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उज्जैन के सिद्धवट तीर्थ पर हुआ ऑनलाइन तर्पण:अमेरिका, कनाडा, दुबई, सिंगापुर और यूरोप के विभिन्न शहरों से जुड़े लोग




सर्वपितृमोक्ष अमावस्या पर शनिवार को (अवंतिका नगरी) उज्जैन के प्रसिद्ध सिद्धवट तीर्थ पर अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सामूहिक तर्पण कार्यक्रम किया गया। इसमें देश-विदेश के श्रद्धालु ऑनलाइन जुड़े और अपने पितरों के साथ उन दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए भी प्रार्थना की, जिनका तर्पण करने वाला कोई नहीं है। सिद्धवट पर लालू गुरु ने कृष्णा गुरुजी के सान्निध्य में ऑनलाइन तकनीक के माध्यम से श्रद्धालुओं को जोड़कर तर्पण विधान संपन्न कराया। आध्यात्मिक चिंतक कृष्णाकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरु’ की ओर से यह आयोजन पिछले 12 वर्षों से किया जा रहा है। देश-विदेश से श्रद्धालुओं ने किए ऑनलाइन दर्शन कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने पवित्र सिद्धवट मंदिर और मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के ऑनलाइन दर्शन किए। अमेरिका, कनाडा, दुबई, सिंगापुर और यूरोप के विभिन्न शहरों से सैकड़ों श्रद्धालु वर्चुअल माध्यम से इस आयोजन में शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन अज्ञात और असमय दिवंगत लोगों के लिए प्रार्थना करना था, जिनका इस दुनिया में कोई अपना नहीं है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के साथ इन दिवंगत आत्माओं की आत्मशांति और सद्गति की कामना करते हुए सामूहिक रूप से तर्पण और प्रार्थना की। हरिद्वार, ऋषिकेश और पुष्कर के तीर्थों से भी जुड़े लोग इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के प्रतिनिधियों ने भी ऑनलाइन सहभागिता की। हरिद्वार से पंडित राजीव शर्मा, ऋषिकेश से पंडित दिनेश जी और पुष्कर तीर्थ से योगेश पराशर जी कार्यक्रम से जुड़े। ऑनलाइन माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर बैठे श्रद्धालुओं ने एक साथ तर्पण विधान में भाग लिया। इस पहल के जरिए उज्जैन के सिद्धवट तीर्थ को देश-विदेश में बसे श्रद्धालुओं से जोड़ने का प्रयास किया गया। ‘श्रद्धा को सेवा से जोड़ें’ कृष्णा गुरु ने बताया कि वे पिछले 12 वर्षों से निष्काम भाव से सामूहिक तर्पण का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हमारी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन उन दिवंगत लोगों को याद करना भी जरूरी है, जिनका कोई सहारा नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे धार्मिक आस्था के साथ सेवा कार्यों को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। इसके लिए वृद्धाश्रमों, कुष्ठ आश्रमों और जरूरतमंद परिवारों में भोजन कराने जैसे कार्य करने का संदेश दिया। सर्वपितृ अमावस्या पर आयोजित इस कार्यक्रम में पितरों के प्रति श्रद्धा के साथ उन लोगों को भी याद किया गया, जिनके लिए प्रार्थना करने वाला कोई नहीं है। आयोजन के माध्यम से श्रद्धा, संवेदना और सेवा को एक साथ जोड़ने का संदेश दिया गया।



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