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चाबियां हाथ में फिर भी NRI के फ्लैट पर कब्जा:पूर्व किरायेदार ने मालिक बन बनाया फर्जी एग्रीमेंट, कोर्ट से लिया स्टे; FIR दर्ज




पंजाब के मोहाली (खरड़) स्थित एक सोसाइटी में एनआरआई (NRI) परिवार के बंद पड़े फ्लैट पर ताला तोड़कर जबरन कब्जा करने, सामान चोरी करने और अदालत को गुमराह कर स्टे लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित के मुताबिक पूर्व किरायेदार की बेटी ने जुलाई 2025 में मैसेज कर फ्लैट खाली करने की सूचना दी थी, जिसके बाद उनके रिश्तेदार ने चाबियां प्राप्त कर बेडरूम का ताला लगा दिया था। इसके बावजूद, जब अप्रैल 2026 में एनआरआई परिवार मौके पर पहुंचा तो ताले टूटे मिले और अंदर आरोपी काबिज थे। पूछताछ करने पर कब्जाधारियों ने दावा किया कि पूर्व किरायेदार ने खुद को फ्लैट का मालिक बताकर एक फर्जी एग्रीमेंट बनाया है, जिसके आधार पर कोर्ट से स्टे लिया गया है। जब उनसे मूल दस्तावेज मांगे गए, तो उन्होंने माना कि ओरिजिनल पेपर उनके पास नहीं हैं। गालियां देने, जान से मारने व झूठे केस में फंसाने की धमकी देने के इस पूरे मामले में एनआरआई विंग पुलिस ने मुख्य आरोपी, पूर्व किरायेदार और अन्य सहयोगियों (कुल 5 लोगों) के खिलाफ दी थी। पुलिस ने पहले चरण हरजिंदर कौर निवासी सदर बीएनएस (BNS) की धारा 329(4) के तहत केस दर्ज कर चोरी का सामान बरामद करने और फ्लैट खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। अब 7 प्वाइंट में जानिए कैसे प्लॉट पर पर आरोपियो ने किया खेल मकान खाली कर चाबियां भाई को दी संदीप सिंह ने बताया कि मैं खुद, भाई नवदीप सिंह और बहन रूपिंदरजीत कौर के साथ कनाडा में रहता हू और एनआरआई हूं। हमारा ऑरा एवेन्यू, खानपुर, मोहाली में फ्लैट है। हम इस फ्लैट के मालिक और कब्जाधारी हैं। यह फ्लैट साल 2020-21 में एक महिला को किराये पर दिया गया था। उसने 11 जुलाई 2025 को फ्लैट खाली कर दिया था और इसकी चाबियां मेरे बुआ के लड़के मनिंदर पाल सिंह को दे दी थीं। महिला की बेटी ने 4 जुलाई 2025 को मुझे व्हाट्सऐप मैसेज भेजकर बताया था कि उन्होंने हमारा फ्लैट खाली कर दिया है और मैं अपना कोई व्यक्ति भेजकर चाबियां ले लूं। इसके बाद 11 जुलाई 2025 को उनसे फ्लैट की चाबियां ले लीं और बेडरूम के गेट पर ताला लगा दिया। फ्लैट पर लगाए गए तालों की चाबियां हमारे पास थीं। फ्लैट पर आया तो घर पर महिला मिली मैं 20 फरवरी 2026 को कनाडा से पंजाब आया था और अपने गांव कौलपुर, तहसील मुकेरियां, जिला होशियारपुर में रह रहा था। 