्ष 2026 की तीसरी नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायाधिपति सुबोध अभ्यंकर, न्यायाधिपति राजेंद्र कुमार वाणी और न्यायाधिपति जय कुमार पिल्लई ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। हाई कोर्ट में 537 मामले रखे, 241 का निराकरण लोक अदालत में सिविल, एमएसीटी, रिट, क्रिमिनल और अन्य प्रकृति के कुल 537 मामले सुनवाई के लिए रखे गए थे। न्यायाधिपति राजेंद्र कुमार वाणी और न्यायाधिपति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठों के समक्ष मामलों की सुनवाई हुई। आपसी सहमति और सुलह के आधार पर 241 प्रकरणों का निराकरण किया गया। फैमिली कोर्ट में 103 मामले सुलझे, 24 दंपती साथ लौटे इंदौर कुटुंब न्यायालय में भी नेशनल लोक अदालत के दौरान पांच खंडपीठों के सामने 512 प्रकरण रखे गए। इनमें से 103 मामलों का राजीनामे के आधार पर निराकरण हुआ। खास बात यह रही कि इनमें करीब 24 दंपतियों ने आपसी मतभेद खत्म कर दोबारा साथ रहने का फैसला किया। 6 साल से चल रहे विवाद के बाद पति-पत्नी फिर साथ द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सुरेश कुमार चौबे की बेंच में आनंद और भावना (दोनों परिवर्तित नाम) का मामला सामने आया। दोनों की शादी वर्ष 2020 में हुई थी और उनका 4 साल का बेटा है। वैचारिक मतभेद, ताने और शराब सेवन जैसी समस्याओं के चलते दोनों वर्ष 2022 से अलग रह रहे थे। पति ने तलाक के लिए केस लगाया था। करीब एक साल तक चली कार्यवाही के दौरान काउंसलिंग और समझाइश के बाद दोनों को अपनी गलतियों का एहसास हुआ। पति ने पत्नी और बच्चे को भविष्य में बेहतर तरीके से रखने का भरोसा दिया। इसके बाद दोनों लोक अदालत में राजी हुए और केस खत्म कर साथ रहने चले गए। दहेज के तानों से बिगड़ा रिश्ता, समझाइश के बाद पत्नी ससुराल लौटने को तैयार कोर्ट में शालिनी और सूरज (दोनों परिवर्तित नाम) का मामला आया। वर्ष 2022 में शादी के बाद दोनों के बीच विवाद होने लगे। पत्नी नवंबर 2025 में मायके आ गई थी और 2026 की शुरुआत में भरण-पोषण का केस लगाया। कई दौर की काउंसलिंग और लंबी बातचीत के बाद दोनों के मतभेद दूर हुए। पति ने अच्छे से रखने का आश्वासन दिया और पत्नी भी साथ रहने को तैयार हो गई। लोक अदालत में दोनों ने समझौता किया और अपने एक वर्षीय बेटे के साथ फिर साथ रहने चले गए। पुलिस शिकायत और दो अलग-अलग केस के बाद भी बनी सुलह कोर्ट में सोनू कुमार और मालती (परिवर्तित नाम) का मामला भी सुलझा। दोनों की शादी 2022 में हुई थी और उनका 3 साल का बेटा है। पारिवारिक विवाद और अभद्र व्यवहार से परेशान होकर पत्नी वर्ष 2024 में मायके आ गई थी। उसने भरण-पोषण का केस लगाया, जबकि पति ने वर्ष 2025 में पत्नी को साथ रखने के लिए केस दायर किया। शुरुआत में समझौता नहीं हुआ, लेकिन लोक अदालत में तीन-चार दौर की बातचीत और समझाइश के बाद दोनों के बीच मतभेद कम हुए। दोनों ने साथ रहने की सहमति दी और लोक अदालत में प्रकरण खत्म कर एक बार फिर साथ रहने चले गए। समझाइश और संवाद से टूटते रिश्तों को मिला नया मौका लोक अदालत में एडवोकेट प्रमोद जोशी, जितेंद्र सिंह ठाकुर, प्रणय शर्मा, प्रीति मेहना, विजय राठौर सहित अन्य अधिवक्ताओं का विशेष सहयोग रहा। फैमिली कोर्ट में हुई काउंसलिंग और आपसी बातचीत के जरिए कई दंपतियों के विवाद सुलझे और उन्हें वैवाहिक जीवन को एक और मौका देने का रास्ता मिला। संपत्ति कर और जल कर के मामलों में लोगों को राहत, निगम को करोड़ों का राजस्व उधर, नगर निगम द्वारा मुख्यालय और सभी 22 जोनों में लगी लोक अदालत में हजारों लोगों को राहत मिली। इसमें अलग-अलग योजना में सरचार्ज में 100% तक की छूट मिली। इससे लोगों को राहत मिलने के साथ करोड़ों का राजस्व मिला। देर रात तक जोनों पर काउंटिंग जारी थी।



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