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चंडीगढ़ प्रशासक बोले दिसंबर तक नशा खत्म करे पुलिस:साथ देने वाले पुलिसकर्मी नपेंगे, मेयर बोले- पावर दीजिए तस्करों के घरों पर बुलडोजर चलवा दूं




चंडीगढ़ नगर निगम की ओर से वीरवार को नशा मुक्ति अभियान की शुरुआत की गई। अभियान में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी शामिल हुए। इस दौरान प्रशासक ने चंडीगढ़ पुलिस को नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें दिसंबर तक शहर से नशा खत्म चाहिए। कटारिया ने पुलिस अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस दौरान किसी पुलिस कर्मचारी या अधिकारी के नशा बेचने वालों का साथ देने की जानकारी सामने आती है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासक ने कहा कि शहर से नशे को खत्म करने के लिए पुलिस को पूरी गंभीरता से कार्रवाई करनी होगी। नशा युवाओं और आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है और इसे जड़ से खत्म करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। पावर दें तो बुलडोजर चलवा दूं नशा मुक्ति अभियान के दौरान चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने भी नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। उन्होंने प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से कहा कि अगर उन्हें अधिकार दिए जाएं तो वह नशा बेचने वालों के घरों पर बुलडोजर चलवा दें। मेयर ने कहा कि नशा शहर की युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है। इसलिए इसे चंडीगढ़ से जड़ से खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोजाना पुलिस नशा बेचने वालों को पकड़ने का दावा करती है, लेकिन इसके बावजूद शहर में नशे की समस्या बनी हुई है। मेयर ने सवाल उठाया कि आखिर शहर में नशा कहां से आ रहा है और इसके पीछे बड़े नशा तस्कर कौन हैं। छोटे नशा बेचने वालों को पकड़ वाहवाही लूट रहे शहर में नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस छोटे-मोटे स्तर पर नशा बेचने वालों को पकड़कर कार्रवाई का दावा करती है और इससे वाहवाही भी लूटती है, लेकिन सवाल यह है कि नशे के असली सौदागर कहां हैं। मेयर ने कहा कि केवल छोटे स्तर पर नशा बेचने वालों को पकड़ने से नशे की समस्या खत्म नहीं होगी। पुलिस को उन बड़े लोगों तक पहुंचना होगा, जो नशे की सप्लाई कर रहे हैं और इसके पीछे मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। जब तक नशे की सप्लाई की असली कड़ी को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक छोटे विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई का कोई स्थायी असर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या की जड़ तक पहुंचकर कार्रवाई करने की जरूरत है। पुलिस को यह पता लगाना चाहिए कि शहर में नशा कहां से आ रहा है, इसकी सप्लाई कौन कर रहा है और इसके पीछे कौन लोग जुड़े हुए हैं। बड़े सौदागरों और सप्लाई नेटवर्क पर कार्रवाई होने के बाद ही नशे की समस्या पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सकती है। पहले चेतावनी दे चुके प्रशासक कटारिया यह पहली बार नहीं है जब चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने पुलिस को नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले जब वह पहली बार नगर निगम की हाउस मीटिंग में शामिल हुए थे, तब भी उन्होंने नशे के मुद्दे पर पुलिस को सख्त निर्देश दिए थे। उस दौरान कटारिया ने कहा था कि अगर पुलिस चाहे तो कुछ ही दिनों में नशे को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि पुलिस को नशे के बारे में और नशा बेचने वालों के बारे में जानकारी होती है, इसलिए पुलिस को प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने पुलिस को नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश भी दिए थे। अब नशा मुक्ति अभियान की शुरुआत के दौरान एक बार फिर प्रशासक ने पुलिस को दिसंबर तक शहर से नशा खत्म करने का लक्ष्य दिया है।



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