7 अप्रैल 2026 को सुबह करीब 10:30 बजे मैं चंडीगढ़ किसी काम से जा रहा था। रास्ते में मैं मनिंदर पाल सिंह के साथ अपने फ्लैट पर गया। वहां पहुंचकर हमने देखा कि फ्लैट के ताले टूटे हुए थे। अंदर एक महिला हरजिंदर कौर और उसकी बेटी मौजूद थीं। हमे अंदर आने से रोका और गालियां दी जब हमने आवाज लगाई तो दोनों बाहर आईं। हमने उनसे पूछा कि वे कौन हैं। इस पर हरजिंदर कौर ने कहा कि दरवाजे के बाहर ही रुको, अगर कोई बात करनी है तो बाहर ही कर सकते हो। मैंने उसे बताया कि मैं इस फ्लैट का मालिक हूं। इस पर उसने कहा कि उसने इस फ्लैट पर कोर्ट से स्टे ले रखा है। इसके बाद उसने हमें केस से संबंधित कागजात की कॉपी दी। यह देखकर हम दोनों हैरान और परेशान हो गए, क्योंकि फ्लैट पर लगे मूल ताले और उनकी चाबियां हमारे पास थीं। हरजिंदर कौर और उसकी बेटी ने हमें गालियां दीं और धमकी दी कि वे हमें वहां नहीं रहने देंगी और हमारे खिलाफ झूठा केस दर्ज करवा देंगी। अदालत में फर्जी एग्रीमेंट के सहारे स्टे ली इन लोगों (पूर्व किराएदारों व काबिल महिला) ने आपस में साजिश करके एक फर्जी एग्रीमेंट अदालत में पेश किया और उसके आधार पर अंतरिम स्टे हासिल किया। मेरा आरोप है कि इस फर्जी एग्रीमेंट का इस्तेमाल कर हमारे फ्लैट में अवैध रूप से प्रवेश किया गया। फ्लैट में रखा बेड, सोफा, कुर्सियां, टेबल, फ्रिज, बिस्तर और घर का अन्य सामान भी गायब था। यह सारा सामान मेरे पिता दलजीत सिंह ने खरीदा था। साजिश के तहत फ्लैट पर काबू किया इन सभी लोगों की नीयत शुरू से ही हमारे फ्लैट को आपस में साजिश करके गलत तरीके से कब्जाने की थी। इन लोगों ने हमारे फ्लैट के ताले तोड़कर अंदर प्रवेश किया, हमारा सामान अपने कब्जे में लिया और फिर कथित फर्जी एग्रीमेंट अदालत में पेश करके स्टे हासिल किया। यह फर्जी एग्रीमेंट लेसली राव ने खुद को इस फ्लैट का मालिक बताते हुए तैयार किया, जबकि फ्लैट के असली मालिक मैं, मेरा भाई नवदीप सिंह और मेरी बहन रूपिंदरजीत कौर हैं। हमारे पास मालिकाना हक का सबूत है और इसकी फर्द भी संलग्न है। फ्लैट में लगा बिजली का मीटर भी मेरे पिता दलजीत सिंह के नाम पर है। जब इकरारनामा मांगा तो नहीं दिखा पाए जब मैंने हरजिंदर कौर से उस मूल इकरारनामे की मांग की, जिसके आधार पर उसने कोर्ट से स्टे लेने की बात कही थी, तो उसने कहा कि असली इकरारनामा पूर्व किराएदार के पास है और उसके पास नहीं है। इससे हमें शक हुआ कि अदालत में मूल दस्तावेज के बजाय फर्जी एग्रीमेंट की फोटोकॉपी पेश कर अदालत को गुमराह किया गया। चंडीगढ़ में रहने को यही घर था हम एनआरआई परिवार हैं और जब भी विदेश से पंजाब आते हैं तो इसी फ्लैट में रहते हैं। चंडीगढ़ के पास हमारे पास रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है। हमारे अनुसार, हमारे साथ धोखा किया गया है और हमारी संपत्ति पर गलत तरीके से कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। हम चाहते हैं कि पूरे मामले की जांच की जाए, फ्लैट से अवैध रूप से रह रहे लोगों को हटाया जाए, हमारा सामान बरामद कर हमें वापस दिलाया जाए और फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा इस्तेमाल करने के आरोपों की जांच की जाए।



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