Headlines

कनाडा के 2 गुरुद्वारे गिरवी रखे-102 करोड़ लोन:पैसा न चुकाने पर कोर्ट केस, ब्याज ही 88 करोड़ पहुंचा, पूर्व पंजाबी सांसद है गारंटर




कनाडा के 2 गुरुघर लोन न चुकाने पर चर्चा में हैं। दोनों गुरुघरों के खिलाफ कोर्ट केस किया गया है। जज ने दोनों की प्रापर्टी पर नया लोन लेने और बेचने पर रोक लगा दी है।
ओंटारियो स्थित सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो और नानकसर ठाठ ईशर दरबार की प्रापर्टी को गिरवी रख 102 करोड़ रुपए की लोन लिमिट बनावाई गई है। इस मामले में पंजाबी मूल के पूर्व सांसद और वकील राजविंदर ग्रेवाल की फर्म शक के दायरे में आई है।
लोन देने वाली फर्म एसएसएमटी मैनेजमेंट इंक (SSMT) और ऑकुलस मॉर्गेज जीपी इंक (Oculus Mortgage) ने लोन का पैसा लेने के लिए कोर्ट में केस किया है। फर्म का कहना है कि 102 करोड़ रुपए लोन की लिमिट थी। इसमें से 82 करोड़ रुपए रिलीज किए जा चुके हैं। किस्तें न देने पर बयाज ही 88 करोड़ रुपए बन चुका है।
ये लोग 2025 में 15 फीसदी ब्याज पर लिया गया था। समय पर पैसा न देने के चलते कंपनी ने ब्याज को 24 फीसदी कर दिया जिससे दोनों गुरुघर लोन चुकाने में असमर्थ रहे।
इतना भारी भरकम लोन दोनों गुरुद्वारों की मैनजमेंट ने क्यों लिया। इसके लिए अभी जांच चल रही है। दोनों की मैनजमेंट की तरफ से लोन के उद्देश्य को क्लीयर नहीं किया गया है। लोन देने वाली फर्म ने ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस में लगाई याचिका
दोनों गुरुद्वारों और पूर्व सांसद की गारंटर लॉ फर्म के खिलाफ 1.3 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग ₹88.9 करोड़) से अधिक का कर्ज न चुकाने का सिविल मुकदमा दर्ज किया गया है। ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस में यह याचिका ऋणदाता कंपनियों एसएसएमटी मैनेजमेंट इंक (SSMT) और ऑकुलस मॉर्गेज जीपी इंक (Oculus Mortgage) द्वारा दायर की गई है। इस पूरे मामले में कनाडा के पूर्व लिबरल सांसद और वकील राजविंदर ग्रेवाल तथा उनकी लॉ फर्म ‘आरएसजी लॉ प्रोफेशनल कॉरपोरेशन की भूमिका भी कटघरे में है।
लोन की लिमिट 1.5 करोड़ कनाडाई डॉलर
अदालत में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, कर्ज देने वाली कंपनी SSMT ने 25 अप्रैल 2025 को सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो को 1 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग ₹68.4 करोड़) का लोन दिया था। बाद में 20 मई को इस लोन की सीमा बढ़ाकर 1.5 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग ₹102.6 करोड़) कर दी गई। इसके तहत सिक्योरिटी के तौर पर ब्रैम्पटन के नानकसर गुरुद्वारे की संपत्ति को शामिल किया जाना था। लोनदाता का आरोप है कि अब तक लगभग 82.1 करोड़ रुपए जारी किए जा चुकी हैं, लेकिन किस्तें न भरने से ब्याज 88.9 करोड़ से अधिक हो गया है। इस लोन पर शुरुआत में 15% सालाना ब्याज तय था, जिसे बाद में बढ़ाकर 24% कर दिया गया। पूरी राशि पर हर महीने 2.5 करोड़ बयाज ही बन रहा है। गुरुघर की सिक्योरिटी न देने पर बढ़ा विवाद
विवाद का मुख्य कारण गुरुद्वारे की प्रापर्टी की कानूनी सिक्योरिटी न देना है। लोनदाता का दावा है कि आरएसजी लॉ के मालिक और संचालक दविंदर खटड़ा को ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति पर सेकंड-चार्ज दर्ज कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन यह कागजी कार्रवाई पूरी ही नहीं की गई, जिससे लोन के बदले मिलने वाली सिक्योरिटी अधर में लटक गई। ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति बेचने लगाई रोक मामले की गंभीरता को देखते हुए ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट के जज फ्रेडरिक एल. मायर्स ने 11 सितंबर को आदेश दिया कि जनवरी में होने वाली अगली सुनवाई तक ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही इस पर कोई नया लोन लिया जा सकता है। हालांकि, मुकदमे की वर्तमान स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के वकीलों के बयानों में विरोधाभास है; पूर्व सांसद ग्रेवाल के वकील साइमन बीबर का कहना है कि मामला सुलझा लिया गया है, जबकि ऋणदाता कंपनी की वकील मारिया नाइमार्क ने स्पष्ट किया है कि मामला अभी तक सुलझा नहीं है और कानूनी लड़ाई जारी है।
दोनों गुरुद्वारों के बीच संदिग्ध लेन-देन भी सामने आए
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान आरएसजी लॉ के ट्रस्ट अकाउंट और दोनों गुरुद्वारों के बीच हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन भी सामने आए हैं। लॉ सोसाइटी की कार्यवाहियों के रिकॉर्ड के अनुसार, अप्रैल माह में आरएसजी लॉ के खातों से टोरंटो गुरुद्वारे को 2,50,000 कनाडाई डॉलर (लगभग ₹1.71 करोड़) की दो किस्तें और ब्रैम्पटन गुरुद्वारे को भी 2,50,000 कनाडाई डॉलर (लगभग ₹1.71 करोड़) का भुगतान किया गया था। इसके अलावा, ‘बैंक ऑफ नोवा स्कॉटिया’ से जुड़े एक अलग चेक धोखाधड़ी के मामले में भी विवादित फंड से 2,50,000 कनाडाई डॉलर (लगभग ₹1.71 करोड़) की राशि टोरंटो गुरुद्वारे के खाते में ट्रांसफर होने के सबूत मिले हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *