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किशनगंज में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह सीमांचल क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भू-अर्जन विभाग को अधियाचना सौंप दी है, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे किशनगंज जिले के तीन प्रखंडों ठाकुरगंज, बहादुरगंज और टेढ़ागाछ से होकर गुजरेगा। परियोजना के लिए कुल 51 मौजा की भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इनमें ठाकुरगंज प्रखंड के 22, बहादुरगंज के 23 और टेढ़ागाछ के छह मौजा शामिल हैं। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। लगभग 519 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे करीब 32 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बनाया जाएगा। 2028 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से शुरू होकर बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। परियोजना पूरी होने के बाद सीमांचल क्षेत्र में व्यापार, उद्योग, कृषि विपणन और पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना है। नेपाल, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के साथ बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सामरिक दृष्टि से भी यह एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 8 घंटे में तय की जा सकेगी दूरी वर्तमान में गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक की यात्रा में लगभग 14 से 15 घंटे लगते हैं। एक्सप्रेसवे के निर्माण से यह दूरी मात्र 6 से 8 घंटे में तय की जा सकेगी। इससे माल परिवहन में तेजी आएगी और यात्रियों के समय की भी बचत होगी। निर्माण कार्य के दौरान और उसके बाद स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की भी उम्मीद है।
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गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू:किशनगंज के लोगों को होगी सुविधा, 15 घंटे की जगह 8 घंटे में तय करेंगे दूरी
