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राज्य की पुलिसिंग में सुधार के लिए वरिष्ठ आईपीएस अफसरों ने अलग-अलग थानों को गोद लिया है। पिछले साल नवा रायपुर में आयोजित 60वीं अखिल भारतीय डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी आईपीएस व रापुसे के अधिकारियों को एक-एक थाना गोद लेने का निर्देश दिया था। इसी कड़ी में राज्य के 125 से ज्यादा अधिकारियों को थानों की जिम्मेदारी दी गई है। डीजीपी अरुणदेव गौतम ने रतनपुर थाने को गोद लिया है। एडीजी एसआरपी कल्लूरी कोतवाली बस्तर, प्रदीप गुप्ता तुमगांव महासमुंद, दीपांशु काबरा कोतवाली अंबिकापुर, अमित कुमार लालबाग राजनांदगांव, पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला टिकरापारा और आईजी अमरेश मिश्रा ने हदबंद बलौदाबाजार थाने को गोद लिया है। आईपीएस के अलावा राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को भी थाने की जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी 15 अगस्त के बाद अपने-अपने थाने का निरीक्षण करने आए। वहां क्या-क्या काम करना है। इसकी कार्ययोजना बनाएंगे। डीजीपी करेंगे मॉनिटरिंग
इस योजना की पूरी मॉनिटरिंग डीजीपी अरुण देव गौतम खुद करेंगे। संबंधित अधिकारी ने कब-कब थाने का निरीक्षण किया, थाना प्रभारी और स्टाफ के साथ बैठक की या नहीं, क्या कार्ययोजना बनाई है, थाने में किस तरह के सुधार और पुलिसिंग की जरूरत है, थाने में क्या नया किया जा सकता है और उसे कैसे स्मार्ट बनाया जा सकता है। इन सभी बिंदुओं पर नजर रखी जाएगी। अधिकारी अपना रिपोर्ट कार्ड भी बनाएंगे। हालांकि, इस दौरान यह भी ध्यान रखना होगा कि थाने की नियमित पुलिसिंग और कामकाज प्रभावित न हो। अब बीट पुलिसिंग पर फोकस होगा
थाना गोद लेने की योजना का मुख्य उद्देश्य बीट पुलिसिंग को मजबूत करना है। इससे क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों, नए लोगों की एंट्री और अपराधियों की निगरानी आसान होगी। साथ ही पुलिस-जन संवाद बेहतर होगा। सामुदायिक पुलिसिंग पर जोर दिया जाएगा। थानों में रिकॉर्ड का संधारण, मालखानों का आधुनिकीकरण और लंबित मामलों का निपटारा प्राथमिकता में रहेगा। शिकायतों के समाधान और स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने पर भी फोकस किया जाएगा।
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छत्तीसगढ़ में DGP-IGP कॉन्फ्रेंस के निर्देशों का पालन:पुलिसिंग में सुधार के लिए आईपीएस ने थाने गोद लिए, डीजीपी संभालेंगे रतनपुर
