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लुधियाना के कस्बा खन्ना की पुलिस ने 2 महिलाओं से सोने की बालियां छीनने वाले लुटेरे को गिरफ्तार करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया। इस मामले की निगरानी एसएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने खुद की। पहला मामला 22 अगस्त की सुबह का है, जब गुरु रामदास नगर निवासी सरबजीत कौर गुरुद्वारे जा रही थीं। बाइक सवार एक युवक उनके कान से सोने की बाली झपटकर फरार हो गया। अगले ही दिन, 23 अगस्त को, इसी तरह एक अन्य बुजुर्ग महिला को निशाना बनाया गया। सीसीटीवी में दिखा संदिग्ध व्यक्ति लगातार 2 वारदातों के बाद पुलिस के सामने आरोपी को पकड़ने की चुनौती थी। पुलिस ने शहर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। इसी दौरान एक फुटेज में संदिग्ध व्यक्ति सुभाष बाजार के एक दुकान का कैरी बैग लिए हुए दिखा। एसएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया के निर्देश पर, पुलिस ने फुटेज और कैरी बैग पर दिख रहे लोगो का विश्लेषण करने के लिए AI की मदद ली। AI की सहायता से पुलिस को पता चला कि खन्ना में इसी नाम की 2 दुकानें हैं। AI ने दुकान के लोगो से पुलिस को सही ठिकाने पर पहुंचाया। उस दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज हासिल की गई। इसमें आरोपी अर्शदीप सिंह बब्बू निवासी इकोलाहा वारदात के बाद जूते और कपड़े खरीदते हुए स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इस फुटेज से पुलिस को उसकी पहचान करने और उसे गिरफ्तार करने में सफलता मिली। पूछताछ में अर्शदीप ने अपने साथी दीपक बाली निवासी पीरखाना रोड, खन्ना का नाम बताया। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। जांच आगे बढ़ी तो लूट के सामान को ठिकाने लगाने की पूरी कड़ी सामने आने लगी। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी लूटपाट और चोरी के सोने के जेवर खन्ना के सर्राफा बाजार में रमेश ज्वेलर्स के मालिक कपिल कुमार और उसके भाई जितेंद्र कुमार निवासी खन्ना को बेचते थे। पुलिस ने दोनों ज्वेलरों को भी नामजद कर गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से लूटपाट से संबंधित सामान बरामद किया। अर्शदीप सिंह के खिलाफ पहले से 2 मामले दर्ज पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अर्शदीप सिंह के खिलाफ पहले से दो मामले और दीपक बाली के खिलाफ पांच मामले दर्ज हैं। यानी यह सिर्फ 2 दिनों की झपटमारी का मामला नहीं था, बल्कि पूछताछ के बाद पुलिस को पहले की वारदातों और लूट के सामान के नेटवर्क तक पहुंचने का रास्ता भी मिला। कैरी बैग बना अहम किरदार इस पूरी कहानी का सबसे अहम किरदार कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि एक साधारण सा कैरी बैग बन गया। जिस बैग को सड़क पर गुजरते सैकड़ों लोग शायद कभी नोटिस भी न करते, उसी पर बने लोगो ने पुलिस को दुकान तक पहुंचाया, दुकान की फुटेज ने चेहरे तक पहुंचाया और चेहरे ने आरोपी तक। यही वह अंतर है जो पारंपरिक जांच और तकनीक आधारित जांच के बीच दिखाई देता है।
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खन्ना पुलिस ने AI की मदद से पकड़ा लुटेरा:वारदात के बाद दुकान पर खरीदारी करने पहुंचा; कई लोगों से कर चुका झपटमारी
