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गरीब देशों में 80% कामकाजी महिलाएं:महिलाओं के काम पर जाने से घरों में बराबरी बढ़ी- स्टडी




महिलाओं के नौकरी करने का असर सिर्फ परिवार की आय पर नहीं पड़ता, घर में उनकी स्थिति भी बदलती है। द इकोनॉमिस्ट ने एक रिसर्च की है। इसमें कम और मध्यम आय वाले देशों के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया कि नौकरी करने वाली महिलाएं घर में ज्यादा फैसले लेती हैं। महिलाओं की नौकरी और घर में उनकी बढ़ी भूमिका का असर भारत में भी दिखा। एक अध्ययन में सार्वजनिक रोजगार योजना से जुड़ी महिलाओं ने तब ज्यादा काम किया, जब मजदूरी उनके अपने खातों में जमा हुई और उन्हें खाते के इस्तेमाल की ट्रेनिंग मिली। उत्तर प्रदेश की संध्या ने पति से अलग होने के बाद बेटे के खर्च के लिए काम शुरू किया, लेकिन गांव में देर से घर लौटने और अच्छे कपड़े पहनने पर उनके चरित्र को लेकर अफवाहें फैलाई गईं। सऊदी अरब की हमदा को भी पति ने नौकरी से रोका, लेकिन घर के खर्च और उसकी बहनों के नौकरी करने के बाद वह मॉल में काम करने लगीं। इस तरह इन सभी महिलाओं ने अफवाहों को नजरअंदाज करते हुए न केवल परिवार संभाली बल्कि महिलाशक्तिकरण का समर्थन किया। 21 देशों में सिर्फ 30 फीसदी महिलाएं काम करती हैं विश्लेषण में 21 सबसे ज्यादा लैंगिक भेदभाव वाले देशों में सिर्फ 30% महिलाएं काम करती मिलीं। यहां परिवार या देश कितना भी गरीब हो, महिलाओं के काम करने की दर कम रही। वहीं, गरीब देशों में भेदभाव का स्तर मध्यम होने पर सबसे गरीब परिवारों में 55% महिलाएं काम करती मिलीं। सबसे कम भेदभाव वाले देशों में यह आंकड़ा 80% तक पहुंच गया। भारत में हर 100 में करीब 39 महिलाएं काम कर रहीं भारत में भी महिलाओं के काम करने की हिस्सेदारी अब पहले से बढ़ी है। केंद्र सरकार की 2025 की श्रम सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 15 साल और उससे ज्यादा उम्र की महिलाओं में 38.8% काम कर रही थीं। यानी हर 100 महिलाओं में करीब 39 महिलाएं काम में थीं। वहीं, दक्षिण एशिया में सिर्फ एक-तिहाई महिलाएं श्रम बाजार में हैं, जबकि मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका में यह हिस्सेदारी करीब 20% और उत्तरी अमेरिका में 70% है। विश्व बैंक के अनुसार, महिलाओं के काम करने की बाधाएं हटाने से कई देशों में प्रति व्यक्ति आय करीब 20% बढ़ सकती है। 6 मिनट का वीडियो दिखाया तो नौकरी की मंजूरी 35-57% बढ़ी उत्तर प्रदेश में हुए एक अध्ययन में पतियों और ससुराल वालों को महिलाओं के नौकरी प्रशिक्षण का 6 मिनट का वीडियो दिखाया गया। इसमें बताया गया कि बुनाई की फैक्ट्री सुरक्षित है और वहां काम करने वाली महिलाएं घर का काम भी कर सकती हैं। वीडियो दिखाने के बाद महिलाओं को नौकरी की अनुमति मिलने की संभावना 35 से 57% बढ़ गई।



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